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आचार संहिता के उल्लंघन पर चुनाव आयोग ने रेल और नागर विमानन मंत्रालय को भेजा नोटिस

रेलवे के पेपर टिकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था वहीं एयर इंडिया ने मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की तस्वीर वाले बोर्डिंग पास जारी किए थे. चुनाव आयोग ने दोनों मंत्रालयों से आज जवाब देने को कहा है.

फोटो: पीटीआई

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नई दिल्ली: 10 मार्च को देश में आचार संहिता लागू होने के बावजूद रेलवे टिकट और एयर इंडिया बोर्डिंग पास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर इस्तेमाल करने को लेकर चुनाव आयोग ने शनिवार को रेल मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय को नोटिस भेजा है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, चुनाव आयोग ने दोनों मंत्रालयों से आज जवाब देने को कहा है.

सरकारी विज्ञापन का उल्लंघन का करते हुए पेपर टिकट पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर पर आयोग ने 27 मार्च को रेलवे से जवाब मांगा था. वहीं भारी आलोचना के बाद 25 मार्च को एयर इंडिया ने मोदी और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की तस्वीर वाले बोर्डिंग पास को वापस ले लिया था.

वहीं शुक्रवार को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस के यात्रियों को ऐसे कप में चाय दी गई जिस पर भाजपा के चुनावी अभियान का नारा मैं भी चौकीदार छपा हुआ था. वे कप एक गैर सरकारी संगठन की ओर से प्रायोजित थे.

उन कपों पर देश को आतंकवाद से बचाने और सैनिकों का सम्मान करने जैसे संदेश भी छपे थे. उन पर एनजीओ संकल्प सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष राजीव मित्तल और एक अन्य एनजीओ उत्थान सेवा संस्थान का लोगो लगा हुआ था.

इसके लिए रेलवे को सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा जिसके बाद उसने कप वापस ले लिया और ठेकेदार को दंडित किया. यात्रियों ने दावा किया है कि उन्हें इन कपों में दो बार चाय परोसी गई थी.

आईआरसीटीसी के एक प्रवक्ता ने बताया, ‘उन खबरों की जांच की गई जिनमें कहा गया कि ‘मैं भी चौकीदार’ लेबल वाले कपों में चाय दी गई. यह आईआरसीटीसी की बिना पूर्व मंजूरी के किया गया. सुपरवाइजर/पैंट्री प्रभारियों से ड्यूटी में लापरवाही बरतने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है.’

उन्होंने कहा, ‘सेवा प्रदाता पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इस कदाचार के लिए सेवा प्रदाता को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है.’

10 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के तत्काल बाद चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव, राज्य के मुख्य सचिवों और सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे केंद्र और राज्य सरकारों के सभी आधिकारिक वेबसाइटों से किसी भी मंत्री, राजनेता या राजनीतिक पार्टी का संदर्भ हटा दें.

इसके साथ ही सार्वजनिक धन की कीमत पर मौजूदा सरकार की उपलब्धियों को उजागर करने वाले प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों पर भी चुनाव के अंत तक रोक लगा दी थी.