नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की प्रोफेसर एमेरिटा ज़ोया हसन को दिल्ली के एक स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह में संबोधित करना था. उनका संबोधन शुक्रवार (14 अगस्त) को आखिरी समय में रद्द कर दिया गया. इसके लिए सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया.
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कुछ सदस्य स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन के लिए जुटे थे.
ज़ोया हसन को सरदार पटेल विद्यालय के स्वतंत्रता दिवस और छात्रवृत्ति पुरस्कार समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था. उन्हें राष्ट्रीय ध्वज फहराने और विद्यार्थियों को संबोधित करना था. स्कूल की ओर से जारी निमंत्रण के मुताबिक, कार्यक्रम सुबह 10 बजे लोधी एस्टेट स्थित परिसर में शुरू होना था.
घटना से परिचित लोगों के मुताबिक, करीब 10-15 विहिप सदस्य स्कूल के बाहर जमा हुए, जिसके बाद वहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया.
स्कूल ने अखबार से पुष्टि की कि सुरक्षा कारणों से हसन का भाषण और स्कूल में उनका प्रवेश रद्द करना पड़ा.
मामले से परिचित स्कूल की एक शिक्षिका ने कहा, ‘दुर्भाग्य से, कुछ उपद्रवी तत्व सुबह-सुबह स्कूल के बाहर जमा हो गए, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई.’
स्कूल प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया कि हसन की भागीदारी रद्द करने का फैसला पुलिस के निर्देश पर लिया गया था या स्कूल ने खुद यह निर्णय किया.
हालांकि, समारोह में कोई व्यवधान नहीं हुआ और इसे स्कूल के सभागार में आयोजित किया गया. स्कूल प्रशासन ने अखबार को बताया कि गुजरात एजुकेशन सोसाइटी (जीईएस) की अध्यक्ष और स्कूल की पूर्व छात्रा श्वेता कल्याणवाला ने हसन की जगह समारोह में हिस्सा लिया. जीईएस स्कूल का संचालन करने वाली मूल संस्था है.
दिल्ली पुलिस ने कहा कि स्कूल ने उसे सुरक्षा खतरे की जानकारी दी थी और हसन की भागीदारी रद्द करने का फैसला स्कूल ने ही लिया होगा. पुलिस ने इस बात से इनकार किया कि उसने हसन को कार्यक्रम में शामिल होने से रोका. पुलिस के मुताबिक, उसके जवानों की तैनाती केवल सुरक्षा मुहैया कराने के लिए की गई थी.
राजनीतिक वैज्ञानिक ज़ोया हसन को विद्यार्थियों से बहुलतावाद के विषय पर बात करनी थी. उन्होंने अभी इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
शिक्षाविदों ने फैसले पर जताया विरोध
कई शिक्षाविदों ने हसन को कार्यक्रम में बोलने से रोके जाने पर विरोध जताया.
अर्थशास्त्री जयति घोष ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि पुलिस ने हसन को कार्यक्रम में बोलने से रोक दिया और स्कूल प्रशासन को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम रद्द करने के लिए मजबूर किया गया.
उन्होंने लिखा, ‘सरकार कितनी डरी हुई है? प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर ज़ोया हसन को सरदार पटेल विद्यालय के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘बहुलतावाद’ पर बोलने से दिल्ली पुलिस ने रोक दिया.’
How scared is this government? Eminent scholar Prof. Zoya Hasan has just been prevented from speaking on “Pluralism” at the Independence Day function of Sardar Patel Vidyalaya – by Delhi Police! 1/3
— Jayati Ghosh (@Jayati1609) August 14, 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘दिल्ली पुलिस को विहिप के उपद्रवियों को रोकना चाहिए था, लेकिन उसने स्कूल को प्रो. ज़ोया हसन की बातचीत रद्द करने के लिए मजबूर कर दिया. फिर भी वे चाहते हैं कि उन्हें एक पेशेवर बल के रूप में सम्मान दिया जाए. बच्चों को खुद पता चल जाता कि प्रो. हसन कौन हैं, लेकिन उन्हें उनसे मिलने से रोक दिया गया.’
