‘कविता क्या है’ और आचार्य रामचंद्र शुक्ल: एक कालजयी निबंध की गाथा

स्वतंत्रता दिवस सिर्फ़ 1947 को स्मरण करने का अवसर नहीं है. आज आप स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आकार ले रही अपनी भाषा और उसकी कालजयी रचनाओं के इतिहास को भी याद कर सकते हैं. व्योमेश शुक्ल के इस शोधपरक निबंध को आप आचार्य रामचंद्र शुक्ल की महान कृति ‘कविता क्या है?’ की जीवनी की तरह भी पढ़ सकते हैं.

क्या प्रेमचंद वाक़ई तुलसीदास के विलोम थे?

हिंदी की वैचारिकी अमूमन प्रेमचंद और तुलसीदास के बीच एक द्वैध स्थापित करती है, दोनों मूर्धन्यों को दो विपरीत किनारों पर ठहरा देती है. लेकिन क्या वाक़ई ऐसा था? प्रेमचंद उन्हें हिंदी का सर्वश्रेष्ठ कवि कहते थे. अगर तुलसीदास के प्रति प्रेमचंद के दृष्टिकोण को देखें तो स्थिति शायद कहीं जटिल नज़र आती है. पढ़िए कवि-गद्यकार व्योमेश शुक्ल का प्रेमचंद पर एक और मारक लेख.

प्रेमचंद जयंती विशेष: बनारस के प्रेमचंदेश्वर महादेव

बनारस में प्रेमचंद के अनेक संस्मरण हैं. कहीं वे नेहरू से बौद्धिक विमर्श कर रहे हैं, तो कहीं उन्हें महादेव का स्वरूप मान कर पूजा जा रहा है. उनकी जयंती पर पढ़ें इन रंगों और दृश्यों से रचा गया काशी के प्रतिनिधि स्वर व्योमेश शुक्ल का यह लेख.

प्रेमचंद की ‘सबसे पुरानी हिंदी हस्तलिपि’ नागरीप्रचारिणी सभा के दस्तावेज़ों में मिली

नागरीप्रचारिणी सभा को हाल ही प्रेमचंद की दो कालजयी कहानियों, ‘पंच परमेश्वर’ और ‘ईश्वरीय न्याय’, की दुर्लभ पांडुलिपियां मिली हैं. ये हस्तलेख ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशन के लिए भेजे गए थे. यह खोज हिंदी साहित्य के अभिलेखागार का एक महत्वपूर्ण हासिल है.