मध्य प्रदेश: सरकारी अस्पताल ने पोस्टमॉर्टम के बाद कूड़ा उठाने वाली ट्रॉली से भेजा महिला का शव

मध्य प्रदेश के छतरपुर में एक सरकारी अस्पताल से एक मृत महिला के शव को कथित तौर पर नगर पालिका की कचरा ढोने वाली गाड़ी से घर ले जाने का मामला सामने आया है. इस घटना ने सिविल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर किया है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शव ले जाने के लिए गाड़ी की कई बार मांग की गई, लेकिन इसके लिए ज़रूरी बजटीय आवंटन अब तक नहीं मिला है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: Flickr/oddmenout CC BY 2.0)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल अस्पताल में एक मृत महिला का शव कथित तौर पर नगर परिषद के कचरा उठाने वाली गाड़ी से उसके घर भेजे जाने का मामला सामने आया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार शव वाहन की व्यवस्था नहीं कर सका था. वहीं अस्पताल के पास भी शव वाहन का इंजाम नहीं था. ऐसे में इस घटना ने अस्पताल में शवों को ले जाने के लिए उचित परिवहन सुविधा की लंबे समय से चली आ रही कमी को एक बार फिर उजागर किया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से शव वाहन उपलब्ध कराने की मांग कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है.

मृत महिला की पहचान रुखसाना खान के रूप में हुई है. वह 4 जुलाई से लापता थीं. 5 अगस्त को उनका शव सूरजपुर रोड इलाके के पास एक कचरा डंप साइट से बरामद किया गया. जांच में किसी तरह की आपराधिक साजिश या घटना की आशंका सामने आने के बाद शव को अनिवार्य पोस्टमार्टम के लिए बड़ा मलहरा सिविल अस्पताल भेजा गया था.

रुखसाना के पति बाबूलेश अहिरवार ने अख़बार को बताया कि पोस्टमार्टम के बाद परिवार कई घंटों तक शव वाहन का इंतजार करता रहा, लेकिन उन्हें शव ले जाने के लिए कचरा उठाने में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्टर-ट्रॉली की पेशकश की गई.

उन्होंने कहा, ‘हर व्यक्ति चाहता है कि उसे जीते जी नहीं तो कम से कम मौत के बाद सम्मान मिले. अपनी पत्नी के शव को कचरा ढोने वाले वाहन में ले जाते देखना बेहद पीड़ादायक था.’

अस्पताल के अधिकारियों ने इस दावे से इनकार नहीं किया कि उनके पास शव ले जाने के लिए कोई वाहन सुविधा नहीं है.

अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल अधिकारी (बीएमओ) हेमंत मरैया ने अख़बार को बताया कि इस समस्या को जिला स्तर की कई बैठकों में उठाया गया है, लेकिन इसके लिए जरूरी बजटीय आवंटन अब तक नहीं मिला है.

मरैया ने कहा, ‘हमारे पास शव वाहन नहीं है, इसलिए हमें नगर परिषद पर निर्भर रहना पड़ता है. हाल ही में हुई जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की बैठक में हमने शव वाहन की मांग की थी. उम्मीद है कि भविष्य में हमें यह वाहन मिल जाएगा, क्योंकि इससे आम लोगों को काफी लाभ होगा.’

इस बीच छतरपुर के जिला प्रशासन ने मामले की औपचारिक जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों ने कहा है कि मामले की परिस्थितियों और तथ्यों की जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे.