नई दिल्ली: नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चला कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन आखिरकार केंद्र सरकार के आश्वासन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद वापस ले लिया गया. लेकिन आंदोलन खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद उसमें शामिल रही लड़कियों (कुछ मामलों में लड़कों को भी) निशाना बनाए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है.
प्रदर्शन के दौरान बोले गए अपशब्दों को आधार बनाकर उनकी तस्वीरें और वीडियो को सोशल मीडिया पर डाला जा रहा है, नाम-पता खोजने की अपील की जा रही है, ताकि उन्हें ‘सबक सिखाया’ जा सके. कुछ मामलों में कानूनी नोटिस भेजे जा रहे हैं. और अब एक प्रदर्शनकारी लड़की के खिलाफ नोएडा में एफआईआर भी दर्ज कर लिया गया है. जबकि प्रदर्शन खत्म करने से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और सरकार के बीच हुई बातचीत में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कानून कार्रवाई न करने पर सहमति बनी थी.
महिला प्रदर्शनकारियों के ऑनलाइन उत्पीड़न को देखते हुए जब द वायर हिंदी ने सीजेपी की प्रवक्ता रत्ना सिंह से बातचीत की, तो उन्होंने कहा, ‘हमें आश्वासन दिया गया था कि किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं होगा. मैं लगातार संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हूं. नोएडा की इस घटना से जुड़ी एफआईआर की प्रतियां भी मैंने उन्हें भेजी हैं.’
रत्ना ने बताया कि खुद उन्हें भी ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.
‘इसे ढूंढो’: लड़कियों के खिलाफ मुहिम
प्रदर्शन के दौरान गुस्साए छात्रों ने कई तरह के नारे लगाए और बयान दिए, जिनमें से कुछ में अपशब्द भी शामिल थे. अब ऐसे वीडियोज़ के माध्यम से प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है.
दिलचस्प है कि इस तरह की मांग करने वाले लगभग हैंडल्स राजनीतिक हैं. ये हैंडल्स सत्ताधारी भाजपा के समर्थक हैं और हिंदुत्ववादी विचारधार के प्रचारक हैं. इसी तरह के एक एक्स हैंडल द जयपुर डायलॉग्स ने एक लड़की का फोटो पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘इसे ढूंढो, इसने प्रधानमंत्री मोदी का अपमान किया है.’
Find Her
She abused PM Modi pic.twitter.com/nn3AOXVoGg
— The Jaipur Dialogues (@JaipurDialogues) July 27, 2026
एक अन्य पोस्ट में दिल्ली पुलिस को बिना टैग किए इसी हैंडल ने लिखा, ‘दिल्ली पुलिस, कृपया इसे ढूंढिए और सबक सिखाने के लिए जेल भेजिए.’ इसी पोस्ट के कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने वीडियो में दिखाई दे रही युवती का कथित सोशल मीडिया हैंडल बताकर उसका स्क्रीनशॉट भी साझा किया.
इस मुहिम में शामिल भाजपा समर्थक एक्स हैंडल ‘मिस्टर सिन्हा’ ने दो युवतियों की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से उनकी पहचान करने की अपील की. पोस्ट में कहा गया कि पता लगाया जाए कि वे कहां रहती हैं, किस सोसाइटी में रहती हैं और कहां पढ़ती या काम करती हैं, ताकि उनके पड़ोसी, सहकर्मी और सहपाठी उनकी कथित ‘मानसिकता’ के बारे में जान सकें.
अक्सर सरकार के समर्थक में दलील देने वाले सीएनएन न्यूज़18 समूह के टीवी एंकर राहुल शिवशंकर ने दिल्ली पुलिस के एक नोटिस, जिसमें संबंधित (जिन पर गाली देने के आरोप हैं) अकाउंट का पूरा नाम, पता, संपर्क विवरण, ईमेल आईडी आदि का ब्योरा मांगा गया था, उसका समर्थन करते हुए लिखा, ‘गंदी भाषा को अभिव्यक्ति की आजादी नहीं माना जा सकता.’
इस मुहिम में कई और दक्षिणपंथी हैंडल भी शामिल हैं, कोई नाम-पता खोजने पर इनाम की घोषणा कर रहा है, तो कोई खुलेआम सबक सिखाने की बात कर रहा है.

