नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों के परिवारों ने दोनों देशों से उनके परिजनों की रिहाई और स्वदेश वापसी की अपील की है. शनिवार को अहमदाबाद में पाकिस्तान इंडिया पीपुल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी और नेशनल फिशवर्कर्स फोरम की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवारों ने 14 और 15 अगस्त के मौके पर मछुआरों को रिहा करने की मांग की.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जतिन देसाई ने बताया कि कराची की मलिर जेल में इस समय 198 भारतीय मछुआरे बंद हैं. इनमें से 178 अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और उनकी राष्ट्रीयता की भी पुष्टि हो चुकी है. उन्होंने कहा, ‘हम मांग करते हैं कि उन्हें तुरंत भारत वापस लाया जाए.’
देसाई के मुताबिक, कोविड महामारी से पहले तक जेल में बंद मछुआरों के परिवारों को अपने परिजनों की चिट्ठियां मिलती थीं, लेकिन अब यह सिलसिला भी बंद हो गया है.
दोनों संगठनों ने बताया कि मलिर जेल (कराची) में बंद 198 भारतीय मछुआरों में 144 गुजरात, 24 दीव और 18 महाराष्ट्र के हैं. इनमें से ज्यादातर को कांसुलर एक्सेस मिल चुका है.
देसाई के अनुसार, 10 मछुआरों ने 16 जुलाई 2021 को अपनी सजा पूरी कर ली थी, लेकिन वे अब भी जेल में हैं. 115 ने 16 मार्च 2022, 21 ने 17 नवंबर 2022, 10 ने 31 जनवरी 2023 और 22 ने 18 जुलाई 2024 को अपनी सजा पूरी कर ली थी. इसके बावजूद उनकी रिहाई नहीं हुई है.
भारत की जेलों में भी 53 पाकिस्तानी मछुआरे बंद हैं. दोनों देशों के बीच 1 जुलाई को साझा की गई कैदियों की ताजा सूची में इसका उल्लेख है.
विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई को कहा था कि पाकिस्तान से 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई और स्वदेश वापसी में तेजी लाने को कहा गया है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है. मंत्रालय ने पाकिस्तान से उन 13 नागरिक कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस देने की भी मांग की थी, जिनके भारतीय नागरिक होने की संभावना है.
छह साल से पति का इंतजार
इन आंकड़ों के पीछे उन परिवारों की लंबी प्रतीक्षा की कहानियां हैं, जिनके लिए भारत-पाकिस्तान संबंधों का हर उतार-चढ़ाव सीधे उनके घरों तक पहुंचता है.
गिर सोमनाथ जिले के ऊना तालुका के लेरका गांव की भावनाबेन सोलंकी के पति महेशभाई छह साल पहले मछली पकड़ने के लिए समुद्र में गए थे. घर से निकलते समय उनके अंतिम शब्द थे, ‘मैं मछली पकड़ने जा रहा हूं और वापस आ जाऊंगा. चिंता मत करना.’
भावनाबेन कहती हैं, ‘वह वैशाख (अप्रैल-मई) का महीना था, जब महेशभाई समुद्र में गए थे.’ इसके बाद उन्हें अपने पति के बारे में जो खबर मिली, वह यह थी कि उन्हें पाकिस्तान में पकड़ लिया गया है.
भावनाबेन की शादी महज 17 साल की उम्र में महेशभाई से हुई थी. उनके दो बेटे हैं. महेशभाई के पकड़े जाने के समय उनका छोटा बेटा सिर्फ पांच महीने का था. आज वह अपने बड़े भाई के साथ स्कूल जाता है. इस बीच महेशभाई की मां का निधन हो चुका है. भावनाबेन और उनके दोनों बच्चे अब बिस्तर पर पड़े अपने ससुर के साथ रहते हैं. परिवार के पास गुजारे के पर्याप्त और नियमित साधन नहीं हैं.
ऐसी ही कहानी गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार तालुका के कोटडा बंदर गांव की मंजूबेन बारिया की है. उनके 22 वर्षीय बेटे मयूर को 2021 में मछली पकड़ने के दौरान कथित तौर पर पाकिस्तानी जलक्षेत्र में घुसने के आरोप में पकड़ लिया गया था. उसी साल मंजूबेन के पति की भी मौत हो गई.
मंजूबेन कहती हैं, ‘वह जन्माष्टमी के आसपास मछली पकड़ने के लिए घर से निकला था. हर रक्षाबंधन पर उसकी बहनें उसके राखी बांधने का इंतजार करती हैं, लेकिन हमें उसकी कोई खबर नहीं मिली.’
करीब 45 वर्षीय मंजूबेन खेतिहर मजदूर के रूप में काम करके परिवार का गुजारा करती हैं और उन्हें एक दिन के काम के लिए अधिकतम 300 रुपये मिलते हैं.
वह कहती हैं, ‘हम उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी से मिले. पिछले साल विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से भी मिले थे. हमारी सिर्फ एक मांग है कि उन्हें और उनके जैसे दूसरे लोगों को उनके वतन वापस लाया जाए.’
भावनाबेन और मंजूबेन के अलावा शुक्रवार (7 अगस्त) को केंद्रशासित प्रदेश दीव के वाणकबारा की जागृतिबेन भावेशभाई सोलंकी और जीविबेन रामजीभाई सोलंकी तथा कोटडा बंदर की धनिबेन कंजिभाई बामणिया ने भी गांधीनगर में उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी से मुलाकात की. इन सभी ने अपने परिजनों की रिहाई और भारत वापसी की मांग की.
