नई दिल्ली: सिक्किम के दो प्रमुख जातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था सिक्किम भूटिया लेप्चा एपेक्स कमेटी (एसआईबीएलएसी) ने केंद्र सरकार से नेपाल में हाल में आई भीषण बाढ़ से सबक लेते हुए राज्य में प्रस्तावित और आगामी जलविद्युत परियोजनाओं को रोकने की मांग की है.
संगठन ने सिक्किम में पहले से चल रही जलविद्युत परियोजनाओं की भी स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है.
उल्लेखनीय है कि नेपाल में हालिया आपदा के बाद जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर यह मांग उठी है.
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, भूकंप के कारण तिब्बत में बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन हुआ, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में स्थित कम से कम 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है.
तिब्बत के ग्यिरोंग बंदरगाह क्षेत्र में हुए भूस्खलन के बाद पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर आया. इससे अचानक बाढ़ आई, जिसमें सड़क और ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढांचा बह गया तथा कई गांव प्रभावित हुए हैं.
मालूम हो कि प्रभावित परियोजनाओं में रासुवा जिले में स्थित 111 मेगावाट का रसुवागढ़ी जलविद्युत संयंत्र भी शामिल है. रासुवा जिले में बुधवार सुबह सबसे पहले बाढ़ आने की खबर सामने आई थी.
एसआईबीएलएसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिक्किम में नई जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाने और राज्य में पहले से संचालित परियोजनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की अपील की है.
एसआईबीएलएसी के संयोजक और भाजपा की सिक्किम इकाई के मुख्य सलाहकार त्सेतन ताशी भूटिया ने कहा कि नेपाल की आपदा हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को सामने लाती है और विकास गतिविधियों का नए सिरे से आकलन करने की जरूरत है.
उन्होंने कहा, ‘नेपाल की आपदा हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर करती है, जिसके मद्देनजर विकास गतिविधियों का नए सिरे से आकलन जरूरी है.’
उन्होंने केंद्र सरकार से सिक्किम की नदियों पर आगे जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने की अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करने को कहा है.
भूटिया ने सिक्किम की सभी मौजूदा और प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं की पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक, भूकंपीय, सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की स्वतंत्र और व्यापक समीक्षा की मांग की है.
उन्होंने इस समीक्षा के नतीजों को सार्वजनिक करने के लिए सरकार से एक श्वेतपत्र जारी करने को भी कहा है.
सिक्किम में पहले हो चुकी है बड़ी तबाही
गौरतलब है कि सिक्किम में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी आपदा को लेकर यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है.
इससे पहले अक्टूबर 2023 में ग्लेशियल झील के फटने से आई बाढ़ ने चुंगथांग स्थित 1,200 मेगावाट की तीस्ता-III जलविद्युत परियोजना को भारी नुकसान पहुंचाया था. बाढ़ में तीस्ता नदी के निचले हिस्से में स्थित बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी व्यापक क्षति हुई थी.
इस बीच, नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ और फिर भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 हो गई है, जबकि क़रीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में 320 भारतीय नागरिक लापता हैं और अब तक 84 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है. इस बीच बाढ़ के बाद तिब्बत में एक झील बन गई है. चीन को आशंका है कि अगर यह झील अचानक टूटती है तो दोबारा बड़ी बाढ़ आ सकती है.
