राम मंदिर चढ़ावा चोरी: नृपेंद्र मिश्र बोले- यह शर्मनाक है, हम अपमानित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने चढ़ावा राशि के कथित ग़बन को 'शर्मनाक' बताया है. उन्होंने कहा कि इस घटना से मंदिर से जुड़े लोग अपमानित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. मिश्र ने भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए प्रबंधन व्यवस्था को और मज़बूत किया जाएगा.

(फोटो साभार: फेसबुक/@champatraiji)

नई दिल्ली: राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि के कथित गबन को ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा है कि इस घटना से मंदिर से जुड़े सभी लोग स्वयं को ‘अपमानित और ठगा हुआ’ महसूस कर रहे हैं.

उन्होंने भरोसा जताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा.

शनिवार को समिति की बैठक के दूसरे दिन पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव रह चुके मिश्र ने कहा, ‘चढ़ावा राशि की कथित चोरी शर्मनाक है. हम केवल खेद ही व्यक्त नहीं कर रहे, बल्कि इस घटना से अपमानित और ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि अब यह मामला मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रबंधन प्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाएंगे.

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति के सवाल पर मिश्र ने बताया कि उपयुक्त उम्मीदवार के चयन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है. यह समिति अपनी सिफारिशें ट्रस्ट को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद 22 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक प्रस्तावित है. इस बैठक में मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जाएगा.

हालांकि, मिश्र ने कहा कि उन्हें फिलहाल 22 जुलाई की बैठक के एजेंडे की जानकारी नहीं है.

एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट में क्या है?

17 जून 2026 को गठित एसआईटी ने 23 जून 2026 को नौ पृष्ठों की अंतरिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (गृह) को सौंपी. रिपोर्ट की शुरुआत में ही एसआईटी लिखती है कि प्रथमदृष्टया यह सामने आया है कि चढ़ावे की गणना करने वाले कुछ कर्मचारियों ने नकदी की चोरी और गबन किया.

सीसीटीवी फुटेज में 40 दिन के भीतर 70 बार चोरी के कृत्य दर्ज हुए. अंतरिम रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि चढ़ावे के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में वर्षों से गंभीर कमियां थीं, जिन्हें आंतरिक ऑडिट लगातार रेखांकित करता रहा, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई.

एसआईटी ने छह व्यक्तियों- अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है. लेकन रिपोर्ट में ट्रस्ट के तत्कालीन महामंत्री और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता चंपत राय का जिक्र तक नहीं है.

एसआईटी ने ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की पर्यवेक्षणीय विफलता का तो उल्लेख किया है. लेकिन निर्णय लेने वाली शीर्ष संरचना या उसके अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है.

इसके अलावा कई बड़े सवाल, जैसे- कुल गबन की राशि और वर्षों से चली आ रही संस्थागत विफलताओं की अंतिम जिम्मेदारी, का जवाब भी रिपोर्ट में नहीं मिलता है.