नई दिल्ली/जयपुर: जुलाई 2026 के आखिर में सोशल मीडिया पर उठी एक लहर ने 15 साल की एक लड़की की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया. इस किशोरी ने उन छात्र प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था, जिनके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. अपने साथ प्रदर्शन कर रहे कई युवाओं की तरह उसने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया था. उसके बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसके बाद उसे निशाना बनाकर ऑनलाइन उत्पीड़न का अभियान शुरू हो गया.
इस अभियान की अगुवाई ‘द जयपुर डायलॉग्स’ नाम के एक संगठन ने की. इसके संस्थापक संजय दीक्षित भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी हैं. संगठन खुद को ‘भारतीय ज्ञान परंपराओं को बढ़ावा देने वाला एक जीवंत ऑनलाइन मंच’ बताता है. एक्स पर लगातार कई पोस्ट के जरिए ‘द जयपुर डायलॉग्स’ के हैंडल ने लड़की की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी, उसे ‘मोस्ट वांटेड’ बताया और आखिरकार उसकी निजी जानकारी सार्वजनिक कर दी.
इसके बाद 15 साल की इस प्रदर्शनकारी लड़की को बलात्कार, हत्या और एसिड अटैक की धमकियां मिलने लगीं. अनजान लोग उसके घर तक पहुंचने लगे. इसके बाद वह और उसका परिवार छिपने को मजबूर हो गए.
‘द जयपुर डायलॉग्स’ ने 1 अगस्त को प्रकाशित एक लेख में अपने इस कदम का बचाव करते हुए खुद को ‘जिम्मेदार राष्ट्रवादी मंच’ बताया. लेख में कहा गया, ‘हमने उन तस्वीरों को अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, मर्यादा की हर सीमा लांघने वालों की सार्वजनिक रूप से पहचान उजागर करने की मांग की और कानूनी कार्रवाई का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार थे.’
लेख में आगे कहा गया, ‘अगर भारत के प्रधानमंत्री के खुले तौर पर अपमान के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करना वामपंथियों की नजर में जयपुर डायलॉग्स को दोषी बनाता है, तो हमें यह दोष गर्व से स्वीकार है.’
किशोरी के साथ संगठन के इस व्यवहार के बाद उसकी अन्य गतिविधियां और सामग्री भी जांच के दायरे में आ गईं. ‘द जयपुर डायलॉग्स’ की वेबसाइट पर ‘इस्लाम’ और ‘सनातन’ जैसे खंड हैं. वेबसाइट पर अक्सर ऐसी खबरें और लेख प्रकाशित होते हैं, जिनमें प्रचारात्मक और सांप्रदायिक तेवर नजर आते हैं.
हाल के कुछ उदाहरण देखें. एक लेख में दावा किया गया है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने 18 महीने के कार्यकाल में आम आदमी पार्टी को ‘तबाह’ कर दिया है. दूसरे लेख की हेडलाइन है, ‘डेमोग्राफिक जिहाद ने गुजरात के एक और इलाके को अपने कब्जे में लिया’. वहीं, तीसरे लेख में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के राज्य में गोहत्या पर लगी रोक को चुनौती देने के फैसले को ‘अल्पसंख्यक वोट बैंक को खुश करने की खुली कोशिश’ बताया गया है.
इसके सोशल मीडिया हैंडल अक्सर ईसाई या मुस्लिम धर्म से जुड़े सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाते हैं. मसलन, नवंबर 2025 में आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल मैच में भारतीय क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्स के 24 रन पर आउट होने के बाद ‘द जयपुर डायलॉग्स’ ने उनके धर्म को निशाना बनाया. एक्स पर उसकी एक पोस्ट में रोड्रिग्स की तस्वीर के साथ लिखा था, ‘रविवार होने के कारण जीसस छुट्टी पर हैं.’
फरवरी 2026 में इसी अकाउंट ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी की मां और फिल्मकार मीरा नायर को अमेरिकी फाइनेंसर और बाल यौन अपराधी जेफरी एप्सटीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी. पोस्ट के साथ लिखा था, ‘सूत्रों का दावा है कि न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी, जेफरी एप्सटीन के सगे बेटे (बायोलॉजिकल सन) हैं.’ (वीडियो में इस्तेमाल की गई तस्वीरें फर्जी थीं. कई ख़बरों में पाया गया कि ये तस्वीरें एआई की मदद से बनाई गई थीं.)