This guy @FabulasGuy is literally offering cash prize to dox lx the address and identity of a girl so that people can hound her and harm her.
This is a criminal act and must not go unpunished @NCWIndia @DelhiPolice @CJP_for_India this needs to be legally pursued, she is a… pic.twitter.com/XmN8n6Z8M5
— Roshan Rai (@RoshanKrRaii) July 26, 2026
अब इस मुहिम का असर भी नज़र आने लगा है. जिस लड़की की तस्वीर और वीडियो को सबसे ज्यादा वायरल किया जा रहा था, उसके खिलाफ हुई शिकायत के आधार पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352 (शांति भंग करने के लिए उकसाना), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) और 356(1) (मानहानि) के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की गई है. इसके बाद मामले को आगे की जांच के लिए नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने स्थानांतरित कर दिया गया है.
आरोप है कि 25 वर्षीय रुचिका सिंह ने 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इस संबंध में बुधवार को शिकायत दर्ज कराई गई. शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी टिप्पणी से प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का अपमान हुआ है और इससे सामाजिक वैमनस्य फैलने तथा सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका है.
शिकायतकर्ता स्मृति सिंह चंदेल खुद को सुप्रीम कोर्ट का अधिवक्ता बताती हैं, और उनके सोशल मीडिया हैंडल से पता चलता है कि वह हिंदुत्व समूह ‘अखंड भारत हिंदू सेना’ की राष्ट्रीय विधि प्रमुख हैं.
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इस एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि रुचिका सिंह की टिप्पणी गलत हो सकती है, लेकिन इसके लिए इस तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
🚨Noida Police books individual named Ruchika Singh under 3 sections for viral video during protests. pic.twitter.com/uV0TLQjQ1c
— Shiv Aroor (@ShivAroor) July 30, 2026
राहुल शिवशंकर तर्क है कि ‘गाली-गलौज को सामान्य नहीं बनाया जा सकता. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण अधिकार नहीं है, कानून के तहत उस पर सार्वजनिक व्यवस्था सहित अन्य आधारों पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. यदि ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में धार्मिक समुदायों, जातियों या अन्य समूहों के खिलाफ भी इसी तरह की अभद्र भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है.’
उनके अनुसार, कानून का एकसमान पालन सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है.
हालांकि वास्तविकता यह है कि देशभर में भाजपा के नेता संसद से लेकर सड़क और न्यूज चैनल की बहसों तक में खुलेआम गाली देते रहे हैं और ऐसे मामलों में उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है. भाजपा के ही नेता बलात्कारियों और हत्यारों को फूल माला पहनाकर स्वागत करते रहे हैं. खुद प्रह्लाद जोशी, जिन्हें धर्मेंद्र प्रधान की जगह शिक्षा मंत्री बनाया है, उन्होंने साल 2022 में बिलक़ीस बानो के बलात्कार के दोषियों को समय-पूर्व मिली रिहाई का समर्थन करते हुए कहा था कि ‘जो भी हुआ, क़ानून के अनुसार हुआ है.’
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में भाजपा और उसके समर्थकों को प्रदर्शनकारियों की भाषा से समस्या या मामला कुछ और है?
सीजेपी की प्रवक्ता रत्ना कहती हैं, ‘मामला केवल भाषा या इस प्रोटेस्ट का नहीं है. हमने हमेशा से देखा है कि जब भी कुछ ऐसा होता है, जहां लड़कियां आगे बढ़कर हिस्सा लेती हैं या खुद को एक्सप्रेस करती हैं, चाहे वह सोशल मीडिया हो या प्रदर्शन स्थल, उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है. मुझे अभी तक सोशल मीडिया पर एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दिखा है कि किसी लड़के ने गाली दी हो और फिर उसे इस तरह उछाला जा रहा हो.’
रुचिका को कानून सहायता पहुंचा रहा है सीजेपी
रुचिका सिंह पर हुए एफआईआर को लेकर सवाल पूछे जाने पर रत्ना सिंह कहा, ‘हमने कानूनी सहायता की व्यवस्था पहले ही कर दी है. रुचिका का संपर्क नंबर हमें कहीं से नहीं मिल पा रहा है, लेकिन नोएडा में सक्रिय हमारे सभी वकीलों को एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध करा दी गई हैं. वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें हर संभव कानूनी सहायता मिले.’
