नई दिल्ली: पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कथित फ्रंट यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) की ओर से धमकी भरा पत्र जारी किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीरी पंडितों की बस्तियों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है. साथ ही कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कुछ समय के लिए घर से काम करने को कहा गया है.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (10 अगस्त) को कश्मीरी पंडित संगठनों ने लश्कर की धमकी के मद्देनजर अपने समुदाय के लिए सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है.
यूएलसी की ओर से जारी कथित धमकी पत्र में एक सरकारी विभाग में कार्यरत छह कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम शामिल हैं. संगठन ने इन कर्मचारियों के फोन नंबर भी साझा किए हैं और दावा किया है कि उसके पास उनके परिवार के सदस्यों के नाम और ठिकानों समेत पूरी जानकारी है.
ऑल माइग्रेंट डिस्प्लेस्ड इंप्लाइज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रंजन जोत्शी ने कहा कि सरकार को सूची में शामिल कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए. साथ ही घाटी में तैनात सभी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.
अखबार ने एक पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारी के हवाले से कहा, ‘हमें 25 अगस्त तक घर से काम करने के लिए कहा गया है.’
वहीं, एक अन्य संगठन, कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस) ने कहा है कि दक्षिण कश्मीर में हालिया आतंकी हमलों और इसके बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम वाले नए धमकी भरे पोस्टरों ने एक बार फिर घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों के बीच असुरक्षा की गंभीर भावना को उजागर किया है.
केपीएसएस के अनुसार, ‘क्या यह सुरक्षा में चूक थी, गोपनीय जानकारी का उल्लंघन था या जानबूझकर किया गया लीक? खामियों को दूर करें. इतिहास दोहराए जाने से पहले संवेदनशील लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.’
इस संबंध में कश्मीरी पंडित संगठन पनुन कश्मीर के संयोजक अग्निशेखर ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अपील की कि वे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को धमकी पत्र में नामित सभी लोगों और उनके निकटतम परिवार के सदस्यों के लिए व्यापक खतरे का आकलन करने का निर्देश दें.
