मीडिया

बुली बाई ऐप का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा को बढ़ावा देना है: पत्रकार संघ

दिल्ली पत्रकार संघ और इंडियन वीमेंस प्रेस कॉर्प्स ने ऐप के ज़रिये मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाए जाने पर रोष जताते हुए कहा कि अगर पुलिस ने कुख्यात ‘सुल्ली डील’ के दोषियों की पहचान कर ली होती, तो यह घटना दोहराई नहीं जाती.

‘बुली बाई’ साइट के ज़रिये मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें एक बार फिर ‘नीलामी’ के लिए पोस्ट की गईं

पिछले साल जुलाई महीने में ‘सुली डील्स’ नामक ऐप पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरें ‘ऑनलाइन नीलामी’ के लिए पोस्ट की गई थीं. इस संबंध में दिल्ली और नोएडा पुलिस ने अलग-अलग एफ़आईआर दर्ज की गई थी. हालांकि अब तक इसके ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कोई महत्वपूर्ण कार्रवाई नहीं की गई है. ‘बुली बाई’ पोर्टल मामले में भी केस दर्ज किया जा चुका है.

मीडिया को न्यायपालिका पर विश्वास करना चाहिएः सीजेआई एनवी रमना

मुंबई प्रेस क्लब द्वारा डिजिटल माध्यम से आयोजित ‘रेड इंक अवॉर्ड्स’ समारोह में चीफ जस्टिस एनवी रमना ने ख़बरों में वैचारिक पूर्वाग्रह मिलाने की प्रवृत्ति को लेकर कहा कि तथ्यात्मक रिपोर्ट्स में रायशुमारी से बचना चाहिए. पत्रकार, जजों की तरह ही होते हैं. उन्हें अपनी विचारधारा और आस्था से परे बिना किसी से प्रभावित हुए केवल तथ्यों को बताना चाहिए और सच्ची तस्वीर पेश करनी चाहिए.

साल 2021 में दुनियाभर में 45 पत्रकारों की हत्या हुई: रिपोर्ट

इंटरनेशनल प्रेस इंस्टिट्यूट के मुताबिक़, इस सूची में लगातार दूसरी बार मेक्सिको पहले नंबर पर है, जहां इस साल सात पत्रकारों की हत्या की गई. इसके बाद भारत और अफ़ग़ानिस्तान हैं, जहां छह-छह पत्रकारों को मारा गया.

द वायर की रिपोर्ट के लिए धीरज मिश्रा, सीमी पाशा को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पत्रकारिता अवॉर्ड

साल 2019 के लिए गवर्नेंस और पॉलिटिक्स श्रेणी में क्रमशः ‘डिजिटल मीडिया’ और ‘ब्रॉडकास्ट मीडिया’ वर्ग में द वायर हिंदी के रिपोर्टर धीरज मिश्रा और स्वतंत्र पत्रकार सीमी पाशा को प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार दिया गया है. चार साल के सफर में द वायर हिंदी के रिपोर्टर को मिला यह दूसरा रामनाथ गोयनका अवॉर्ड है.

असमः अख़बारों का मुख्यमंत्री के परिवार के कथित ज़मीन घोटाले के ज़िक्र वाला लेख छापने से इनकार

द वायर और द क्रॉसकरेंट ने एक रिपोर्ट में बताया था कि असम में ज़रूरतमंदों के लिए चिह्नित ज़मीन किस तरह मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनी के पास पहुंची थी. इस मुद्दे का ज़िक्र करते हुए साहित्य अकादमी से सम्मानित लेखक हीरेन गोहेन ने एक लेख लिखा था, जिसे राज्य के तीन अख़बारों ने प्रकाशित करने से मना कर दिया.

भाजपा ने त्रिपुरा हिंसा को कम करके दिखाया, ‘स्वाभाविक’ प्रतिक्रिया कहकर सही ठहराया: रिपोर्ट

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा गठित फैक्ट फाइंडिंग टीम ने त्रिपुरा पुलिस और प्रशासन पर हिंसा से निपटने में ‘ईमानदारी की कमी’ प्रदर्शित करने का आरोप लगाया है. टीम की रिपोर्ट में कहा गया कि यह दिखाने के लिए बड़ी कॉन्सपिरेसी थ्योरी तैयार की गई कि सांप्रदायिक हिंसा को उजागर करने वाली स्वतंत्र पत्रकारिता एक चुनी गई सरकार को ‘राज्य के दुश्मनों द्वारा कमज़ोर करने’ का एक प्रयास है.

