मणिपुर: कांगपोकपी में हुई फायरिंग में तीन नागरिकों की मौत, चार घायल; कम से कम 30 घर जलाए गए

कांगपोकपी ज़िले के कुकी गांव में सोमवार को संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में तीन नागरिकों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए. इसी ज़िले के तीन नगा गांवों में मंगलवार तड़के अज्ञात हथियारबंद लोगों ने हमला किया और कम से कम 30 घरों को आग लगाई और कई वाहन व अन्य संपत्तियां क्षतिग्रस्त कर दिया.

मणिपुर हिंसा के दौरान जलाया गया एक घर. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर में जारी हिंसा और जातीय संघर्ष के बीच सोमवार (31 अगस्त) को कांगपोकपी जिले के एक पहाड़ी गांव में कथित तौर पर संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा की गई गोलीबारी में तीन नागरिकों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए.

इसके अलावा मंगलवार को अज्ञात हथियारबंद लोगों ने मणिपुर के कांगपोकपी जिले में इंफाल-तामेंगलोंग रोड पर स्थित तीन लियांगमाई नगा गांवों पर हमला किया. इस हमले में कम से कम 30 घर जला दिए गए और एक ग्रामीण घायल हो गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को हमला सुबह करीब 9:30 बजे कुकी बहुल जिले के टी. वाइचोंग उप-मंडल के अंतर्गत आने वाले एन. तेइखांग गांव में हुआ. बताया जा रहा है कि हमलावर अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे.

मारे गए तीन लोगों की पहचान टिंगनेइचिन ल्हौवुम (40), होइनेनेंग ल्हौजेम (21) और लामतिनथांग ल्हौजेम (35) के रूप में हुई है.

घायलों की पहचान नेमनेइचोंग ल्हौजेम (50), सेलुन ल्हौजेम (70), देइलहिंग हाओकिप (55) और कामतिनसेई चोंगलोई (38) के रूप में की गई है.

अधिकारियों का यह भी दावा है कि हमलावरों ने हमले के दौरान कई घरों में आग लगा दी और दूसरे समुदाय से जुड़े सशस्त्र समूहों के साथ भारी गोलीबारी भी की.

जनगणना को लेकर जारी जातीय मतभेदों के बीच हुई इस घटना की ज़िले के कुकी नागरिक समाज संगठनों ने कड़ी निंदा की है.

कांगपोकपी स्थित कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) ने मंगलवार (1 सितंबर) सुबह 5 बजे से राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर 24 घंटे के पूर्ण बंद का ऐलान किया. यह राजमार्ग इंफाल को दीमापुर से जोड़ता है.

सीओटीयू के अनुसार, बंद के दौरान शैक्षणिक संस्थानों, चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाओं, बैंकिंग और बिजली विभाग को छूट दी गई है.

इस बीच, ट्विलांग एरिया कुकी सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशंस वर्किंग कमेटी ने हत्याओं की निंदा करते हुए इसे ‘बिना उकसावे के किया गया बर्बर हमला’ बताया है.

समिति ने राज्य प्रशासन से अपील की कि घायलों को सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंचाने के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षा और प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती की जाए.

समिति ने आरोप लगाया कि करीब 50 ‘भारी हथियारों से लैस’ लोगों ने नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की और इसी दौरान कई घरों में आग लगा दी.

नगा गांवों पर हमला

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कांगपोकपी पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार सुबह करीब 4 बजे हुई, जिसमें अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कांगपोकपी जिले के तीन गांवों – तापोन खुलेन, तापोन खुनौ और माकुई पिपुरम – पर हमला किया.

पुलिस के अनुसार, आगजनी की इस घटना में कम से कम 30 घर और कई वाहन व अन्य संपत्तियां क्षतिग्रस्त पाई गईं. कांगपोकपी पुलिस ने अखबार को बताया कि क्षतिग्रस्त घरों और संपत्तियों की सही संख्या का अभी पता लगाया जाना बाकी है.