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं संबंधित अधिकारियों को भी एफआईआर की प्रतियां भेज चुकी हूं. उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दर्ज एफआईआर वापस लेने और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की दिशा में कार्रवाई की जाएगी. मैंने विशेष रूप से रुचिका के मामले का जिक्र किया है और बताया है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत अधिक परेशान किया जा रहा है. अधिकारियों ने कहा है कि वे यह बात संबंधित स्तर तक पहुंचा रहे हैं और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए… फिलहाल हमें केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं. जब तक ज़मीन पर कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक उन पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है. हालांकि हमें यह भी बताया गया है कि ऐसी प्रक्रियाओं में समय लगता है.’
आगे भी जारी रह सकती है ‘बदले की कार्रवाई’
फिलहाल भाजपा से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स रुचिका सिंह के खिलाफ कानून कार्रवाई का जश्न मना रहे हैं और ऐसे अन्य प्रदर्शनकारियों के नंबर आने की बात कर रहे हैं.
एक्स पर खुद को ‘भाजपा उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया का सह-संयोजक’ और ‘अंध भक्त’ बताने वाले शशि कुमार ने, जिनके प्रोफाइल कवर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी तस्वीर लगी है, एक अन्य वीडियो साझा करते हुए लिखा, ‘रुचिका सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है. अब इन तीन लड़कियों को भी पहचानिए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराइए. किसी भी माफी को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.’
यानी मामला रुचिका सिंह तक रुका नहीं है. प्रदर्शन का एक अन्य वीडियो साझा करते हुए द जयपुर डायलॉग्स ने लिखा, ‘इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी गाली देने वाले किसी भी व्यक्ति की जानकारी हमें दें. हम कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे.’

बढ़ते ऑनलाइन उत्पीड़न के बाद कुछ लड़कियों ने माफी मांगना भी शुरु कर दिया है, जिसे दक्षिणपंथी धारा अपनी जीत तरह पेश कर रहा है. पुलिस सोशल मीडिया से उन कंटेंट को भी हटवा रही है, जो उन्हें ‘आपत्तिजनक’ लग रही है.
She is a so-called Instagram influencer Shardha Singh with over 375K followers on Instagram.
She was making fun of RPF officers during the CJP protest, and now she has started playing the victim card. pic.twitter.com/utx7hOLN0O
— TEJASH (@Tejashyy) July 29, 2026
प्रदर्शन में शामिल हुईं महिलाओं के खिलाफ भाजपा-संघ की नफरत
हाल ही में तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस ने हिंदुत्व विचारक और भाजपा के पूर्व बौद्धिक प्रकोष्ठ प्रमुख टीजी मोहनदास के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल ‘पथरिका’ पर डाले एक वीडियो में कहा था कि अगर उनके हाथ में होता तो वे जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों को गोली मरवा देते. एक अन्य वीडियो में उन्होंने प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वामपंथी व धर्मनिरपेक्ष महिलाएं बलात्कार का ‘आनंद’ लेती हैं और ऐसी घटना पर शिकायत तक नहीं करेंगी.
अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने प्रदर्शन में शामिल लड़कियों को लेकर कहा, ‘मैंने अपनी ज़िंदगी में इतना अजीब और इतना बुरा कुछ नहीं देखा है. इन्हें किसने जन्म दिया है, कौन इनका पालन-पोषण कर रहा है? यह गटर की पीढ़ी है. ये लड़कियां अच्छी गृहिणी भी नहीं बन सकतीं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ये लड़कियां आज़ादी के नाम पर नशीले पदार्थों और शराब के सेवन का सोशल मीडिया पर प्रदर्शन करती हैं. वे बिना मेहनत किए काम करने वाली महिलाओं की नकल करती हैं और इसलिए अब वे परिवार और ज़िम्मेदारियां संभालने के लायक भी नहीं रह गई हैं.’
खुद भाजपा की छत्तीसगढ़ इकाई के सोशल मीडिया हैंडल से प्रदर्शनकारियों लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है, उन्हें ‘बाबर के जेन-ज़ी’ लिखा जा रहा है. छत्तीसगढ़ भाजपा अब तक ऐसे तीन वीडियो पोस्ट कर चुकी है.