हमने ‘द जयपुर डायलॉग्स’ द्वारा प्रकाशित सामग्री से आगे जाकर उसके पीछे मौजूद कॉरपोरेट ढांचे का पता लगाने की कोशिश की. हमारी पड़ताल दो संस्थाओं तक पहुंची: जयपुर डायलॉग्स फोरम, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है और जिसकी स्थापना दीक्षित ने नवंबर 2016 में की थी, और जेडी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड, जो मुनाफे के लिए काम करने वाली मीडिया और कंटेंट कंपनी है और जिसकी स्थापना उन्होंने सितंबर 2020 में की थी.
रिकॉर्ड से पता चलता है कि इस ढांचे के राजनीतिक संबंध भी हैं. उसके वित्तीय दस्तावेजों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कम से कम दो नेता जयपुर डायलॉग्स फोरम के निदेशक हैं.
जेडी डिजिटल ही ‘द जयपुर डायलॉग्स’ की वेबसाइट और उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स का संचालन करती है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी को करीब 6.6 करोड़ रुपये का राजस्व मिला. इसी साल उसने कर्मचारियों पर करीब 83 लाख रुपये और प्रोडक्शन पर करीब 1.72 करोड़ रुपये खर्च किए. टैक्स चुकाने के बाद कंपनी को 1.13 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ.
2020 में जेडी डिजिटल के गठन के बाद से अब तक कंपनी ने संजय दीक्षित, उनके बेटे श्रौतेय और पत्नी श्रुति को कुल मिलाकर करीब 4 करोड़ रुपये से कुछ कम का भुगतान किया है.
जेडी डिजिटल और जयपुर डायलॉग्स फोरम, दोनों का पंजीकृत पता एक ही है. यह जयपुर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित जगतपुरा के पॉश रिहायशी इलाके पाम कोर्ट में एक मकान का पता है.
हमने इस रिपोर्ट के लिए संजय दीक्षित से विस्तृत सवालों की एक सूची साझा कर उनका पक्ष जानना चाहा. उन्होंने हमारे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. इसके बजाय उन्होंने यह जानकारी ज़रूर साझा की कि उनकी पत्नी श्रुति दीक्षित ‘राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर में वरिष्ठ और प्रतिष्ठित वकील’ हैं.
उन्होंने आगे जोड़ा, ‘इसलिए आपके पास जो भी जानकारी है, वह सही हो या गलत, उसे किस तरह पेश करते हैं, इसे लेकर बहुत सावधान रहें. आपको ऐसे सवाल पूछने का कोई अधिकार नहीं है, जिनमें पहले से ही कोई निष्कर्ष निहित हो. अगर आपने कोई गलत जानकारी प्रकाशित की, तो कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें.’
जयपुर डायलॉग्स फोरम के राजनीतिक संबंध
दीक्षित के गैर-लाभकारी संगठन जयपुर डायलॉग्स फोरम का पंजीकरण 24 नवंबर 2016 को हुआ था. जयपुर डायलॉग्स फोरम के उद्देश्यों में कार्यक्रम आयोजित करना, किताबें प्रकाशित करना और साहित्य, विज्ञान, कला, संगीत, संस्कृति, इतिहास, रणनीतिक मामलों, सैन्य मामलों, अर्थशास्त्र और शिक्षा जैसे विषयों पर काम करने वाले संगठनों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को सहयोग देना शामिल है.
संगठन का एक उद्देश्य ‘विज्ञापन के नैतिक मानकों को बढ़ावा देने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए हर व्यावहारिक तरीके से मदद, सहयोग और काम करना’ भी बताया गया है.
करीब एक दशक पहले स्वराज्य पत्रिका को दिए एक इंटरव्यू में दीक्षित ने फोरम के कामकाज को कुछ और स्पष्ट तरीके से बताया था. उन्होंने जयपुर डायलॉग्स फोरम के जरिए कई दिनों तक चलने वाले एक वक्ताओं के कार्यक्रम के आयोजन के बारे में बात की थी, जिसका नाम भी ‘द जयपुर डायलॉग्स’ है.