असम ट्रिब्यून के अनुसार, मकुई विलेज अथॉरिटी ने एक बयान जारी कर कहा कि हथियारबंद लोगों ने कथित तौर पर सुबह करीब 4 बजे पिपुरम नगा गांव पर हमला किया, गोलीबारी की और फिर घरों में आग लगा दी. इसके बाद हमलावर मुख्य माकुई नगा गांव की ओर बढ़े, जहां गोलीबारी जारी रही. इस घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया.

अथॉरिटी ने आरोप लगाया कि इन लगातार हमलों का मकसद लियांगमेई नगाओं को इंफाल-तामेंगलोंग रोड इलाके से खदेड़ना और उनकी पुश्तैनी ज़मीन पर कब्ज़ा करना है. उन्होंने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की.

13 मई से अब तक कुकी-ज़ो और नगा समुदायों के 17 लोग अलग-अलग घटनाओं में मारे जा चुके हैं.

27 अगस्त को हुए घात लगाकर किए गए हमले में चार नगा नागरिकों की मौत हो गई थी, जबकि 31 अगस्त को हुए हमले में मणिपुर के कांगपोकपी और तामेंगलोंग जिलों में इंफाल-तामेंगलोंग रोड के आसपास के इलाके में तीन कुकी नागरिकों की मौत हुई थी.

एनआरसी और जनगणना को लेकर तनाव के बीच हमला

यह ताजा हमला ऐसे समय हुआ है जब कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (जेएफडी) ने मंगलवार (1 सितंबर) को 24 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया है. संगठन की मांग है कि जनगणना 2027 से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अपडेट किया जाए. इस हड़ताल के कारण कम से कम पांच जिलों में सामान्य जनजीवन और सार्वजनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं.

एनआरसी की मांग को लेकर मेईतेई और नगा नागरिक समाज संगठनों तथा कुकी नागरिक समाज संगठनों के बीच मतभेद हैं.

मेईतेई और नगा संगठनों की एनआरसी की मांग का कुकी नागरिक समाज संगठनों ने विरोध किया है. उनका कहना है कि इस कवायद का इस्तेमाल कुछ समुदायों को मताधिकार से वंचित करने या उन्हें बाहर करने के लिए किया जा सकता है.

जारी है सूबे में तनाव

तीन साल से जातीय संघर्ष से जूझ रहे मणिपुर में तनाव लगातार जारी है. यह ताज़ा घटनाक्रम ज़िले में महीनों से चल रही हिंसक अशांति के बीच हुआ है, जहां सुरक्षा की नाज़ुक स्थिति और गहरे होते जातीय मतभेदों ने रोज़मर्रा की ज़िंदगी को अनिश्चित और जोखिम भरा बना दिया है.

बीते सप्ताह 27 अगस्त को कांगपोकपी ज़िले में ही अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा चार नगा नागरिकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यूनाइटेड नगा काउंसिल ने इस हमले के लिए कुकी सशस्त्र समूहों को ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसे शांति और भारत-नगा शांति प्रक्रिया के लिए ‘सीधी चुनौती’ बताया था.

इससे पहले 11 अगस्त को ही कांगपोकपी ज़िले में के ही चम्फाई इलाके में स्थित तोपका नगा गांव में हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें लगभग दस घरों और एक चर्च को आग लगा दी गई थी.

इससे पहले 10 अगस्त को सेनापति ज़िले के कैलेनजंग गांव में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने कुकी गांव के कम से कम पांच खाली घरों में आग लगा दी थी.

ज्ञात हो कि राज्य में मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव मई 2023 में हिंसा में बदल गया था. वहीं, इस वर्ष फरवरी से कुकी और नगा समुदायों के बीच संघर्ष जारी है. आरटीआई के जरिए प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल तक 43,000 से अधिक विस्थापित लोग राहत शिविरों में रह रहे थे.

फरवरी में राज्य में एक और जगह कुकी और नगा समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें दोनों समुदायों के सदस्य मारे गए, बंधक बनाए गए और उनके घर जला दिए गए.

मेईतेई और कुकी, दोनों समुदाय अभी भी एक-दूसरे से भौतिक रूप से अलग हैं और उनके बीच ‘बफर ज़ोन’ बने हुए हैं, जहां सुरक्षा बल गश्त करते हैं.