नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, गुजरात की लगभग 23 प्रतिशत सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं, जबकि राज्य की करीब 10 प्रतिशत सहकारी समितियां निष्क्रिय हो चुकी हैं.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ये जानकारी केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने राज्यसभा में दी है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में 88,119 पंजीकृत सहकारी समितियां हैं. इनमें से 6,959 समितियां निष्क्रिय हो चुकी हैं, जबकि 1,341 समितियां बंद होने की प्रक्रिया (liquidation) हैं. वर्तमान में 18,404 सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं.
महाराष्ट्र की 2.27 लाख समितियों के बाद गुजरात में देश का दूसरा सबसे बड़ा सहकारी इकोसिस्टम है.
आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 56,977 सहकारी समितियां लाभ में काम कर रही हैं, जबकि 4,442 समितियों की वित्तीय स्थिति से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है.
हालांकि, चालू समितियों के अनुपात के मामले में गुजरात कई राज्यों से बेहतर स्थिति में है, लेकिन हजारों निष्क्रिय सहकारी समितियों का होना लगातार प्रशासनिक, प्रबंधन और वित्तीय चुनौतियों की ओर इशारा करता है.
राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, देशभर में कुल 8.53 लाख सहकारी समितियां पंजीकृत हैं. इनमें से 6.63 लाख समितियां कार्यरत हैं, जबकि 1.41 लाख समितियां निष्क्रिय हैं और 49,177 समितियां बंद होने की प्रक्रिया में हैं.
कार्यरत सहकारी समितियों में से 3.56 लाख समितियां लाभ में हैं, जबकि 2.50 लाख समितियां घाटे में चल रही हैं. इसके अलावा 56,689 समितियों की वित्तीय स्थिति संबंधी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.
