नई दिल्ली: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) ने स्वीकार किया है कि इस साल मार्च में आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ था. आयोग ने अब यह परीक्षा दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है.
एमपीएससी की ओर से प्रश्नपत्र लीक होने की यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय में आई है, जब कुछ ही दिन पहले आयोग ने दावा किया था कि उक्त परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एमपीएससी के एक वरिष्ठ अधिकारी समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है.
ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक नहीं होने का दावा करने के कुछ दिनों बाद अब महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग ने स्वीकार किया है कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था और परीक्षा दोबारा आयोजित करने का फैसला किया है. मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एमपीएससी का एक अवर सचिव स्तर का वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने दावा किया है कि एफडीए इंस्पेक्टर की परीक्षा पास करने वाली एक महिला रुतुजा पाटिल ने प्रश्नपत्र पाने के लिए अधिकारियों को पैसे देने को लेकर अपने बॉयफ्रेंड गौरव पाटिल से 5 लाख रुपये जुटाने को कहा था. पुलिस के मुताबिक, गौरव ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए पैसे देने से इनकार कर दिया.
पुलिस का कहना है कि इसके बाद रुतुजा के पिता अमृत पाटिल ने पैसों का इंतजाम किया. रुतुजा फिलहाल फरार है, जबकि अमृत पाटिल पुलिस हिरासत में हैं.
इस बीच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को कहा कि एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी व्यक्ति हो या किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो.
उन्होंने कहा, ‘सख्त कार्रवाई हो रही है और होती रहेगी.’ फडणवीस ने जोड़ा कि पुलिस के अनुसार बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था, बल्कि इसे केवल एक व्यक्ति तक पहुंचाया गया था. इसके बावजूद एहतियात के तौर पर एमपीएससी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने परीक्षाओं के आयोजन में सुधारों की सिफारिश करने के लिए एक समिति गठित की है और एमपीएससी को भी आंतरिक सुधार करने के लिए कहा गया है.
हमलावर विपक्ष, कहा- एमपीएससी के अध्यक्ष और सचिव दें इस्तीफ़ा
सार्वजनिक परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधा है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के नेता रोहित पवार ने कहा, ‘हम ही लगातार कहते आ रहे थे कि एमपीएससी का पेपर लीक हुआ है. अब एमपीएससी ने आखिरकार स्वीकार कर लिया है कि पेपर लीक हुआ था. एमपीएससी के अध्यक्ष और सचिव को इस्तीफा देना चाहिए. हम चाहते हैं कि परीक्षाएं ऑफलाइन माध्यम से आयोजित की जाएं और एमपीएससी के प्रमुख पद पर साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति को नियुक्त किया जाए.’
पवार ने दावा किया कि 2023 से अब तक राज्य में आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के कम से कम 15 प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आबकारी विभाग की आंतरिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र भी लीक हुए हैं.
इससे पहले जून में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का प्रश्नपत्र भी लीक पाया गया था.
रोहित पवार ने कहा, ‘हमें उचित जांच की जरूरत है और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए. इस प्रश्नपत्र लीक में कई लोग शामिल थे. परीक्षा में शामिल हुए छात्रों की ओर से हमें प्रश्नपत्र लीक होने से जुड़े कुछ नए सबूत दिए जा रहे हैं. हम इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं.’
उन्होंने आरोप लगाया कि एमपीएससी यह दावा करके मामले को कम गंभीर दिखाने की कोशिश कर रहा है कि प्रश्नपत्र केवल एक व्यक्ति को लीक किया गया था.
एनसीपी (एसपी) नेता ने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक होने का दायरा काफी व्यापक था और लीक हुए प्रश्नपत्रों को ‘शुरुआत में 10-12 लाख रुपये में बेचा गया और बाद में प्रति प्रश्नपत्र 40 लाख रुपये तक में बेचा गया.’