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘मार्क्सवादी विमर्श’ भारत के इस्लामी शासकों के ‘कठोर जिहादी चरित्र’ को कमतर करके पेश करता है. उन्होंने आगे कहा, ‘यह वामपंथी आधुनिक विमर्श सहिष्णुता की जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह बहुसंख्यक समुदाय पर डालने की कोशिश करता है और उससे यह उम्मीद करता है कि वह जिहादी आतंकवाद जैसे वास्तविक खतरे पर भी प्रतिक्रिया न दे. हमारा उद्देश्य ऐसे विमर्शों को सामने लाना और उनमें संतुलन कायम करना है…’
जयपुर डायलॉग्स फोरम के मौजूदा निदेशकों में दीक्षित, विष्णु बिहानी नाम के एक कारोबारी और भाजपा नेताओं सुनील कोठारी और पंकज जोशी के नाम शामिल हैं. जब हमने कोठारी और जोशी से संपर्क किया, दोनों संगठन की स्थापना के समय से ही इसके निदेशक हैं, तो उन्होंने हमसे इस बात की पुष्टि की.
16 जनवरी 2026 की कंपनी की निदेशक रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘समीक्षाधीन वर्ष के दौरान संस्था ने किसी महिला कर्मचारी को नियुक्त नहीं किया.’

सुनील कोठारी ने पिछले दो दशकों में भाजपा की राजस्थान इकाई में कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं. जुलाई 2010 में उन्हें पहली बार प्रदेश भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया था. इसके बाद 2018 में वह प्रदेश उपाध्यक्ष बने. 2020 में उन्हें जयपुर शहर का भाजपा जिलाध्यक्ष बनाया गया. बाद में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस पद से इस्तीफा दे दिया.
इसी दौरान भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के हस्ताक्षर वाला एक आधिकारिक पत्र सामने आया, जिसमें कोठारी को राजस्थान में कहीं भी जमीन या अचल संपत्ति खरीदने के मामले में पार्टी की ओर से अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि और हस्ताक्षरकर्ता बनाया गया था.
पत्र के मुताबिक, इन लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों पर कोठारी भाजपा की ओर से हस्ताक्षर कर सकते थे. साथ ही, पार्टी के जिला कार्यालय भवन के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरियों और अन्य अनुमतियों को लेकर वह सरकारी अधिकारियों से संपर्क और समन्वय भी कर सकते थे.

ख़बरों के मुताबिक, कोठारी जयपुर में भाजपा की कार्यालय निर्माण समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. जून 2024 में उन्होंने शहर की शहरी योजना और विकास संस्था जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से भाजपा का प्रदेश मुख्यालय बनाने के लिए 6,000 वर्ग मीटर का भूखंड आवंटित करने का अनुरोध किया था. जेडीए ने एक महीने बाद यह भूखंड आवंटित कर दिया.
उसी साल अगस्त में राज्यसभा की एक सीट के लिए नामांकन वापस लेने के बाद ख़बरों में कोठारी को ‘डमी उम्मीदवार’ बताया गया था. उनके नामांकन वापस लेने से भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया था.
जयपुर डायलॉग्स फोरम के दूसरे राजनीतिक रूप से जुड़े निदेशक पंकज जोशी भी लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं. 2004 में जयपुर के नगर निकाय चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर एक वार्ड से पार्षद चुने गए थे. इसके बाद उन्होंने पहले शहर के उप महापौर और फिर 2009 में महापौर के रूप में काम किया.
जुलाई 2021 तक जोशी को राजस्थान में भाजपा का प्रदेश मीडिया समन्वयक नियुक्त किया गया था. अब वह इस पद पर नहीं हैं. एक्स पर उनकी प्रोफाइल में उन्हें पीएनबी में स्वतंत्र निदेशक बताया गया है. माना जाता है कि यहां पीएनबी से आशय सरकारी क्षेत्र के बैंक पंजाब नेशनल बैंक से है.
पीएनबी के एक दस्तावेज के मुताबिक, जोशी को दिसंबर 2021 में तीन साल की अवधि के लिए बैंक के बोर्ड में अंशकालिक गैर-आधिकारिक निदेशक नियुक्त किया गया था.

सितंबर 2019 से अगस्त 2023 के बीच कांग्रेस नेता सुनील शर्मा भी जयपुर डायलॉग्स फोरम के निदेशक रहे थे. मार्च 2024 में जयपुर डायलॉग्स फोरम के साथ उनके जुड़ाव की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें उसी साल हुए लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाने से इनकार कर दिया था.
