राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष का इस्तीफ़े से इनकार, कहा- ख़ामियों के लिए स्टेट बैंक ज़िम्मेदार

चढ़ावा चोरी और कथित ग़बन की जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मंगलवार को कहा कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने माना है कि मंदिर में निगरानी में कुछ चूक ज़रूर हुई, लेकिन इसके लिए वे स्वयं को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार नहीं मानते.

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि पुणे में मीडिया से बातचीत करते हुए. (फोटो: स्क्रीनग्रैब/ पीटीआई)

नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने मंगलवार (14 जुलाई) को इस्तीफा देने से साफ इनकार करते हुए कहा कि वह इस चोरी के लिए खुद को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं मानते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, पुणे में मीडिया से बातचीत में गोविंद देव गिरि ने खामियों के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को जिम्मेदार बताते हुए कहा, ‘अब तक जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे सभी एसबीआई के कर्मचारी हैं. उन्हें एसबीआई ने ही तैनात किया था, ट्रस्ट ने नहीं. भले ही कुछ नियुक्तियां सिफारिश के आधार पर की गई हों, लेकिन संबंधित लोगों की पृष्टभूमि और पात्रता की जांच करना एसबीआई की जिम्मेदारी थी.’

उन्होंने आगे कहा कि ट्रस्ट को उम्मीद थी कि बैंक वित्तीय अनुशासन बनाए रखेगा और चढ़ावे के रोज़ाना के हिसाब-किताब की देखरेख के लिए खास तौर पर कर्मचारी तैनात करेगा.

गोविंद देव गिरि के अनुसार, ‘हो सकता है कि न्यासियों के पास वित्तीय मामलों की जानकारी न हो, लेकिन बैंक अधिकारियों के पास तो होती है. वे उपदेशक नहीं हैं, वे बैंक अधिकारी हैं. इसलिए उन्हें सतर्क रहना चाहिए था.’

उन्होंने अपने इस्तीफे की खबरों को दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक बताते हुए कहा, ‘मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं, मैं भागने वालों में से नहीं हूं. जब लड़ने का समय होता है, तब मैदान नहीं छोड़ा जाता. मेरा प्रायश्चित इस्तीफा देना नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को दोबारा न होने देना है.’

गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि गड़बड़ी दान पेटियों में जमा नकदी में हुई है, ट्रस्ट के बैंक खातों में जमा पैसे सुरक्षित हैं. दान पेटियों की गिनती और हिसाब-किताब स्थानीय ट्रस्टी देखते हैं, जबकि एसबीआई को इस प्रक्रिया को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी.

उन्होंने कहा कि वह विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मामले की निगरानी से संतुष्ट हैं.

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों गिरि ने एक बयान जारी कर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर कहा था कि मंदिर की हुंडी में जमा होने वाले चढ़ावे की गिनती से उनका कभी कोई संबंध नहीं रहा. उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर सफ़ाई देते हुए यह भी जोड़ा कि ट्रस्ट के सभी ख़र्च सीधे बैंक के माध्यम से किए जाते हैं और वे बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं.

अब गिरि ने जोड़ा, ‘मुझे नहीं लगता कि मेरी कोई गलती है. लेकिन चूंकि मेरा नाम कोषाध्यक्ष के पद से जुड़ा है, इसलिए मुझे इस बात का गहरा अफ़सोस है कि ऐसा हुआ.’

उन्होंने इस घटना को ‘भगवान राम के खिलाफ अपराध’ बताया और कहा कि इससे ट्रस्ट को गहरा दुख हुआ है. उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की. साथ ही भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए ट्रस्ट द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी.

इन उपायों में नकदी संभालने वाले कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली वर्दी अनिवार्य करना, सीसीटीवी के दायरे में सभी स्थान को लाना, नोट के बंडल छिपाने की आशंका रोकने के लिए मेज की बजाय फर्श पर बिछी चटाई पर नकदी की गिनती करना, नकदी की गिनती के दौरान ट्रस्ट के दो प्रतिनिधियों और एसबीआई के दो अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा गिनती कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले सभी कर्मचारियों की तलाशी लेना शामिल है.

उन्होंने चढ़ावे में मिले सोने के गायब होने और 1400 करोड़ रुपये के नुकसान के दावों को पूरी तरह गलत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने 2,926 कीमती वस्तुओं का रिकॉर्ड मीडिया के सामने रखा है और दानदाताओं को जांच के लिए आमंत्रित किया है.

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इस मामले में एसआईटी की जांच चल रही है, तब तक कोई श्वेत पत्र जारी नहीं किया जाएगा.

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि यह उनका स्वैच्छिक फैसला था. ट्रस्ट के नियमों के अनुसार इस्तीफा देने के बाद उसे स्वीकार माना जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय की लापरवाही इस स्थिति की एक वजह रही.

उन्होंने उन चर्चाओं को भी खारिज किया कि चंपत राय को बलि का बकरा बनाया गया. उन्होंने कहा कि चंपत राय की लापरवाही की वजह से यह स्थिति बनी और इस्तीफा देने से पहले उन्हें इसका एहसास हो गया था.