छात्र आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन की योजना बना रहे असम के तीन मुस्लिम युवक गिरफ्तार

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन के समर्थन में असम में प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बना रहे तीन मुस्लिम युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार युवकों में से एक के पिता का कहना है, 'मेरे बेटे ने अभी प्रदर्शन किया भी नहीं था, उसने केवल आयोजित करने की कोशिश की थी.'

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बाएं से: मंजूर रहमान, अब्दुल कासिम और अशरफुल इस्लाम. (फोटो: अरेंजमेंट)

नई दिल्ली: देशभर में चल रहे युवा आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश करने के आरोप में असम के लखीमपुर जिले के लालुक क्षेत्र के तीन युवकों को 23 जुलाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. 

गिरफ्तार किए गए युवकों की पहचान इस्लामपुर गांव के निवासी मंजूर रहमान (23), अशरफुल इस्लाम (21) और अब्दुल कासिम (23) के रूप में हुई है. यह गांव लालुक पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है. परिजनों का कहना है कि तीनों ने देशव्यापी युवा आंदोलन के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने के लिए एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था. इसी आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया है.

मंजूर रहमान एम.कॉम. के छात्र हैं. बताया गया कि 22 जुलाई की दोपहर वह अपने परिवार के खेत में काम कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें थाने बुलाया. उनके पिता मोजिबुर रहमान ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाया है.

उन्होंने द वायर से कहा, ‘मेरे बेटे ने प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश करके कोई असंवैधानिक काम नहीं किया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘देशभर में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा. मेरे बेटे ने तो अभी प्रदर्शन भी नहीं किया था. उसने सिर्फ उसे आयोजित करने की कोशिश की थी.’

गिरफ्तार किए गए दूसरे युवक अशरफुल इस्लाम भी एम.कॉम. की पढ़ाई कर रहे हैं. उनके पिता अयूब अली ने बताया कि 23 जुलाई की आधी रात के करीब पुलिस उनके घर के पास से अशरफुल को अपने साथ ले गई.

अयूब अली ने द वायर से कहा, ‘मेरा बेटा बहुत होनहार और आज्ञाकारी है. जिस आपराधिक गतिविधि का आरोप उस पर लगाया गया है, उसमें उसका शामिल होना संभव ही नहीं है.’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘दूसरे समुदायों के लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है, लेकिन हम मुसलमान हैं, इसलिए हमें निशाना बनाया जा रहा है.’

अब्दुल कासिम ने फार्मास्युटिकल साइंस में स्नातक किया है. लाइसेंस मिलने का इंतजार करते हुए वह एक निजी स्कूल में पढ़ाते हैं. 22 जुलाई को पुलिस के बुलावे पर वह अपने एक मित्र के साथ लालुक थाने पहुंचे थे. उनके परिवार वालों ने द वायर को बताया कि पुलिस ने उन्हें बताया था कि पूछताछ के बाद अगली सुबह उन्हें छोड़ दिया जाएगा.

कासिम के पिता नुरुल इस्लाम ने द वायर से कहा, ‘जब हम अगली सुबह फिर थाने पहुंचे तो पुलिस ने बताया कि उन्हें जेल भेजा जाएगा.’

तीनों परिवारों का कहना है कि गिरफ्तारी से पहले युवकों ने लालुक पुलिस थाने से प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी.

द वायर द्वारा देखे गए उनके अभिभावकों को भेजे गए नोटिस की प्रति के अनुसार, तीनों युवकों को 23 जुलाई को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2)(बी), 353(1) और 152 के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया. इनमें धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है. इसमें अलगाववाद, सशस्त्र विद्रोह या देशविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने जैसे आरोप शामिल हैं.

परिजनों ने बताया कि पुलिस ने आगे पूछताछ के लिए आरोपियों को पुलिस रिमांड में लेने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने यह मांग खारिज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

अयूब अली ने कहा, ‘पुलिस उन्हें रिमांड पर लेना चाहती थी, लेकिन जज ने इसकी अनुमति नहीं दी.’

लालुक थाने के प्रभारी सिमंता पाठक ने मामले की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, ‘अपने वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति मिलने के बाद मैं आपको और जानकारी दे सकूंगा.’

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