फोन पर जब हमने उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
कंपनी के मौजूदा चौथे निदेशक और कारोबारी विष्णु बिहानी अक्सर ‘द जयपुर डायलॉग्स’ के पॉडकास्ट और वीडियो में नजर आते हैं. एक्स पर उनकी टाइमलाइन में विपक्षी दलों को निशाना बनाने वाली पोस्ट और ईसाई धर्म में धर्मांतरण को लेकर बिना पुष्टि किए गए दावे दिखाई देते हैं. उन्होंने भी हमारे सवालों का जवाब नहीं दिया.
पिछले कुछ वर्षों में जयपुर डायलॉग्स फोरम की ज्यादातर आय चंदे से हुई है.
रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास जमा संगठन के वित्तीय विवरणों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में उसकी कुल आय करीब 28 लाख रुपये थी और यह पूरी राशि डोनेशन से आई थी. वित्त वर्ष 2023-24 में उसकी आय करीब 39 लाख रुपये थी, जिसमें से 29 लाख रुपये दान से मिले थे. 2022-23 में कुल आय करीब 25 लाख रुपये थी, जिसमें 16 लाख रुपये दान से आए थे. वहीं 2021-22 में संगठन की कुल आय करीब 3.3 लाख रुपये थी, जिसमें से 2.9 लाख रुपये दान के रूप में मिले थे.
जयपुर डायलॉग्स फोरम के उपलब्ध वित्तीय विवरणों में 2024-25 सबसे हाल का वर्ष है.

‘द जयपुर डायलॉग्स’ की वेबसाइट, जिसका लिंक उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी दिया गया है, भारत और विदेशों से चंदे की अपील करती है. वेबसाइट पर ‘सपोर्ट अस’ नाम का एक लिंक है, जो जेडी डिजिटल की वेबसाइट के एक पेज पर ले जाता है. वहां भारत और विदेश, दोनों जगह से चंदा देने वालों के लिए भुगतान के लिंक दिए गए हैं.
जेडी डिजिटल के निदेशक संजय दीक्षित और उनके बेटे श्रौतेय हैं. कंपनी की आय के स्रोतों में ‘द जयपुर डायलॉग्स’ की वेबसाइट पर मिलने वाली सब्सक्रिप्शन फीस, साथ ही उसकी वेबसाइट और यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर तीन मिलियन से अधिक फॉलोअर्स वाले सोशल मीडिया दर्शकों के बीच मॉनेटाइज़्ड कंटेंट, डिजिटल विज्ञापन और कार्यक्रमों से होने वाली कमाई शामिल है.
कंपनी के वित्तीय विवरणों से पता चलता है कि 2020 में गठन के बाद से उसे विदेशी मुद्रा में भी कुछ भुगतान मिले हैं. वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच ये विदेशी भुगतान जेडी डिजिटल की कुल आय का करीब 53% रहे.

मई 2025 में वेबसाइट बेलिंगकैट की एक पड़ताल में बताया गया था कि ‘द जयपुर डायलॉग्स’ का एक अमेरिकी संस्करण भी है, जिसका नाम ‘जयपुर डायलॉग्स यूएसए’ है और जिसका अपना यूट्यूब चैनल है.
इस पड़ताल के मुताबिक, इस चैनल पर नियमित रूप से कार्यक्रम की मेजबानी करने वालों में कारोबारी विभूति झा भी शामिल थे. झा ने 2022 में न्यूयॉर्क राज्य के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे. पड़ताल में यह भी कहा गया था कि ‘ऐसा लगता है कि उनके विश्व हिंदू परिषद (विहिप) अमेरिका के साथ करीबी संबंध हैं.’
दीक्षित परिवार को भुगतान
जेडी डिजिटल के वित्तीय विवरणों से पता चलता है कि कंपनी ने संजय दीक्षित और उनके परिवार को बड़ी रकम का भुगतान किया है. इन भुगतानों को कंपनी के प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों और उनके रिश्तेदारों को किए गए भुगतान के रूप में दर्ज किया गया है. सितंबर 2020 में कंपनी के गठन के बाद से अब तक उसने संजय दीक्षित, उनके बेटे और कंपनी के सह-निदेशक श्रौतेय तथा उनकी पत्नी श्रुति को कुल मिलाकर करीब चार करोड़ रुपये का भुगतान किया है.
