सीजेपी प्रदर्शन के बाद निशाने पर इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और गडकरी, अब बनी ई20 जनता पार्टी

ई20 जनता पार्टी के नाम से उभर रहे नए ऑनलाइन आंदोलन इथेनॉल-मिश्रित ईंधन और देश में सड़कों की ख़राब हालत को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को निशाने पर लेते हुए गडकरी को पद से हटाने और देश की ईंधन नीति में पारदर्शिता की मांग की है.

ई20 जनता पार्टी. (फोटो: X/@E20Party)

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के कुछ घंटों बाद ही ‘ई20 जनता पार्टी‘ (ईजेपी) नाम से एक नया ऑनलाइन आंदोलन आकार लेने लगा.

इथेनॉल मिश्रित ईंधन और देश में सड़कों की खराब हालत को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को निशाने पर लेते हुए इस डिजिटल ग्रुप ने गडकरी को पद से हटाने और देश की ईंधन नीति में पारदर्शिता की मांग की है.

एक्स पर किए गए एक पोस्ट में संगठन ने कहा, ‘ई20 जनता पार्टी कोई राजनीतिक दल नहीं है. हम नागरिकों का एक स्वतंत्र आंदोलन हैं जो आम लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाने पर केंद्रित है. हमारा एकमात्र एजेंडा पारदर्शिता सुनिश्चित करना, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और भारत की ई-20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति के वास्तविक असर पर खुली सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देना है.’

हालांकि इस सोशल मीडिया अभियान की स्थापना किसने की और इसके पीछे कौन लोग हैं, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. इसके बावजूद इंस्टाग्राम पर इसके 2.25 लाख से अधिक और एक्स पर 30 हजार से अधिक फॉलोअर हो चुके हैं.

ईजेपी की एक पोस्ट में कहा गया, ‘हम किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन या पक्ष नहीं लेते हैं. हमारा समर्थन लोगों के लिए है, किसी राजनीतिक विचारधारा के लिए नहीं. कृपया इस बात की अफवाहों से गुमराह न हों कि इस आंदोलन के पीछे कौन है या इसे कहां से चलाया जा रहा है. ऐसी अटकलें असली मुद्दे से ध्यान भटका देती हैं. हमारी मांग सरल है: जवाबदेही, पारदर्शिता और उपभोक्ताओं की बात सुने जाने का अधिकार.’

सोशल मीडिया पर कई व्यंग्यात्मक पोस्ट्स में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनों को ‘सीज़न-1’ बताया गया और कहा गया कि इसके बाद नितिन गडकरी के खिलाफ आंदोलन शुरू होगा.

ई-20 नीति के ख़िलाफ़ बढ़ता विरोध

केंद्र सरकार की ई-20 नीति को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है. इस नीति के विरोध में सोशल मीडिया अभियान चलाए गए हैं, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन दायर किए गए हैं और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर ईंधन नीति में पारदर्शिता और इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल की उपलब्धता जारी रखने की मांग की गई है.

पिछले महीने नीति लागू होने के बाद से इंजन, फ्यूल टैंक, कार्ब्यूरेटर और फ्यूल लाइन में असामान्य घिसावट और खराबी की शिकायतें सामने आई हैं. आलोचकों का कहना है कि सरकार ने इस नीति को तय समय से पांच वर्ष पहले लागू कर दिया, जबकि वाहन निर्माता अभी तक ई20 ईंधन के अनुरूप इंजन विकसित नहीं कर पाए थे. इसके कारण ऐसे वाहन मालिकों को भी ई-20 पेट्रोल इस्तेमाल करना पड़ा, जिनके वाहन ई-10 या उससे कम इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिजाइन किए गए थे.

हालांकि इस व्यापक विरोध के बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि उसे वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संगठनों या उपभोक्ता संगठनों से ऐसी कोई खास शिकायतें नहीं मिली हैं, जिनसे यह साबित हो कि ई-20 ईंधन के कारण वाहनों का माइलेज काफी घटा है, पिक-अप कम हुई है या पेट्रोल टैंकों में जंग लगने जैसी समस्याएं उत्पन्न हुई हैं.