एसआईआर: दिल्ली और महाराष्ट्र में दूसरी बार समयसीमा बढ़ाई गई, 24 अगस्त को आएगी ड्राफ्ट मतदाता सूची

चुनाव आयोग ने पिछले तीन सप्ताह में महाराष्ट्र और दिल्ली में चल रहे एसआईआर के लिए दूसरी बार समयसीमा बढ़ाई है. अब ड्राफ्ट मतदाता सूची 17 अगस्त के बजाय 24 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी. बताया गया है कि इसी दिन दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो 23 सितंबर तक चलेगी.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने मंगलवार (4 अगस्त) को पिछले तीन सप्ताह के भीतर दूसरी बार दिल्ली और महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए समयसीमा लगभग एक सप्ताह बढ़ा दी.

अब दोनों राज्यों में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर जाकर सत्यापन का काम पूरा करने के लिए 8 अगस्त के बजाय 17 अगस्त तक का समय मिलेगा.

बताया गया है कि इसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची अब 17 अगस्त के बजाय 24 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी. इसी दिन दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो 23 सितंबर तक चलेगी.

चुनाव आयोग के अधिकारियों को ड्राफ्ट सूची में नाम शामिल किए जाने या हटाए जाने संबंधी दावों और आपत्तियों का निपटारा करने के लिए 22 अक्टूबर तक का समय दिया गया है. इसके बाद अंतिम मतदाता सूची अब पहले तय 19 अक्टूबर के बजाय 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी.

चुनाव आयोग द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने सोमवार को एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया था, जबकि महाराष्ट्र के सीईओ ने मंगलवार को ऐसा अनुरोध किया.

दोनों राज्यों में घर-घर सत्यापन का काम 30 जून से शुरू हुआ था. इससे पहले इन्हें 15 जुलाई को पहली बार समयसीमा में विस्तार दिया गया था. महाराष्ट्र के मामले में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने पिछले महीने कहा था कि मानसून और आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा के कारण काम प्रभावित होने से अधिकारियों ने अतिरिक्त समय मांगा था.

दिल्ली और महाराष्ट्र के साथ ही एसआईआर शुरू करने वाले तीन अन्य राज्यों में से कर्नाटक को एक बार समयसीमा में बढ़ोतरी मिली है – वह भी 15 जुलाई को – जबकि मेघालय और झारखंड को नहीं मिली है. इन दो राज्यों में बुधवार, 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता आने की उम्मीद है.

इस बीच, एसआईआर के तीसरे राष्ट्रव्यापी चरण के तहत यह प्रक्रिया जिन अन्य राज्यों में चल रही है, उनमें से कई को भी समयसीमा में विस्तार दिया गया है.

पिछले वर्ष बिहार से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया अपनी कम समयसीमा और इस आलोचना को लेकर काफी विवादों में रही है कि इसमें मतदाता होने की पात्रता साबित करने का भार काफी हद तक खुद मतदाता पर डाल दिया गया है.

इस प्रक्रिया के सबसे अभूतपूर्व परिणाम पश्चिम बंगाल में देखने को मिले, जहां लाखों मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘लॉजिकल गड़बड़ियों’ चिह्नित की गईं. आखिरकार अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में करीब 27 लाख लोगों को मतदान से वंचित होना पड़ा, क्योंकि अधिकारियों के पास मतदाता सूची में उनका नाम शामिल करने संबंधी उनकी अपीलों का समय पर निपटारा करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था.