जहां एक ओर दिल्ली की रोहिणी ज़िला अदालत ने चार पत्रकारों पर अडानी समूह संबंधी ख़बरों के प्रकाशन पर रोक लगाने के एकतरफ़ा आदेश को रद्द किया, वहीं इसी आदेश को चुनौती देने वाली पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता की याचिका पर इसी कोर्ट के अन्य जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
बीते 13 सितंबर को कोच्चि में पत्रकार और कार्यकर्ताओं ने मई महीने में महाराष्ट्र एटीएस द्वारा गिरफ़्तार पत्रकार रेज़ाज एम. शीबा सिदीक़ की रिहाई की मांग करते हुए बैठक की थी. अब केरल पुलिस ने आयोजकों और वक्ताओं के ख़िलाफ़ अवैध जमावड़ा और पुलिस कर्तव्य में बाधा जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज की है.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दो मीडिया संस्थानों और कई यूट्यूब चैनलों को नोटिस भेजकर अडानी समूह का उल्लेख करने वाले कुल 138 वीडियो और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने का आदेश दिया है. यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर मानहानि के एक मामले में 6 सितंबर को दिल्ली ज़िला अदालत द्वारा जारी एकपक्षीय आदेश पर आधारित हैं.
पिछले वर्षों में हिंदी पत्रकारिता अमूमन यूट्यूब और वायरल वीडियो तक सिमट गई है. ज़मीनी पत्रकार की जगह 'सेलेब्रिटी एंकर' ने ली है. क्या यूट्यूब के भड़काऊ मोनोलॉग खोजी पत्रकारिता का गला घोंट रहे हैं? हिंदी के प्रख्यात नाम वीडियो तक क्यों सिमट गए हैं? उन्होंने गद्य का रास्ता क्यों त्याग दिया है?
इस विषय पर द वायर हिंदी की परिचर्चा.
अटॉर्नी जनरल ने आईटी मंत्रालय की इस व्याख्या का समर्थन किया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट आरटीआई कानून को कमजोर नहीं करता. पत्रकार संगठनों और विपक्ष ने संशोधन पर आपत्ति जताई है, जबकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव भ्रष्टाचार और जनहित मामलों से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच को सीमित करेगा.
कॉमनवेल्थ ह्यूमनराइट्स इनिशिएटिव, कॉमनवेल्थ पत्रकार संघ और कॉमनवेल्थ वकील संघ द्वारा प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि 56 राष्ट्रमंडल सदस्य देशों में से कई में राष्ट्रीय क़ानून प्रेस की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से बाधित करते हैं और अभिव्यक्ति की आज़ादी के अधिकार को अनुचित रूप से प्रतिबंधित करते हैं.
लखनऊ की अदालत ने टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का आदेश दिया है. पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की याचिका में आरोप है कि 14 अगस्त को प्रसारित आज तक का कार्यक्रम विभाजनकारी, भड़काऊ और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ था, जो दो समुदायों में दुश्मनी पैदा करने का प्रयास करता है.
संकर्षण ठाकुर का जाना सिर्फ़ एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि उन शब्दों का मौन हो जाना है जो समाज की गंध और सच्चाई को पकड़ते थे. पटना की मिट्टी से निकले इस पत्रकार ने कश्मीर से बिहार तक कथाओं को दर्ज किया. उनका लेखन पत्रकारिता के लिए अमिट धरोहर है.
भारत के दिग्गज पत्रकार और लेखक संकर्षण ठाकुर का लंबी बीमारी के बाद 63 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. द टेलीग्राफ के संपादक ठाकुर ने बिहार और कश्मीर समेत कई अहम विषयों पर गहरी रिपोर्टिंग की. नेताओं और पत्रकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए निडर, संवेदनशील और लोकतांत्रिक भारत का मज़बूत पैरोकार बताया है.
नगालैंड के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वाई. पैटन बीते सप्ताह हॉर्नबिल टीवी के रिपोर्टर दीप सैकिया को एक जनसभा में सरेआम डांटा और धमकाया था. अब मणिपुर के सेनापति ज़िले में उन पर गोली चलाई गई. उनकी हालत स्थिर है, लेकिन गोली अभी भी उनके शरीर में फंसी हुई है.
नगालैंड के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यंथुंगो पैटन ने एक जनसभा में हॉर्नबिल टीवी के रिपोर्टर को अपने सामने बैठने से मना करते हुए कहा कि वे उनके सवाल 'बर्दाश्त नहीं करेंगे'. फिर सरेआम कुछ लोगों से उन्हें इलाके से खदेड़ने के लिए कहा. स्थानीय पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने मंत्री के कृत्य की निंदा की है.
दक्षिणी गाज़ा के नासिर अस्पताल पर सोमवार को इज़रायली मिसाइलों के हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जिनमें पांच पत्रकार भी शामिल हैं. इसी महीने हुए एक हमले में गाज़ा में ही कई मीडियाकर्मी मारे गए थे, जिनमें से पांच अल जज़ीरा के लिए काम करते थे. उस समय इज़रायल ने दावा किया था कि वे हमास से जुड़े थे.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प्स ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्राइवेसी कानून में पत्रकारों को छूट, डेटा सुरक्षा, आरटीआई संशोधन, स्रोत की सुरक्षा, सहमति, और न्यूज़रूम स्वतंत्रता समेत 35 सवाल मंत्रालय को भेजे हैं. यह सवाल क़ानून के जनहित पत्रकारिता पर संभावित असर और सुरक्षा उपायों पर केंद्रित हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, सलाहकार संपादक करण थापर और सभी कर्मचारियों को बीएनएस की धारा 152 के तहत गुवाहाटी पुलिस द्वारा दर्ज केस में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया है. तीन महीनों में असम पुलिस द्वारा संस्थान के ख़िलाफ़ राजद्रोह क़ानून के तहत दर्ज किया गया दूसरा ऐसा मामला है.
असम सरकार द्वारा द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और इससे जुड़े पत्रकारों के ख़िलाफ़ राजद्रोह क़ानून के इस्तेमाल को लेकर पत्रकारों ने आक्रोश जताया है. कई अख़बारों ने अपने संपादकीय में इसे प्रेस की आज़ादी पर अंकुश लगाने के लिए सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग बताया है.