यूपी: सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने पर पत्रकारों, नेताओं समेत कई लोगों पर एफआईआर

उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी दिखाने वाले वीडियो को लेकर पत्रकारों व आम आदमी पार्टी के नेताओं समेत कई लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई हैं. देवरिया के बाद राज्य के कम से कम आठ अन्य ज़िलों में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई है.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, सिद्धार्थनगर और ग़ाज़ियाबाद ज़िलों के सरकारी स्कूलों की कथित जर्जर स्थिति दिखाने वाले वीडियो, जिन्हें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया. (फोटो साभार: फेसबुक और एक्स पर साझा वीडियो के स्क्रीनग्रैब)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर वीडियो बनाने और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने के मामले में एक सोशल मीडिया पत्रकार, आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत कई लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं. इन लोगों पर भ्रामक और गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया है.

इस संबंध में द वायर ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया में युवा कार्यकर्ता रजत सिंह के खिलाफ एक स्थानीय सरकारी स्कूल की जर्जर हालत का वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था. अब सामने आया है कि इसी तरह के मामलों में राज्य के कम से कम आठ अन्य जिलों- ग़ाज़ियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, हरदोई, हाथरस, मेरठ, लखनऊ, अमेठी और सिद्धार्थनगर- में भी एफआईआर दर्ज की गई हैं.

यह कार्रवाई 22 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अधिकारियों को सरकारी स्कूलों से जुड़े ‘फर्जी’ और ‘भ्रामक’ वीडियो प्रसारित कर राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद शुरू हुई है.

इसके साथ ही राज्य के कई जिलों में बिना उचित अनुमति के बाहरी लोगों, खासकर यूट्यूबर और सोशल मीडिया यूज़र्स के सरकारी स्कूलों में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है.

सिद्धार्थनगर

एफआईआर दर्ज होने वालों में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इमरान लतीफ भी शामिल हैं. उनके खिलाफ 24 अगस्त को उनके गृह जिले सिद्धार्थनगर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 336(4), 353(1) और 329(3) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

उन पर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए जालसाजी करने, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से झूठी सूचना, अफवाह या रिपोर्ट प्रसारित करने, आपराधिक अतिक्रमण और घर में अनधिकृत प्रवेश जैसे आरोप लगाए गए हैं.

इससे एक दिन पहले, 23 अगस्त को लतीफ ने डुमरियागंज तहसील मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित वसा दरगाह के एक संयुक्‍त उच्च प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया था.

इस संबंध में लतीफ ने द वायर से कहा, ‘स्कूल का गेट टूटा हुआ था और कोई भी अंदर जा सकता था. वहां कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई होती है, लेकिन सिर्फ एक ही कक्षा संचालित हो रही थी. प्रधानाचार्य के कमरे में फर्नीचर तक नहीं था.’

लतीफ द्वारा वीडियो अपने फेसबुक प्रोफाइल पर अपलोड किए जाने के बाद डुमरियागंज के खंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार शुक्ला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि लतीफ ने राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की है.

शिकायत के अनुसार, लतीफ रविवार को, जो अवकाश का दिन था, बिना आधिकारिक अनुमति के स्कूल परिसर में दाखिल हुए और बाद में एक ‘भ्रामक और मनगढ़ंत’ वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया.

हालांकि, लतीफ अपने वीडियो में दिखाए गए तथ्यों पर कायम हैं. उन्होंने कहा, ‘जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी मेरे साथ स्कूल का मौके पर निरीक्षण कर सकते हैं या वीडियो की फॉरेंसिक जांच करा सकते हैं.’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियां देखने को तैयार नहीं है.

लतीफ ने कहा, ‘स्कूलों की हालत खराब है और हम सिर्फ उनकी कमियों को सामने ला रहे हैं. लेकिन उन्हें ठीक करने के बजाय सरकार झूठे मुकदमे दर्ज कर हमें डराना चाहती है.’

