गुजरात: केंद्रीय विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सुरक्षा पर सेमिनार में आरएसएस नेता मुख्य अतिथि, छात्रों ने सवाल उठाए

केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात में 3-4 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र-निर्माण पर दो दिवसीय सेमिनार हो रहा है, जिसमें आरएसएस के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी मुख्य अतिथि हैं. छात्रों ने उनके चयन की अकादमिक योग्यता पर सवाल उठाए हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन और एबीवीपी ने जोशी के आमंत्रण का बचाव किया है.

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सेमिनार के उद्घाटन सत्र को लेकर जारी किया गया पोस्टर. बीच में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी. (फोटो: एक्स/@PROCUG1)

नई दिल्ली: केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात (सीयूजी) के स्कूल ऑफ नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज की ओर से 3 और 4 सितंबर को ‘यूथ, नेशन बिल्डिंग एंड नेशनल सिक्योरिटी अवेयरनेस: रोल ऑफ हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस इन इंडिया’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जा रहा है.

सेमिनार में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी को आमंत्रित किया गया है. विश्वविद्यालय के इस फैसले पर उनके ही कुछ छात्र सवाल उठा रहे हैं.

छात्र पूछ रहे हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन जैसे अकादमिक विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में किसी राजनीतिक-वैचारिक संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित करने का अकादमिक आधार क्या है?

हालांकि, सेमिनार के सह-संयोजक डॉ. सौरभ कुमार इस सवाल पर ही आपत्ति जताते हैं.

द वायर हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘यह सवाल क्यों नहीं किया जा रहा कि भैयाजी जोशी क्यों नहीं हो?’

इस बारे में सीयूजी के पीआरओ सुनील कुमार से भी बात की गई, उन्होंने केवल इतना कहा कि यह निर्णय यूनिवर्सिटी लेती है, उसी ने लिया है. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विश्वविद्यालय के भीतर इस निर्णय को किस अधिकारी, विभाग या समिति ने लिया.

विश्वविद्यालय द्वारा सार्वजनिक की गई जानकारी के मुताबिक, जोशी के अलावा अलावा कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के कुलपति (कार्यवाहक) प्रो. अतनु भट्टाचार्य, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के कुलपति प्रो. भालचंद्र महादेव भनगे, पूर्व इसरो वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश पांडेय, एडीजी बिमल मोंगा, वडोदरा के पुलिस आयुक्त नरसिम्हा कोमर, लेफ्टिनेंट जनरल असित मिस्त्री, मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के वरिष्ठ फेलो डॉ. उत्तम सिन्हा और अन्य को वक्ता के तौर पर शामिल किया गया है.

सेमिनार को लेकर सीयूजी द्वारा जारी किया गया पोस्टर.

छात्रों का सवाल- भैयाजी जोशी ही मुख्य अतिथि क्यों?

छात्रों की ओर से उठाए गए सवालों का केंद्र यह है कि विश्वविद्यालय के पास राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए रक्षा विशेषज्ञों, सैन्य अधिकारियों, राजनयिकों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और सार्वजनिक बौद्धिकों समेत कई विकल्प मौजूद हैं, ऐसे में आरएसएस के पूर्व सरकार्यवाह को इस विषय पर आयोजित कार्यक्रम का मुख्य अतिथि चुनने के पीछे विश्वविद्यालय का अकादमिक तर्क क्या है.

विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ गांधियन थॉट एंड पीस स्टडीज़ से पीएचडी कर रहे सचिन यादव ने द वायर हिंदी से बातचीत में सवाल उठाया, ‘आरएसएस से जुड़े व्यक्ति को किसी सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थान के अकादमिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर क्यों बुलाया गया? राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन से जुड़े एक महत्वपूर्ण सेमिनार में जोशी को किस शैक्षणिक या पेशेवर आधार पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है?’

छात्रों का सवाल है कि जोशी को इस सेमिनार में राष्ट्रीय सुरक्षा के विद्वान, सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ या सार्वजनिक बुद्धिजीवी के रूप में आमंत्रित किया गया है, या आरएसएस के वरिष्ठ संगठनात्मक और वैचारिक प्रतिनिधि के तौर पर?

ज्ञात हो कि जोशी ने कला विषय से स्नातक हैं और 1975 में आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने थे. वह 2009 से 2021 तक आरएसएस के सरकार्यवाह रहे.

इसलिए छात्रों का मूल सवाल यह नहीं है कि किसी गैर-अकादमिक व्यक्ति को विश्वविद्यालय में बोलने क्यों बुलाया गया, बल्कि यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के एक अकादमिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उनके चयन के लिए विश्वविद्यालय ने उनकी कौन-सी विशेषज्ञता को प्रासंगिक माना.

सीयूजी में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई की अध्यक्ष हेफ्सिबा स्कारिया ने कहा कि छात्रों की आपत्ति सुरेश भैयाजी जोशी के आरएसएस से जुड़े होने को लेकर नहीं है.

उन्होंने जोड़ा कि छात्रों का मूल सवाल यह है कि स्कूल ऑफ सिक्योरिटी स्टडीज द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम में बोलने के लिए जोशी की क्या योग्यता है.

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कार्यक्रम का विषय केवल सामान्य ‘राष्ट्रीय एकता’ नहीं, बल्कि ‘यूथ, नेशन बिल्डिंग एंड नेशनल सिक्योरिटी अवेयरनेस’ तथा उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका है.

