नई दिल्ली: सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने संबंधित बीबीसी की एक पड़ताल सामने आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बीते दिनों इसकी मूल कंपनी मेटा को तलब किया था, जिसके बाद मंगलवार (7 जुलाई) को कंपनी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक विस्तृत ब्लॉग जारी किया है.
इस ब्लॉग में मेटा ने उन उपायों के बारे में जानकारी दी है, जिसे उसने अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट से निपटने के लिए अपनाए हैं, जैसे विज्ञापन की समीक्षा प्रणाली, एआई टूल और कार्रवाई करना.
उल्लेखनीय है कि बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक रिपोर्ट में दिखाया गया था कि कैसे इंस्टाग्राम एक भारतीय यूज़र के अकाउंट को बच्चों और वयस्कों से जुड़े सेक्स और शोषण वाले विज्ञापनों की ओर धकेलता है. इस पड़ताल में मेटा के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद भारत सरकार ने मेटा को ऐसे कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था.
अब मेटा ने जानकारी दी है कि उसने पिछले एक साल में भारत में ऐसे 1,60,000 से ज़्यादा विज्ञापनदाताओं के अकाउंट हटाए हैं.
कंपनी ने बताया कि पिछले साल दुनियाभर में फेसबुक और इंस्टाग्राम से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 3.6 करोड़ कंटेंट (अकाउंट नहीं) हटाए गए थे. मेटा ने बताया कि उसने दुनिया भर में 40 लाख से ज्यादा ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स को ब्लॉक किया है.
बीबीसी का नाम लिए बिना मेटा ने कहा, ‘हमें भारत में इंस्टाग्राम विज्ञापनों के बारे में हालिया खबरों की जानकारी है, जिन्होंने बच्चों के शोषण के विरुद्ध हमारी नीतियों का उल्लंघन किया है. हम साफ करना चाहते हैं कि हम इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं. हम कभी नहीं चाहते कि ऐसा कंटेंट हमारे प्लेटफॉर्म पर हो और हम इससे निपटने के प्रयासों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’
कंपनी ने अपने बयान में आगे कहा, ‘हम उन अपराधियों से लगातार लड़ रहे हैं जो हमारे 3.5 अरब यूज़र्स के बीच छिपे होते हैं और हमारी पकड़ से बचने की कोशिश करते हैं.’
मालूम हो कि बीबीसी की रिपोर्ट में साइबर-क्राइम के जानकारों ने बताया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म को यूज़र्स से बड़ी संख्या में शिकायतें इसलिए भी मिलती हैं क्योंकि भारत में उसका कामकाज बहुत बड़े पैमाने पर होता है.
सीएनबीसी (यूएस) की मई में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने अप्रैल 2026 की अपनी आय संबंधी रिपोर्ट में बताया था कि उसकी पहली तिमाही में 56.3 बिलियन डॉलर की कमाई का लगभग 98% हिस्सा विज्ञापन से आया था.
बीबीसी की रिपोर्ट
इस संंबंध में शुक्रवार (3 जुलाई) को प्रकाशित बीबीसी की रिपोर्ट एक ऐसे इंस्टाग्राम अकाउंट पर आधारित थी जिसे उसके कर्मचारियों ने बच्चों के शोषण से जुड़े या उससे लिंक करने वाले विज्ञापनों पर मेटा की प्रतिक्रिया को परखने के लिए बनाया था. रिपोर्ट के मुताबिक यूज़र की शिकायत पर प्रतिक्रिया देने में मेटा को 24 घंटे का समय लगा.
इस संबंध में बीबीसी ने जब मेटा से संपर्क किया, तो कंपनी ने कहा कि उसने रिपोर्ट किए गए कंटेंट के साथ-साथ अपनी पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले दूसरे कंटेंट को भी हटा दिया है और उन अकाउंट्स की रिपोर्ट भी की है.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बीबीसी ने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन की रिपोर्ट किया था, जिसमें एक बहुत छोटी बच्ची रोती हुई दिख रही थी और उसमें लिखे शब्दों से संकेत मिल रहा था कि उसका यौन शोषण हुआ है.’
बीबीसी ने जब ऐसे एक विज्ञापन को इंस्टाग्राम को रिपोर्ट किया, तब 24 घंटे बाद सोशल मीडिया कंपनी का जवाब आया कि ये पोस्ट उनकी ‘कम्युनिटी गाइडलाइन्स’ का उल्लंघन नहीं करतीं.
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने बाद में बीबीसी से कहा कि ‘कोई सिस्टम परफेक्ट नहीं होता और हमारे रिव्यू प्रोसेस सभी ‘पॉलिसी वॉयलेशन’ नहीं पकड़ पाते.’
मेटा ने बीबीसी को दिए जवाब में आगे कहा, ‘हम विज्ञापनों के लाइव होने के बाद उन पर लगातार ‘प्रोएक्टिव डिटेक्शन टेकनॉलॉजी’ चलाते हैं और किसी को भी अगर लगे कि कोई विज्ञापन हमारे नियम तोड़ रहा है तो वे उसे रिपोर्ट कर सकते हैं.’
कंपनी ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि वह जानबूझकर और सोच-समझकर ऐसे विज्ञापन दिखाती है. इसके उलट कंपनी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करती है जो उन अकाउंट्स की पहचान करती है जिनमें बच्चों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि देखी गई हो और कंपनी ने पिछले वर्ष ऐसे 40 लाख से अधिक अकाउंट्स को स्वत: हटा दिया था.
भारत की कार्रवाई
इस बीच बीबीसी की रिपोर्ट प्रकाशित होने के तुरंत बाद भारत सरकार ने मेटा (जो इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और फेसबुक की मालिक कंपनी है) से बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक, सेक्शुअल और गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए कार्रवाई करने को कहा था.
इससे पहले 1 जुलाई को सरकार ने मेटा के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप को उसके नए यूज़रनेम फीचर को लेकर नोटिस भेजा था.
मेटा ने अपने एक बयान में कहा कि भारत में हटाए गए 1,60,000 अकाउंट्स, इस काम के लिए बनाए गए एआई टूल्स की वजह से हटाए गए थे. कंपनी ने कहा कि अपनी पॉलिसी के हिसाब से कंटेंट की जांच-परख में इंसानी रिव्यूअर्स भी शामिल होते हैं.
‘फाइनेंशियल टाइम्स‘ की रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा लागत कम करने की कोशिश के तहत इंसानी कंटेंट रिव्यूअर्स के बजाय एआई टूल्स का इस्तेमाल करने की ओर बढ़ रहा है.
29 अमेरिकी राज्यों ने मेटा के खिलाफ कदम उठाया
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून को अमेरिकी अदालत ने 29 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल्स द्वारा दायर मुकदमे को रोकने से इनकार कर दिया था. इस मुकदमे में मेटा पर आरोप लगाया गया है कि उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह से डिज़ाइन किया है कि बच्चे इनकी लत का शिकार हो जाएं और कंपनी ने जानबूझकर इनसे होने वाले नुकसान को जनता से छिपाया है.
इस मामले में राज्यों के पक्ष में फ़ैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि मेटा ने ‘चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट’ (अमेरिका का एक फेडरल कानून) के तहत नोटिस और माता-पिता की सहमति से जुड़ी ज़रूरतों का पालन नहीं किया.
इस संबंध में रॉयटर्स ने मेटा के हवाले से कहा है कि वह इन आरोपों से ‘पूरी तरह असहमत’ है और ‘युवाओं की मदद’ करने के लिए प्रतिबद्ध है.