लखनऊ

लखनऊ में डिजिटल समाचार चैनल ज़मीनी ख़बर चलाने वाले सोशल मीडिया पत्रकार अमित यादव के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. यादव ने एक स्थानीय सरकारी स्कूल में शौचालयों की खराब स्थिति और स्वच्छ पेयजल की कमी को दिखाते हुए एक वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया था.

यादव के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 223, 353 और 356 के तहत मामला दर्ज किया गया है. ये धाराएं लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना, लोक शांति भंग करने वाली सूचना या बयान फैलाने और आपराधिक मानहानि से संबंधित हैं.

यादव के सोशल मीडिया चैनल के फेसबुक पर 6.70 लाख, इंस्टाग्राम पर 21,800 और यूट्यूब पर 1.64 लाख फॉलोअर और सब्सक्राइबर हैं.

लखनऊ पुलिस ने यादव और उनके एक अज्ञात सहयोगी के खिलाफ 24 अगस्त को एफआईआर दर्ज की. यह कार्रवाई गोसाईंगंज क्षेत्र के बेगरिया मऊ उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रभारी प्रधानाचार्य विनिता श्रीवास्तव की शिकायत के बाद की गई है.

श्रीवास्तव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि यादव और उनके साथी 20 अगस्त को बिना उनकी या शिक्षा विभाग की पूर्व अनुमति के स्कूल परिसर में पहुंचे, जबकि उस समय छात्र अर्धवार्षिक परीक्षाएं दे रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘हम शिक्षक परीक्षाओं में व्यस्त थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर शौचालयों की सफाई और पानी की आपूर्ति को लेकर एक झूठा वीडियो बनाया. मैंने उनसे बार-बार अनुमति लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने हम पर बात करने का दबाव बनाया.’

श्रीवास्तव ने यह भी आरोप लगाया कि यादव करीब 10 से 15 मिनट तक स्कूल में रहे और दो महिला शिक्षिकाओं पर कैमरे के सामने सवालों के जवाब देने का दबाव डाला गया.

उन्होंने दावा किया कि वीडियो में किए गए दावों के विपरीत स्कूल परिसर और शौचालय पूरी तरह साफ-सुथरे थे.

श्रीवास्तव ने कहा, ‘स्कूल में ऐसी कोई समस्या नहीं है. गांव के प्रधान भी स्कूल में मौजूद थे और उन्होंने बताया कि नियमित रूप से सफाई होती है. लेकिन राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण सरकार, उसकी योजनाओं और स्कूल की छवि खराब करने के इरादे से विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर भ्रामक वीडियो प्रसारित किया गया.’

द वायर ने प्रतिक्रिया के लिए अमित यादव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया. हालांकि, अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर जारी एक वीडियो बयान में यादव ने कहा कि प्रशासन ने आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को दबाने के लिए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

वीडियो में यादव कहते हैं, ‘अगर आप सरकारी स्कूलों की सच्चाई दिखाएंगे तो आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाएगी. यहां पढ़ने आने वाले ज्यादातर गरीब बच्चे ओबीसी और दलित समुदायों से हैं. जब मैंने दिखाया कि सरकार ओबीसी और दलित बच्चों को किस तरह की शिक्षा दे रही है, तो सरकार को बुरा लग गया.’

मेरठ

मेरठ में भी सरूरपुर के खंड शिक्षा अधिकारी सुदर्शन लाल की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. अधिकारी ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने कलंद स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय का वीडियो एक्स पर अपलोड कर ‘झूठी अफवाहें’ फैलाने और प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश की है.

लाल ने कहा कि वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति ने उसे प्रकाशित करने से पहले संबंधित विभागीय अधिकारियों से तथ्यों की पुष्टि नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया, ‘यह कृत्य केवल स्कूल और सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से किया गया.’

गौरतलब है कि लाल की पुलिस शिकायत में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के उस प्रशासनिक आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें बिना अनुमति बाहरी लोगों के सरकारी स्कूल परिसरों में प्रवेश पर रोक लगाई गई है.

द वायर पहले भी रिपोर्ट कर चुका है कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अधिकारियों ने इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए हैं.