खुद को भाजपा युवा मोर्चा से जुड़ा बताने वाले सूर्या मिश्रा ने प्रदर्शन में शामिल लड़कियों के ‘संस्कार’ पर सवाल उठाए, उन्होंने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, ‘इन्हें इतना वायरल कर दे ताकि इनके मां बाप से लेकर रिश्तेदारों तक, कॉलेज से लेकर कार्यस्थल तक सभी को पता चल सके कि ये बिटिया कितनी संस्कारी है.’
दिल्ली से भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी का भी एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कुछ लोगों के साथ एक प्रदर्शनकारी लड़की को थाने में बुलाने पर चर्चा कर रहे हैं. दरअसल, 20 मार्च को जब जंतर-मंतर पर लाठीचार्ज हुआ था और तब एक लड़की ने वीडियो बनाकर आरोप लगाया था कि मंदिर के पुजारियों ने उसे मंदिर में नहीं जाने दिया.
विधायक नेगी अपने लोगों के साथ इसी लड़की की लोकेशन को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं. वीडियो में विधायक को यह कहते सुना जा सकता है कि उसे थाने बुलवाया जाए.
जंतरमंतर पर लाठीचार्ज के दिन एक लड़की ने वीडियो बनाकर कहा था कि मंदिर पुजारियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया.
अब BJP के एक विधायक के साथ बैठकर कुछ लोग उसकी लोकेशन डिसकस कर रहें है.
उसे थाने बुलवाने की बात हो रही है
उसके घर जाने की बातें हो रही है.#CJP कहाँ है अब ? @DelhiPolice… pic.twitter.com/J9iHLpoRIj— अश्विनी सोनी (@Ramraajya) July 28, 2026
भाजपा और उसके समर्थक विरोध प्रदर्शन को गाली और अपमान के इर्द-गिर्द सीमित करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन यह याद रखना आवश्यक है कि सीजेपी का विरोध प्रदर्शन नीट पेपर लीक और 20 से अधिक छात्रों की आत्महत्या के बाद शुरू हुआ था. प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया ने भारी बर्बरता की थी. न केवल लाठी बल्कि पैलेट गन और गन तक चलाने के साक्ष्य सामने आ रहे हैं, जिसे शासन-प्रशासन झुठलाने में लगा है.
प्रदर्शन के दौरान और बाद दक्षिणपंथी गुंडों ने सड़कों पर प्रदर्शनकारियों पीटा और अपमानित किया. लेकिन अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री को छात्रों की मांगों को मानते हुए इस्तीफा देना पड़ा. तय था कि इसके आगे परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा पर चर्चा होगी लेकिन अब जो हो रहा है वह बदले की कार्रवाई जैसा प्रतीत हो रहा है.
सीजेपी प्रवक्ता रत्ना आगे बताती हैं,
‘महिलाओं के खिलाफ एक पूरा तंत्र सक्रिय कर दिया गया है, जो न केवल ऑनलाइन बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी जाकर उन्हें परेशान कर रहा है. मुझे नहीं लगता कि दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े लोग या गुंडे ऊपर से निर्देश मिले बिना इस तरह सक्रिय हो सकते हैं. इससे यह भी पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता देश के लोगों की चिंता करना नहीं, बल्कि एक खास नैरेटिव गढ़ना है. सरकार का पूरा ध्यान महिला प्रदर्शनकारियों और अन्य आंदोलनकारियों को परेशान करने पर है.’
प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली लड़कियों को निशाना बनाने का सिलसिला कुछ सोशल मीडिया हैंडलों से शुरू होकर अब सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधि और खुद पुलिस-प्रशासन के दायरे तक पहुंच गया है.
जहां एक तरफ दिल्ली पुलिस ने एक्स से यूजर्स की निजी जानकारी मांगी है, एफआईआर दर्ज कर रही है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं की सुरक्षा और निजता को लेकर उठाई गई चिंताओं पर कार्रवाई सीमित नजर आ रही है.
यह घटनाक्रम भारत में विरोध प्रदर्शनों के बाद महिला प्रदर्शनकारियों की डिजिटल सुरक्षा और निजता को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.
