नई दिल्ली: हॉकी इंडिया द्वारा दशकों पुरानी पारंपरिक नीली जर्सी को बदलकर केसरिया (भगवा) रंग की जर्सी करने का फैसला किया है. बताया गया है कि आगामी 15 अगस्त को पुरुष और महिला दोनों टीमों को इसे पहनना है, और इस अचानक बदलाव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, जो अब गंभीर रूप ले चुका है.
ख़बरों के अनुसार, अब हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने जर्सी बदलने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी मांगने पर मिले जवाब पर असंतोष जताते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण की मांग की है.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, तिर्की ने हॉकी इंडिया के महानिदेशक कमांडर आरके श्रीवास्तव से पूछा था कि जर्सी बदलने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया. इसके जवाब में श्रीवास्तव ने कहा था कि इस तरह के ‘ऑपरेशनल फैसले’ पहले भी कार्यकारी बोर्ड के सामने नहीं लाए जाते थे. अब तिर्की ने श्रीवास्तव को उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर ‘बिंदुवार जवाब’ देने को कहा है.
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और राज्यसभा के पूर्व सांसद दिलीप तिर्की ने अपने पत्र में लिखा है, ‘हॉकी इंडिया भारतीय हॉकी का मालिक नहीं है. हम केवल देश की इस खेल विरासत के संरक्षक और न्यासी हैं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘बिना किसी दस्तावेजी सबूत के सिर्फ़ सामान्य स्पष्टीकरण या दावों वाला जवाव कि कार्यकारी बोर्ड को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम नहीं बनाएंगे.’
तिर्की ने श्रीवास्तव से मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को दिन खत्म होने तक जवाब देने को कहा है.
उन्होंने स्पष्ट किया, ‘मैं यह साफ करना चाहता हूं कि विचाराधीन मुद्दा केवल जर्सी के रंग या डिजाइन का नहीं है. मामला भारतीय हॉकी के सबसे पहचान योग्य प्रतीकों में से एक में बदलाव के लिए अपनाई गई निर्णय प्रक्रिया, इस निर्णय का अधिकार किसके पास था, इस पर किससे परामर्श किया गया, हॉकी इंडिया के प्रशासनिक ढांचे का पालन हुआ या नहीं, और क्या उचित संस्थागत प्रक्रियाओं का पालन किया गया- इन सभी प्रश्नों से जुड़ा है.’
तिर्की ने यह भी लिखा कि कार्यकारी बोर्ड में कई प्रतिष्ठित पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और ओलंपियन शामिल हैं, जिन्होंने भारत का सर्वोच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है.
उन्होंने कहा, ‘इन खिलाड़ियों की उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं की समझ उनके अपने अनुभव पर आधारित है. इसलिए कृपया स्पष्ट करें कि क्या जर्सी बदलने के संभावित प्रभाव – जैसे खिलाड़ियों की तैयारी, आत्मविश्वास, सहजता, मानसिक एकाग्रता और प्रतियोगिता के लिए उनकी तैयारी – का कोई आकलन किया गया था?’
उन्होंने आगे सवाल उठाया, ‘पुरुष राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों को विश्व कप से ठीक पहले मीडिया में जर्सी परिवर्तन से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा. कृपया स्पष्ट करें कि सार्वजनिक घोषणा से पहले इस स्थिति का खिलाड़ियों की मानसिक तैयारी, एकाग्रता और टूर्नामेंट की तैयारी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का कोई मूल्यांकन किया गया था या नहीं.’
तिर्की ने श्रीवास्तव से यह भी पूछा है कि आधिकारिक नीली जर्सी बदलने का निर्णय किस अधिकार, मंजूरी या प्रत्यायोजन (डेलीगेशन) के तहत लिया गया. इसके अलावा मांग की गई है कि वे बदलाव की टाइमलाइन, फ़ैसले में शामिल हर व्यक्ति के नाम, पद और भूमिका का खुलासा करें, साथ ही सभी आंतरिक बातचीत की कॉपी भी दें.
तिर्की ने यह भी पूछा है कि इस फैसले पर किन खिलाड़ियों और अन्य अधिकारियों से सलाह ली गई थी और उनसे प्राप्त सुझावों के दस्तावेजी प्रमाण भी प्रस्तुत किए जाएं. उन्होंने नई जर्सी के डिजाइन, निर्माण और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का विवरण भी मांगा है.
हॉकी इंडिया को भेजे तिर्की के ईमेल में फेडरेशन के चुने हुए सदस्यों और कर्मचारियों के काम के दायरे में फ़र्क भी बताया गया है.
उन्होंने लिखा, ‘हॉकी इंडिया के उपनियमों के अनुसार, महासंघ के निर्वाचित निकाय ही संगठन के प्रशासन, नीतिगत दिशा और निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं. महानिदेशक की भूमिका प्रशासनिक और कार्यकारी है, जिसके तहत वे हॉकी इंडिया के कार्यों का संचालन और स्वीकृत निर्णयों का क्रियान्वयन करते हैं. लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारी का अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि वह निर्वाचित प्रशासनिक निकायों के अधिकार का स्थान ले ले या उसे दरकिनार कर दे.’
इस बीच, हॉकी प्रशंसकों और खेल जगत के कई दिग्गजों ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. कम से कम सात पूर्व भारतीय कप्तानों, ओलंपिक पदक विजेताओं और विश्व कप विजेता टीमों का नेतृत्व कर चुके कप्तानों ने दशकों पुरानी नीली जर्सी को हटाकर भगवा जर्सी अपनाने की आवश्यकता और उसके औचित्य पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं.