22 अगस्त को दर्ज एफआईआर में मानहानि के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय, भाषाई, नस्लीय या धार्मिक समूहों और जातियों के बीच दुश्मनी, घृणा या दुर्भावना की भावना को बढ़ावा देने के इरादे से झूठे बयान, अफवाह या भड़काऊ खबर तैयार करने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई अधिवक्ता और कांग्रेस के जिला महासचिव जितेंद्र पंचाल के बेटे संयम पंचाल तथा उनके सहयोगी अयान मिर्जा द्वारा स्कूल जाकर वीडियो बनाने के बाद शुरू हुई है.

हालांकि, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि दोनों को हिरासत में लिया गया है.

25 अगस्त को मेरठ कांग्रेस अध्यक्ष गौरव भाटी ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया और स्थानीय उपजिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा. उन्होंने इस एफआईआर को ‘सरकार के इशारे पर की गई तानाशाही कार्रवाई’ बताया है.

गौतम बुद्ध नगर

गौतम बुद्ध नगर में आम आदमी पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष पंकज अवाना और उनके चार साथियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. 20 अगस्त को सेक्टर-51 के होशियारपुर स्थित कंपोजिट स्कूल में वीडियो बनाने के बाद उनके खिलाफ बीएनएस की धाराओं 333, 352, 351(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई.

इन धाराओं के तहत आपराधिक धमकी, अनधिकृत प्रवेश और शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं.

स्कूल के शिक्षक सत्यवीर यादव ने पुलिस शिकायत में आरोप लगाया कि अवाना और उनके साथी जबरन स्कूल परिसर में घुस गए और बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्ड करने लगे.

यादव के अनुसार, उन्होंने और स्कूल के कर्मचारियों- जिनमें 19 महिला और एक पुरुष शिक्षक शामिल थे- ने समूह को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी और शोर-शराबा करने लगे.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अवाना ने कर्मचारियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और उन्हें धमकी दी, जिससे उनके पेशेवर सम्मान को ठेस पहुंची.

पुलिस शिकायत में यादव ने आरोप लगाया, ‘जाते समय वह अपने साथियों के साथ हमें दोबारा देखने की धमकी देकर गए.’

हरदोई

हरदोई में छोटी अस्योली प्राथमिक विद्यालय से संबंधित एक वीडियो प्रसारित करने के मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के एक नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. शुरुआत में आरोपी का नाम एफआईआर में स्पष्ट रूप से नहीं था, लेकिन उसे आप का प्रतिनिधि बताया गया था. बाद में उसकी पहचान पार्टी नेता फिरोज़ सिद्दीकी के रूप में हुई.

उनके खिलाफ जालसाजी, लोक शांति भंग करने वाली सूचना फैलाने, मानहानि और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया.

सुरसा के खंड शिक्षा अधिकारी धोखेलाल राणा ने कहा कि 20 अगस्त को खुद को आप से जुड़ा बताने वाले एक व्यक्ति ने स्कूल से संबंधित एक ‘भ्रामक’ वीडियो एक्स पर प्रसारित किया. आरोप है कि वीडियो का उद्देश्य सरकार की छवि खराब करना और सार्वजनिक अशांति पैदा करना था.

स्कूल के प्रधानाध्यापक के बयान का हवाला देते हुए राणा ने बताया कि इस परिसर में प्राथमिक कक्षाओं के साथ एक आंगनवाड़ी केंद्र भी संचालित होता है. उन्होंने कहा कि जिस दिन वीडियो बनाया गया, उस दिन स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी. आरोप है कि शाम करीब चार बजे आरोपी परिसर में दाखिल हुआ और वीडियो रिकॉर्ड किया.

राणा ने यह भी आरोप लगाया कि उस व्यक्ति ने आसपास के ग्रामीणों और वहां खेल रहे बच्चों को इकट्ठा कर स्कूल की कार्यप्रणाली को लेकर एक ‘भ्रामक वीडियो’ बनाया.

