नई दिल्ली: हिंसा प्रभावित मणिपुर में गुरुवार (27 अगस्त) सुबह अज्ञात बंदूकधारियों ने चार नगा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी है.
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने इस हमले के लिए कुछ कुकी सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया है, हालांकि अब तक किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.
यूएनसी ने हमले की निंदा करते हुए इसे ‘बर्बर और सुनियोजित’ बताया. संगठन ने कहा कि यह घटना ‘शांति, भारत-नगा शांति प्रक्रिया और हमारी पैतृक भूमि पर नगाओं के अस्तित्व के लिए सीधी चुनौती’ है.
परिषद ने नगा समुदाय से सतर्क रहने और ‘ऐसे बाहरी खतरों’ के खिलाफ एकजुट रहने की अपील की है.
अख़बार के मुताबिक, यह हमला मणिपुर के कांगपोकपी जिले में माकुई अशांग और थानाम्बा नगा गांवों के बीच हुआ.
यूएनसी ने मृतकों की पहचान ताडसोंगबौ रिंगकंगमाई, मारियाकदिबौ विजुनामाई, अनिल विजुनामाई और विसोबौ चारेनामाई के रूप में की है.
संगठन के अनुसार, हमले में गाइकामंग रिंगकंगमाई नाम का एक व्यक्ति घायल हुए हैं, जबकि जापौ एमके नाम के एक अन्य व्यक्ति लापता हैं.
यूएनसी ने इस हमले के लिए कुकी नेशनल फ्रंट (केएनएफ), केएनएफ (प्रेसिडेंशियल) और कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी को जिम्मेदार ठहराया है. इन समूहों ने वर्ष 2008 में केंद्र सरकार के साथ ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
यूएनसी ने इस घटना को ‘सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तरह विफलता’ बताया और मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की.
इस घटना के बाद सेनापति जिले में लोगों ने बंद रखा. वहीं, यूएनसी ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए शुक्रवार (28 अगस्त) को मणिपुर के नगा-बहुल इलाकों में एक दिवसीय ‘गेन्ना’ मनाने की घोषणा की है.
गौरतलब है कि ‘गेन्ना’ नगा समुदाय की एक पारंपरिक प्रथा है, जिसके तहत निषेध, विश्राम और सामुदायिक पूजा का पालन किया जाता है.
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने भी हमले की निंदा की है. दोनों ने इसे ‘फ़िज़ूल हिंसा’ करार देते हुए कहा कि यह घटना राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के सामूहिक प्रयासों पर प्रहार है.
जारी है सूबे में तनाव
तीन साल से जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में तनाव लगातार जारी है. यह ताज़ा घटनाक्रम ज़िले में महीनों से चल रही हिंसक अशांति के बीच हुआ है, जहां सुरक्षा की नाज़ुक स्थिति और गहरे होते जातीय मतभेदों ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को अनिश्चित और जोखिम भरा बना दिया है.
बीते 11 अगस्त को ही कांगपोकपी ज़िले में ही चम्फाई इलाके में स्थित तोपका नगा गांव में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें लगभग दस घरों और एक चर्च को आग लगा दी गई थी.
इससे पहले 10 अगस्त को सेनापति ज़िले के कैलेनजंग गांव में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कुकी गांव के कम से कम पांच खाली घरों में आग लगा दी थी.
ज्ञात हो कि राज्य में मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव मई 2023 में हिंसा में बदल गया था. इसके बाद से हुई हिंसा में नागरिकों तथा राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कर्मियों सहित 290 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं.
दोनों समुदाय अभी भी एक-दूसरे से भौतिक रूप से अलग हैं और उनके बीच ‘बफर ज़ोन’ बने हुए हैं, जहां सुरक्षा बल गश्त करते हैं.
इस साल फरवरी में राज्य में एक और जगह कुकी और नगा समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें दोनों समुदायों के सदस्य मारे गए, बंधक बनाए गए और उनके घर जला दिए गए.
