राम मंदिर चढ़ावा: चंपत राय का दावा- मैंने नहीं दी 2025 के कैश गिनती दिशानिर्देश को मंज़ूरी, बैंक ज़िम्मेदार

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने एक लिखित बयान में फरवरी 2025 में मंदिर में नकदी गिनने की प्रक्रिया के लिए जारी दिशानिर्देशों वाले पत्र को ख़ारिज करते हुए कहा कि इस पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं. उनके अनुसार, ट्रस्ट के बैंक के साथ हुए एमओयू में कैश गणना वाले कमरे में सभी सुरक्षा उपाय किए गए थे. बैंक की ओर से कुर्सी और मेज पर बैठकर नकदी गिनने की सलाह दिए जाने से चोरी की घटनाएं संभव हुईं.

चंपत राय. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि की कथित चोरी और गबन की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष दिए गए अपने बयान में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने दावा किया है कि उन्होंने फरवरी 2025 में मंदिर में नकदी गिनने की प्रक्रिया के लिए जारी दिशानिर्देशों को मंजूरी नहीं दी थी.

उन्होंने उस पत्र को ‘खारिज’ कर दिया है जिस पर ट्रस्ट के एक और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अयोध्या ब्रांच के चीफ मैनेजर गोविंद मिश्रा के हस्ताक्षर हैं.

6 जुलाई को एसआईटी के समक्ष हिंदी में दिए गए अपने एक पृष्ठ के बयान में राय ने कहा, ‘मैं इस पत्र से कदापि सहमत नहीं हूं. मैं इसे अस्वीकार करता हूं. यद्यपि इसमें लिखा है कि इसकी प्रतिलिपि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव को भेजी गई थी. मुझे तो इस दिशानिर्देश पत्र के बारे में जानकारी 13 जून 2026 को मेरे अकाउंट ऑफिस से मिली.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इन दस्तावेजों पर मेरे हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि अगस्त 2020 से जून 2026 के बीच हुए सभी अनुबंधों पर केवल मेरे और दूसरी पार्टी के मुख्य अधिकारी के हस्ताक्षर हैं. इस दिशानिर्देश पत्र पर मेरे हस्ताक्षर क्यों नहीं लिए गए? अगर मैं अयोध्या में नहीं था, तो प्रतीक्षा की जानी चाहिए थी.’

चंपत राय का बयान.

गौरतलब है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने मंदिर फंड के कथित गबन और भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच ट्रस्ट की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

राय ने अपने बयान में कहा, ‘9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे और उसके प्रत्येक पृष्ठ पर मेरे हस्ताक्षर हैं. एमओयू के अनुसार नकदी गिनने वाले कमरे में सीसीटीवी कैमरे, लोहे के सलाखों वाले दरवाजे सहित सभी सुरक्षा उपाय किए गए थे.’

अपने बयान में चंपत राय ने आरोप लगाया कि बैंक की ओर से कुर्सी और मेज पर बैठकर नकदी गिनने की सलाह दिए जाने से चोरी की घटनाएं संभव हुईं.

उन्होंने कहा, ‘कुर्सी पर बैठकर मेज पर रखकर नकदी गिनने का परामर्श बैंक का है, जो चोरी में सहायक बना. दुर्घटना सामने आने पर मेज हटाई गईं, जमीन पर बैठकर गणना होने लगी. देश के सभी बैंकों में चेस्ट रूम के कुछ नियम अवश्य होंगे. स्टेट बैंक के नियम तो कठोर होंगे, अंदर जाते समय और गणना कक्ष से बाहर आते समय विशेष तलाशी, बिना जेब के कपड़े आदि इसका पालन बैंक ने नहीं कराया और दिशानिर्देश पत्र में लिखा होने के बावजूद नहीं हुआ. बैंक ने सबसे पहले जो कपड़े दिए उसमें जेब थी, बैंक के वरिष्ठ अधिकारी बताएंगे कि चेस्ट रूम के नियमों के पालन में ढिलाई कैसे हो गई? मेरा विचार है कि बैंकों में चलने वाले नियमों की पूर्ण अनदेखी की गई.’

एसआईटी के सामने अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा, ‘शायद बैंक के उच्च अधिकारियों को भी इस दिशानिर्देश पत्र की कोई जानकारी नहीं होगी अन्यथा किसी स्तर पर तो भूल पकड़ में आती. यह दिशानिर्देश पत्र जल्दीबाजी में लिखा गया और लिखी गई बातों का भी तनिक भी पालन बैंक ने नहीं कराया. बैंक ने गणना के लिए जिन युवकों का चयन किया उन्हें हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में रखा है, क्या यह उचित है? मेरे विचार से कदापि नहीं, इसी कारण मेरा विचार है कि बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को शायद कुछ भी पता नहीं है.’

उल्लेखनीय है कि इसके बाद सात जुलाई को जारी एक अन्य पत्र में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने घोषणा की थी कि वह इस पूरे मामले पर ‘मौन’ रहेंगे.

ज्ञात हो कि चंपत राय का नाम लंबे समय से उनके करीबी रहे कई लोगों, जिनमें राम मंदिर प्रबंधन से जुड़े उनके सहयोगी भी शामिल हैं, बार-बार सामने लाया गया. इन लोगों ने इस कथित घोटाले के लिए उन्हें (और कुछ अन्य लोगों को) जिम्मेदार ठहराते हुए मांग की कि जांच में उन्हें भी आरोपी बनाया जाए.

जहां एक ओर फैजाबाद बार एसोसिएशन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहा है, वहीं उनके पूर्व सहयोगी और भाजपा सांसद विनय कटियार ने सार्वजनिक रूप से यह तक कह दिया कि उन्हें जेल जाना पड़ेगा. ये सभी बयान मीडिया और टेलीविजन कैमरों के सामने दिए गए, जिसके बाद पिछले सप्ताह चंपत राय ने विवादों के बीच मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया.

चंपत राय के करीबी सहयोगी बताए जा रहे ‘टिन्नू’ यादव इस मामले के आरोपियों में शामिल हैं. एसआईटी ने अपनी जांच में टिन्नू यादव, अनिल मिश्रा और पहले से गिरफ्तार आठ अन्य लोगों का नाम लिया है. अनिल मिश्रा ने भी उसी दिन ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया, जिस दिन चंपत राय ने पद छोड़ा. हालांकि, एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय का नाम शामिल नहीं है.