सचिन ने बताया कि छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस आमंत्रण के पीछे के अकादमिक आधार और तर्क को स्पष्ट करने की मांग की है. उन्होंने बताया कि छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा है.

एबीवीपी ने जोशी को मुख्य अतिथि बनाए जाने का बचाव किया

उधर, सीयूजी की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) इकाई ने जोशी को मुख्य अतिथि बनाए जाने का समर्थन किया है.

एबीवीपी के सीयूजी इकाई मंत्री और डिपार्टमेंट ऑफ गांधियन थॉट एंड पीस स्टडीज़ से पीएचडी कर रहे सत्यम कुमार राय ने द वायर हिंदी को भेजे गए बयान में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषय पर चर्चा का विरोध करना एनएसयूआई की ‘देश-विरोधी मानसिकता’ को दर्शाता है.

हालांकि, एबीवीपी का यह बचाव उस सवाल से अलग है जिसे छात्रों ने उठाया है. छात्रों ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा या जोशी को विश्वविद्यालय में आमंत्रित किए जाने का विरोध नहीं किया है. उनकी आपत्ति विशेष तौर पर इस बात को लेकर है कि स्कूल ऑफ नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस अकादमिक कार्यक्रम में जोशी को मुख्य अतिथि बनाने के पीछे उनकी कौन-सी शैक्षणिक या पेशेवर विशेषज्ञता को आधार बनाया गया है.

लेकिन एबीवीपी ने इस सवाल का जवाब देने के बजाए जोशी को ‘विद्वान व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि उन्हें सामाजिक कार्यों का लंबा अनुभव है और इससे पहले एनएसई, आईआईटी, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा गुजरात विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों में विभिन्न विषयों पर विचार रखने के लिए आमंत्रित किया जाता रहा है.

एबीवीपी ने यह स्पष्ट नहीं किया कला विषय से स्नातक भैयाजी जोशी नेशनल सिक्योरिटी जैसे विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर के अकादमिक सेमिनार में किस ‘विद्वता’ के आधार पर बोलेंगे?

एबीवीपी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का दायित्व है और इसलिए विद्यार्थियों के बीच इस विषय पर संवाद प्रासंगिक है.

एबीवीपी ने यह भी कहा कि जोशी इस कार्यक्रम में आमंत्रित 19 अतिथियों में से एक हैं, जिनमें लेफ्टिनेंट जनरल, कुलपति और एडीजी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं. उसके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर पूरे अकादमिक आयोजन और संस्थान की गरिमा पर सवाल उठाना एनएसयूआई के ‘वैचारिक दिवालियेपन’ को दर्शाता है.

‘भैयाजी जोशी क्यों नहीं हो?’

सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी को मुख्य अतिथि बनाए जाने के निर्णय को लेकर सवाल पूछे जाने पर सेमिनार के सह-संयोजक डॉ. सौरभ कुमार ने इस सवाल पर ही आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, ‘यह सवाल क्यों नहीं किया जा रहा कि भैयाजी जोशी क्यों नहीं हो?’

उन्होंने मुख्य अतिथि के चयन की प्रक्रिया या यह निर्णय किस अधिकारी, विभाग या समिति ने लिया, इस पर सीधे कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने इस संबंध में विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) से बात करने को कहा.

विश्वविद्यालय के पीआरओ सुनील कुमार ने द वायर हिंदी से बातचीत में कहा कि भैयाजी जोशी दो दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे और युवाओं तथा राष्ट्र-निर्माण से जुड़े मुद्दों पर बात करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि जोशी का सेमिनार के मुख्य विषय पर अलग से कोई संबोधन नहीं होगा.

सुनील कुमार ने कहा कि छात्रों को संभवतः यह जानकारी मिली है कि भैयाजी जोशी पूरे सेमिनार के विषय पर संबोधित करेंगे, जबकि ऐसा नहीं है. उनके मुताबिक, उद्घाटन सत्र के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और उससे जुड़े अलग-अलग विषयों पर विशेषज्ञों के अलग-अलग सत्र होंगे.

उन्होंने कहा कि सेमिनार में वडोदरा के पुलिस कमिश्नर, एक एडीजी, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और एक एयर मार्शल समेत करीब 15 से 20 विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं. उनके अनुसार, इन विशेषज्ञों के जरिए राष्ट्रीय सुरक्षा और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी.

हालांकि, जब पीआरओ से पूछा गया कि भैयाजी जोशी को ही मुख्य अतिथि बनाने का निर्णय किसने लिया और इसके पीछे क्या अकादमिक आधार था, तो उन्होंने कहा, ‘डिसीजन होते हैं तो यूनिवर्सिटी डिसीजन लेती है.’ उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विश्वविद्यालय के भीतर यह निर्णय किस अधिकारी, विभाग या समिति ने लिया था.

यहां छात्रों की आपत्ति और विश्वविद्यालय के जवाब के बीच एक महत्वपूर्ण फर्क सामने आता है. छात्रों का सवाल यह नहीं है कि जोशी पूरे सेमिनार के सभी सत्रों को संबोधित करेंगे या नहीं, बल्कि यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन के स्कूल द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन सत्र में उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर चुनने के पीछे अकादमिक आधार क्या था.

विश्वविद्यालय ने अभी तक इस चयन के लिए किसी विशिष्ट अकादमिक या पेशेवर योग्यता का उल्लेख नहीं किया है.