अमेरिकी आरोपपत्र, कनाडा के अधिकारी की टिप्पणी निज्जर हत्या के लिए बिश्नोई गैंग की ओर इशारा करती हैं: भारत

अमेरिका के आरोप पत्र में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ज़िम्मेदार बताया गया है. कनाडा की एक अधिकारी ने भी कहा है कि इसमें भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है. इससे पहले कनाडा सरकार ने आरोप लगाया था कि इसमें भारतीय सरकारी एजेंटों की भूमिका थी.

हरदीप सिंह निज्जर. (फोटो साभार: ट्विटर/@BCSikhs)

नई दिल्ली: भारत सरकार ने मंगलवार (14 जुलाई) को पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले सप्ताह अमेरिका में दायर आरोप पत्र और उसके बाद रॉयल कनाडा माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की एक वरिष्ठ अधिकारी की टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हुई हत्या के लिए लॉरेंस बिश्नोई गिरोह जिम्मेदार था, न कि भारत सरकार के एजेंट.

यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है, जब कनाडा सरकार पहले यह आरोप लगा चुकी है कि जून 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय सरकारी एजेंटों की भूमिका थी. इन आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था.

वहीं, ‘पन्नू हत्या की साजिश’ में वाशिंगटन के आरोप पत्र में यह दावा किया गया था कि एक भारतीय खुफिया अधिकारी ने उस साजिश को अंजाम देते समय निज्जर के शव का वीडियो फैलाया था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (14 जुलाई) को साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, ‘हमने आरसीएमपी की डिप्टी कमिश्नर की टिप्पणियों पर ध्यान दिया है. ये टिप्पणियां हाल ही में सार्वजनिक किए गए अमेरिकी आरोप पत्र के अनुरूप हैं, जिसमें जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई संगठित अपराध समूह के सदस्यों पर डाली गई है.’

जायसवाल का संकेत आरसीएमपी की डिप्टी कमिश्नर लिसा मोरलैंड की उस टिप्पणी की ओर था, जो अमेरिका द्वारा लॉरेंस बिश्नोई और उसके गिरोह से जुड़े अभियोग सार्वजनिक किए जाने के बाद सामने आई थी.

मोरलैंड ने कहा था कि अमेरिका द्वारा ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ (Operation Hard Ball) नाम से चलाए गए भारत-आधारित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ समन्वित जांच के दौरान भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है.

हालांकि, जब एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या निज्जर की हत्या में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता थी, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

उन्होंने कहा कि कनाडा में इस मामले में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है. इससे संकेत मिलता है कि ऑपरेशन हार्ड बॉल और 2023 की हत्या की ओटावा की जांच अलग-अलग रास्ते पर चल रही हैं.

अमेरिकी आरोप पत्र सार्वजनिक होने के तुरंत बाद भारत सरकार के एक अधिकारी ने द वायर से कहा था कि नई दिल्ली का रुख यही है कि ‘निज्जर की हत्या आपराधिक गिरोहों के बीच की कार्रवाई का परिणाम थी.’

मंगलवार को रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा, ‘भारत लगातार यह कहता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद, ड्रग तस्करी, मानव तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी और इनसे जुड़े आपराधिक नेटवर्क हमारे समाज के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं.’

उन्होंने कहा कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग मजबूत, प्रभावी और लगातार बढ़ रहा है.

हालांकि, भारत ने जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली पिछली कनाडाई सरकार के उन आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया था कि उसके पास भारतीय अधिकारियों और निज्जर की हत्या के बीच संबंध होने के सबूत हैं. लेकिन उसने वाशिंगटन के उस दावे पर नरम रुख अपनाया कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अधिकारी विकास यादव ने न्यूयॉर्क में खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची थी – जिसे अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने नाकाम कर दिया था.

उस मामले में अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि यादव ने निज्जर की हत्या के तुरंत बाद उसकी गिरी हुई लाश का एक वीडियो भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को भेजा था.

आरोप है कि गुप्ता ने बाद में वह वीडियो एक अमेरिकी गोपनीय मुखबिर और एक अंडरकवर एजेंट को भेजा, ताकि कथित ‘पन्नू हत्या साजिश’ को आगे बढ़ाया जा सके.

अमेरिका के अनुसार, निखिल गुप्ता ने अंडरकवर एजेंट से कहा था कि पन्नू के अलावा निज्जर भी निशाने पर था.

गुप्ता को बाद में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पित कर अमेरिका लाया गया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उसे अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने वहां जाल बिछाकर बुलाया था. उस पर मुकदमा चल चुका है और अब न्यूयॉर्क की अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने का इंतजार है.

पिछले साल मोदी सरकार ने अप्रत्यक्ष रूप से पन्नू साजिश में एक भारतीय अधिकारी की संलिप्तता को स्वीकार किया था. गृह मंत्रालय ने कहा था कि एक उच्च-स्तरीय समिति ने ‘पुराने आपराधिक संबंधों और पृष्ठभूमि’ वाले ‘एक व्यक्ति’ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी, हालांकि उसने यह नहीं बताया कि वह व्यक्ति कौन है.

प्रेस वार्ता के दौरान रणधीर जायसवाल से यह भी पूछा गया कि अमेरिका द्वारा लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग किए जाने की संभावना पर भारत का क्या रुख होगा.

उन्होंने कहा, ‘किसी भी प्रत्यर्पण मामले की तरह इस मामले पर भी संबंधित कानूनी दायित्वों और लागू न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.’

गौरतलब है कि निज्जर हत्या मामले में ट्रूडो सरकार के आरोपों के अलावा, 2024 में आरसीएमपी ने यह भी दावा किया था कि उसके पास ऐसे साक्ष्य हैं, जो कनाडा में हुई हत्याओं, जबरन वसूली और धमकी देने जैसी घटनाओं में भारतीय सरकारी एजेंटों की कथित भूमिका की ओर इशारा करते हैं.

आरसीएमपी ने यह भी आरोप लगाया था कि इन गतिविधियों में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह जैसे संगठित आपराधिक समूहों का इस्तेमाल किया गया.