इंडिगो संकट: मुनाफ़े के लिए नियमों की कुर्बानी, सरकार की दोहरी भूमिका और पूंजीवाद की बेरुखी

दिसंबर 2025 का इंडिगो संकट अनियंत्रित पूंजीवाद, डुओपॉली और नियामक विफलता का प्रतीक बन गया. उड़ान रद्द होने से लेकर 400 प्रतिशत तक किराया बढ़ने तक, इस संकट ने दिखाया कि भारतीय विमानन में नागरिक नहीं, मुनाफ़ा केंद्र में है, और सरकार कॉरपोरेट हितों की साझेदार बन चुकी है.

नए लेबर कोड्स: ‘सुधार’ के नाम पर श्रमिक अधिकारों का दमन और कॉरपोरेट हितों को वैधता

'सुधार' और 'सरलीकरण' के नाम पर एक ऐसा तंत्र खड़ा किया गया है, जो दशकों पुराने श्रमिक संघर्षों और उनकी सुरक्षा के अधिकारों को ताक में रखकर पूंजीपतियों की सुविधाओं को प्राथमिकता देता है. श्रम सुधारों का यह स्वरूप कारोबार के ऐसे माहौल का निर्माण कर रहा है जहां कॉरपोरेट हित सर्वोपरि हैं, और श्रमिकों की जायज़ मांगों की अनदेखी की जा रही है.