ध्यान रहे प्रदर्शन के दौरान भी महिलाओं को ऑनलाइन निशाना बनाया जा रहा था. 24 जुलाई को एक्स पर स्वयं को ‘नेशनलिस्ट’, ‘गर्वित हिंदू’, ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक’ और ‘मोदी भक्त’ बताने वाले तथा लगभग 54.4 हजार फॉलोवर्स वाले विक्रम प्रताप सिंह, जिन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी भी फॉलो करती हैं, ने प्रदर्शन में शामिल युवतियों को लेकर एक तस्वीर साझा की, जो बाद में ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल में एआई-जनित पाई गई.
इसके साथ उन्होंने लिखा, ‘यह प्रदर्शन है या सॉफ्ट पोर्न? फैसला आप खुद कीजिए. क्या आप अपने बच्चों को यहां भेजना चाहेंगे?’

इस पोस्ट में प्रदर्शनकारी महिलाओं को अपमानित करने और उनके चरित्र पर सवाल उठाने की कोशिश की गई. साथ ही, इसे ऐसे प्रचार के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और युवतियों को विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने से हतोत्साहित करना था.
Protest or soft Porn ??? Decide yourself . Do you want to send your kids here ? pic.twitter.com/sbGqhwXlAf
— Vikram Pratap Singh (@VIKRAMPRATAPSIN) July 24, 2026
यहां यह इरादा साफ़ दिखता है कि आंदोलन में आई लड़कियों को बदनाम करने के लिए एआई से बनी तस्वीरों का सहारा लिया जा रहा है.
ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न होने के संबंध में रत्ना कहती हैं, ‘मेरा मानना है कि पुलिस के पास ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी क्षमता है, जो महिलाओं और प्रदर्शनकारियों को परेशान कर रहे हैं. यदि पुलिस चाहे तो ऐसे लोगों को कुछ ही मिनटों में पकड़ सकती है.’
क्या गाली समस्या है?
समस्या असल में गाली से नहीं है, उस छवि के खंडित होने से है, जो बारह सालों में बेहिसाब पैसा खर्च करके तैयार की गई है.
विश्लेषकों का मानना है कि नरेंद्र मोदी अपनी उस छवि को बचाने की कोशिश में लगे हैं, जो पिछले 12 सालों में सार्वजनिक धन खर्च कर तैयार किया गया है. संसद में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2014-15 से 2024-25 के बीच भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार का विज्ञापन पर खर्च 5987.46 करोड़ रुपये था, यानी हर दिन 1.5 करोड़ रुपये. इसमें राज्यों की भाजपा सरकारों, सरकारी उपक्रमों, अन्य संस्थाओं और बड़े उद्योगपतियों द्वारा दिए गए शानदार विज्ञापनों पर ख़र्ची गई राशि शामिल नहीं है.
ऐसे में जब जेन ज़ी प्रतिरोध के रूप में अपशब्दों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सरकार को अपनी छवि की चिंता सता रही है.
इस विषय पर मंथन करते हुए द वायर की संपादक सीमा चिश्ती अपने एक लेख में लिखती हैं, ‘अपने धत्तकर्मों को छिपाने या काली करतूतों के बचाव में इस्तेमाल की जाने वाली ‘शुद्ध’ भाषा, युवा पीढ़ी के किसी सही उद्देश्य के लिए इस्तेमाल की गई तीखी या अपशब्दों वाली भाषा से कहीं ज़्यादा बुरी है. अगर संसद और मीडिया ने अपना काम ठीक से किया होता, तब शायद उनकी भाषा भी संसदीय और शालीन बनी रहती.’
अपने लेख के निष्कर्ष में वह लिखती हैं, ‘जब आक्रोशित युवा बोलता है और सत्ता उसे सुनने से इनकार कर देती है, तब वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होते हैं और उनकी भाषा सड़क की भाषा बन जाती है. और जैसा बीते हफ्ते ने दिखाया- भगत सिंह के शब्दों को अलग तरह से कहें तो- यही अकेली भाषा है जिसे बहरे सुन सकते हैं. आशा करते हैं कि अब मोदी इन आवाज़ों पर कान दे रहे होंगे.’