इन भुगतानों की राशि वित्त वर्ष 2020-21 में 21.3 लाख रुपये, 2021-22 में 51.5 लाख रुपये, 2022-23 में 75.7 लाख रुपये, 2023-24 में 83.5 लाख रुपये और 2024-25 में 1.67 करोड़ रुपये रही.
इन भुगतानों में वेतन, कानूनी या प्रबंधन परामर्श की फीस, ट्रेडमार्क के इस्तेमाल की फीस, मानदेय, कार्यक्रमों पर खर्च, कंटेंट से जुड़े खर्च और किराया शामिल हैं.

जेडी डिजिटल के वित्तीय विवरणों में संजय दीक्षित और उनके परिवार के सदस्यों के साथ-साथ 5 डॉट्स थॉट प्रोसेस एलएलपी को भी कुछ रकम का भुगतान किया जाना दर्ज है. इस फर्म में उनके बेटे श्रौतेय सह-निदेशक हैं. कंपनी की फाइलिंग में इन भुगतानों को ‘विविध लेनदारों’ (सनड्री क्रेडिटर्स) को देय रकम बताया गया है.
वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच इन संस्थाओं को देय कुल रकम करीब 66.5 लाख रुपये दर्ज की गई है. हालांकि, वित्तीय विवरणों से यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों और उनके रिश्तेदारों के तौर पर दीक्षित परिवार को किए गए ऊपर बताए गए भुगतान भी शामिल हैं या नहीं. इस रिपोर्ट के लिए भेजे गए विस्तृत सवालों का श्रौतेय दीक्षित ने कोई जवाब नहीं दिया.
कंपनी की फाइलिंग के मुताबिक, पाम कोर्ट की जिस संपत्ति से जेडी डिजिटल का कार्यालय चलता है, वह संजय दीक्षित की पत्नी श्रुति के नाम है. कंपनी इसी संपत्ति पर एक और इमारत भी बना रही है, जिसके लिए उसने 2024-25 में करीब 90.5 लाख रुपये का कर्ज लिया था.
2022 से 2026 के बीच कंपनी ने तीन कारें खरीदी हैं. श्रौतेय द्वारा हस्ताक्षरित ऋण दस्तावेजों के मुताबिक, जेडी डिजिटल ने 2022 में स्कोडा कोडियाक एल एंड क्यू एसयूवी के लिए करीब 35 लाख रुपये, 2025 में विंडसर एक्सक्लूसिव ईवी के लिए 12 लाख रुपये और 2026 में मर्सिडीज-बेंज सी300 एएमजी लाइन लग्जरी सेडान के लिए 45 लाख रुपये का कर्ज लिया.
जेडी डिजिटल के ग्राहकों में एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम भी शामिल है.
कंपनी के वित्तीय विवरणों के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) पर वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में मीडिया कंपनी का करीब 1.69 लाख रुपये बकाया था. (दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं है कि ओएनजीसी को यह भुगतान किस सेवा के लिए करना था.)

हमने ओएनजीसी के प्रवक्ता से सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी के जेडी डिजिटल के साथ संबंधों के बारे में जानकारी मांगी है. उनका जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
संजय दीक्षित और उनके बेटे श्रौतेय से प्रतिक्रिया मांगने के बाद, द जयपुर डायलॉग्स के एक्स अकाउंट ने एक पोस्ट में दावा किया कि द वायर, न्यूज़लॉन्ड्री और द न्यूज़ मिन – जिन्हें उसने ‘वामपंथी झुकाव वाले’ मीडिया संस्थान बताया – ‘जयपुर डायलॉग्स के खिलाफ एक हिट जॉब’ की तैयारी कर रहे हैं.
पोस्ट में दावा किया गया कि यह ‘नेशनलिस्ट इकोसिस्टम’ का समर्थन करने वालों से बदला लेने का एक तरीका हो सकता है, जिन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके फंडिंग स्रोतों को ‘उजागर’ किया था. पोस्ट में दक्षिणपंथी टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा और ‘ऑफिस ऑफ विजय पटेल’ नाम के एक्स अकाउंट को टैग करते हुए बिना कोई सबूत दिए दावा किया गया कि ‘अगला निशाना’ वे हो सकते हैं.
(आयुष जोशी और मारिया टेरेसा राजू के इनपुट के साथ.)
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