कुछ लोगों के लिए सोशल मीडिया उनकी निरंकुश भावनाओं के लिए अनियंत्रित ‘खेल का मैदान’ है: कोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की. इस पूर्व न्यायिक अधिकारी ने प्राचीन वस्तुओं के एक स्वयंभू विक्रेता के ख़िलाफ़ जांच के सिलसिले में न्यायालय के आदेशों के बारे में अमर्यादित और कटु टिप्पणी की थी.

दिल्ली: सुरेश चव्हाणके ने दिलाई ‘हिंदू राष्ट्र के लिए लड़ने, मरने-मारने’ की शपथ

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सुदर्शन टीवी के एडिटर इन चीफ सुरेश चव्हाणके दिल्ली में 19 दिसंबर को आयोजित हिंदू युवा वाहिनी के एक कार्यक्रम में यह शपथ दिलाते नज़र आ रहे हैं.

प्रेस क्लब ने संसद में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर लगे प्रतिबधों को हटाने का आग्रह किया

पिछले वर्ष कोविड-19 फैलने के बाद से संसद सत्र के दौरान प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बहुत सीमित संख्या में पत्रकारों, फोटो पत्रकारों, कैमरामैन को संसद परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है. दूसरी ओर कर्नाटक विधानसभा में प्रवेश पर लगे कथित प्रतिबंध के ख़िलाफ़ मीडियाकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन किया है.

नए आईटी नियमों के तहत 20 ‘भारत विरोधी’ यूट्यूब चैनल और दो वेबसाइट ब्लॉक

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि ये चैनल और वेबसाइट ‘पाकिस्तान से संचालित एक समन्वित दुष्प्रचार नेटवर्क’ से संबंधित हैं तथा ‘भारत से संबंधित विभिन्न संवेदनशील विषयों के बारे में फ़र्ज़ी ख़बरें फैला रहे हैं.’

पंजाब लिंचिंगः अख़बारों के संपादकीय में उठी प्रशासन से स्पष्ट प्रतिक्रिया की मांग

अंग्रेज़ी के प्रमुख अख़बारों ने पंजाब में ‘बेअदबी’ की घटनाओं पर प्रकाशित संपादकीयों को नेताओं द्वारा मॉब लिंचिग की घटना की निंदा न किए जाने पर केंद्रित किया है. इनमें कहा गया कि यह चुप्पी चुनावों से पहले मतदाताओं के एक वर्ग को नाराज़ नहीं करने के उद्देश्य से है.

पेगासस जासूसी रिपोर्ट के लिए द वायर को ‘एमएक्सएम इंडिया मीडियापर्सन ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ मिला

द वायर ने अपनी कई रिपोर्ट्स में बताया था कि किस तरह इज़राइल स्थित एनएसओ ग्रुप द्वारा निर्मित मिलिट्री ग्रेड स्पायवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर भारत के पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, राजनेताओं और सिविल समाज के सदस्यों को निशाना बनाया गया है.

मीडिया परिदृश्य से खोजी पत्रकारिता गायब हो रही है: चीफ जस्टिस रमना

पेशेवर करिअर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में करने वाले चीफ जस्टिस एनवी रमना ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पूर्व में हमने घोटालों और कदाचार को लेकर अख़बारों की रिपोर्ट देखी हैं, जिनसे हलचल पैदा हुई हैं, लेकिन हाल के सालों में बेमुश्किल एक या दो को छोड़कर इस तरह की कोई खोजी रिपोर्ट याद नहीं आती. 

मणिपुर: सरकारी विज्ञापनों के बकाये को लेकर मीडिया संस्थानों की कामबंदी का ऐलान

एडिटर्स गिल्ड मणिपुर और मणिपुर हिल्स जर्नलिस्ट्स यूनियन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकारी विज्ञापनों के बिलों का भुगतान नहीं करने पर विरोधस्वरूप 16 दिसंबर को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर कोई न्यूज़ बुलेटिन या बहस का कार्यक्रम नहीं होगा, जबकि 17 दिसंबर को प्रिंट मीडिया कोई प्रकाशन नहीं करेगा.