संसद में सरकार ने बताया- 2025-26 में ईडी द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे

सरकार ने राज्यसभा में बताया है कि ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,080 हो गई, जो पिछले चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है.

नई दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का कार्यालय. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार (4 अगस्त) को सरकार ने राज्यसभा में बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामलों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,080 हो गई, जो पिछले चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है.

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि पिछले पांच वर्षों में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत ईडी द्वारा दर्ज मामलों की कुल संख्या 4,622 हो गई है. हालांकि, इसी अवधि में केवल 43 मामलों में दोषसिद्धि हुई है.

यह जानकारी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इस वर्ष 30 जून तक ईडी ने पीएमएलए के तहत विशेष अदालतों में 2,444 मामलों में अभियोजन शिकायतें (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट्स) दायर की हैं.

मंत्री ने कहा, ‘ये मामले सुनवाई के विभिन्न चरणों में हैं. ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 1,243 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.’

विचाराधीन कैदियों की संख्या के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्तमान में जेल में बंद लोगों का डेटा- जिनमें से कुछ को मूल (प्रेडिकेट) अपराध की जांच करने वाली एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है- केंद्रीय स्तर पर संधारित नहीं किया जाता.

संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले पीएमएलए के तहत सबसे अधिक 1,116 मामले वर्ष 2021-22 में दर्ज किए गए थे. इसके बाद 2022-23 में यह संख्या घटकर 953 और 2023-24 में 698 रह गई. हालांकि, 2024-25 में यह बढ़कर 775 और 2025-26 में 1,080 हो गई.

दोषसिद्धि के मामलों की बात करें तो 2021-22 में तीन, 2022-23 में नौ और 2023-24 में 13 मामलों में दोषसिद्धि हुई. इसके बाद 2024-25 और 2025-26 में यह संख्या फिर घटकर नौ-नौ रह गई. इन चार वर्षों में कुल 43 मामलों में 104 आरोपियों को दोषी ठहराया गया.

इनमें सबसे अधिक 38 आरोपी 2024-25 में दोषी ठहराए गए, जबकि 2022-23 में 24 और 2023-24 तथा 2025-26 में 19-19 आरोपियों को दोषी ठहराया गया.

मंत्री ने आयकर विभाग से जुड़े मामलों का ब्यौरा भी दिया. उन्होंने बताया कि 2021-22 से 2025-26 के बीच आयकर विभाग ने कुल 2,127 अभियोजन मामले दर्ज किए. इनमें 2025-26 में 432 मामले दर्ज हुए, जो पिछले तीन वर्षों की तुलना में सबसे कम हैं. इससे पहले 2024-25 में 611, 2023-24 में 502 और 2022-23 में 387 अभियोजन मामले दर्ज किए गए थे.

चौधरी ने कहा, ‘आयकर मामलों में जांच पूरी होने और प्रासंगिक तथ्यों को दर्ज किए जाने के बाद ही आयकर अधिनियम की धारा 279(1) के तहत सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेकर अभियोजन शिकायतें दायर की जाती हैं.’

उन्होंने बताया कि 2025-26 में आयकर विभाग के मामलों में 47 दोषसिद्धियां हुईं, जबकि 293 मामलों में आरोपी बरी हुए, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है.

मंत्री ने स्पष्ट किया कि दर्ज अभियोजन मामलों और दोषसिद्धि या बरी होने के आंकड़ों के बीच सीधा संबंध नहीं होता, क्योंकि किसी वर्ष में आए फैसले अलग-अलग वर्षों में दर्ज मामलों से संबंधित हो सकते हैं.

गौरतलब है कि हाल के सालों में पीएमएलए से जुड़े कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनमें न्यूज़क्लिक जैसे मीडिया संगठनों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच, तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से जुड़े मामले और पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी आई-पैक से जुड़े मामले शामिल हैं.

इस वर्ष मई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पीएमएलए जैसे विशेष कानून के तहत चलने वाले मुकदमों में भी किसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले का संज्ञान लेने से पहले अदालत के लिए आरोपी का पक्ष सुनना आवश्यक है.

यह टिप्पणी उस समय आई थी जब सुप्रीम कोर्ट ईडी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कहा गया था कि पीएमएलए की विशेष अदालतों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित सामान्य आपराधिक प्रक्रिया का पालन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

पीठ ने पीएमएलए अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें आरोपी का पक्ष सुने बिना ही अपराध का संज्ञान ले लिया गया था.