ग़ाज़ियाबाद

ग़ाज़ियाबाद में भी जोया स्थित एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में वीडियो बनाने के मामले में आप नेता चंद्रमोहन चौहान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि जिस इमारत को वीडियो में दिखाया गया था, उसे पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका था.

वीडियो में चौहान ने स्कूल परिसर में पड़ी देसी शराब की खाली बोतलें, पानी की खाली बोतलें और इधर-उधर फैला कूड़ा दिखाया था.

स्कूल के प्रधानाचार्य अली कंबर ने कहा कि उच्च प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालयों का प्रशासनिक रूप से विलय कर दिया गया है और दोनों स्कूलों के छात्र अब प्राथमिक विद्यालय की इमारत में एक साथ पढ़ते हैं.

कंबर ने आरोप लगाया कि चौहान ने सरकार की छवि खराब करने के लिए ‘दुर्भावनापूर्ण प्रचार’ किया और वीडियो बनाने से रोकने पर स्कूल कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया. उनका कहना था कि चौहान ने इस्तेमाल में न आने वाली जर्जर इमारत का वीडियो दिखाकर स्थिति को ‘अधूरे और भ्रामक तरीके से’ पेश किया.

सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चला रहे आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि चौहान के खिलाफ सच्चाई सामने लाने के कारण एफआईआर दर्ज की गई.

संजय सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘योगी जी, क्या पाठशाला को मधुशाला बनाया जा रहा है? देखिए, स्कूल के अंदर शराब की बोतल, जर्जर इमारत और न बच्चे हैं, न शिक्षक.’

सिंह ने पुलिस शिकायत में बताए गए तथ्यों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘एफआईआर में इन लोगों ने लिखा कि ‘स्कूलों का विलय हो गया है’ और यह भी दावा किया कि कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया. मेरा सवाल है कि जब वहां कोई कर्मचारी मौजूद ही नहीं था तो अभद्र व्यवहार किसके साथ किया गया? आपने कहा था कि कोई स्कूल बंद या विलय नहीं होगा, फिर इस स्कूल का विलय कैसे हो गया?’

हाथरस

हाथरस में नौली लालपुर स्थित एक सरकारी स्कूल को लेकर कथित रूप से भ्रामक सूचना प्रसारित करने के आरोप में कुलदीप यादव नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.

यादव पर आरोप है कि उन्होंने स्कूल के एक जर्जर और इस्तेमाल में न आने वाले हिस्से का वीडियो बनाकर संस्थान की नकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की.

स्थानीय शिक्षा विभाग के अधिकारी विजय चौहान ने बताया कि नौली लालपुर गांव में एक समेकित विद्यालय संचालित होता है. हालांकि, मथुरा-बरेली राजमार्ग के निर्माण के दौरान स्कूल की पुरानी इमारत का एक हिस्सा प्रभावित हुआ था.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम ने उस हिस्से को ध्वस्त कर दूसरी जगह उसका निर्माण कराया, जबकि पुराने परिसर का कुछ हिस्सा अब भी उसी स्थिति में है.

चौहान ने कहा, ‘बरसात के मौसम में उस हिस्से का इस्तेमाल नहीं किया जाता और बाकी परिसर में कक्षाएं संचालित होती हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के कारण स्कूल की सीमा दीवार का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवारा पशु परिसर में आकर गंदगी फैलाते हैं. पुराने हिस्से की जमीन नीची हो गई है, जिससे वहां जलभराव होता है. इन सभी चीजों की मरम्मत के लिए उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है.’

उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों की पढ़ाई अच्छी सुविधाओं वाले हिस्से में हो रही है और वहां नए शौचालय भी बनाए गए हैं.

अमेठी

अमेठी में सिंहपुर ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में निर्धारित स्कूल समय समाप्त होने के बाद प्रवेश करने के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

स्कूल के प्रधानाचार्य ने शिकायत में आरोप लगाया कि संबंधित लोगों ने स्कूल को गैर-कार्यरत या बंद दिखाने की कोशिश की, जो उनके अनुसार ‘पूरी तरह गलत और भ्रामक’ है.

(उमर राशिद स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

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