समाज

ग्राउंड रिपोर्ट: एक नागरिक की हत्या और बिना शौचालय, बिना पानी चल रहे स्वच्छता अभियान की कहानी

खुले में शौच कर रहीं महिलाओं की फोटो लेने का विरोध करने पर पीट पीटकर मार दिए गए ज़फ़र हुसैन के गांव का हाल.

भीड़ द्वारा हत्याओं को मीडिया बढ़ा-चढ़ा कर दिखाता है: गृह सचिव

केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने कहा कि नफ़रत को लेकर होने वाला अपराध देश में नया नहीं है और इस तरह की घटनाओं को खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बढ़ा​​​​-चढ़ा कर दिखाता है.

आवारा भीड़ के ख़तरे

यह भीड़ फासिस्टों का हथियार बन सकती है. हमारे देश में यह भीड़ बढ़ रही है. इसका उपयोग भी हो रहा है. आगे इस भीड़ का उपयोग सारे राष्ट्रीय और मानव मूल्यों के विनाश के लिए, लोकतंत्र के नाश के लिए करवाया जा सकता है.

‘भीड़ मेरे बेटे को निगल गई, कल किसी और के बेटे को निगल लेगी’

2014 में पुणे में 24 वर्षीय मोहसिन शेख़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्या का आरोप हिंदू राष्ट्र सेना के कार्यकर्ताओं पर लगा था. मोहसिन के पिता सादिक़ कहते हैं, ‘भीड़ द्वारा आस्था का झंडा उठाकर यह जो हत्या करने का काम है, उसपर लगाम लगना ज़रूरी है.’

सहारनपुर और मुज़फ़्फ़रनगर में क्यों धर्मपरिवर्तन कर रहे हैं दलित?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ ​इलाक़ों में दलित समुदाय धर्म परिवर्तन करके बौद्ध धर्म अपना रहे हैं. दलितों के ख़िलाफ़ जातीय हिंसा न रोक पाने की सरकार की विफलता को लेकर दलित समुदाय में ग़ुस्सा है.

…और छात्राओं ने भूख हड़ताल करके हासिल किया स्कूल

हरियाणा में गोठड़ा और राजगढ़ गांव में पिछले महीने तमाम छात्राएं गांव के स्कूल को बारहवीं तक करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठीं. अंतत: सरकार ने उनकी मांग मान ली.

यूपी: बलात्कारियों को पकड़ने के एवज में पुलिसकर्मी ने पीड़िता से की संबंध बनाने की मांग

सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई इस महिला का कहना है कि पुलिसकर्मी की अनुचित मांगें न मानने पर उसने मामले को बंद करने के लिए क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है.

शाहबानो का गला घोंटा गया तब सेकुलरिज़्म ख़तरे में नहीं आया था?

अब तक तीन तलाक़, हलाला, मुता निक़ाह जैसी कुप्रथाएं चली आ रही हैं. उनके ख़िलाफ़ आपने कभी आवाज़ नहीं उठाई. जब प्रताड़ित मुस्लिम औरतें ख़ुद बाहर निकलीं तो सेक्यु​लरिज़्म याद आ रहा है!

ट्रेलर में ‘इंटरकोर्स’ सुनकर भड़के निहलानी, उठाएंगे कड़े कदम

इम्तियाज़ अली की आने वाली फिल्म जब हैरी मेट सेजल के डायलॉग प्रोमो में ‘इंटरकोर्स’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए सेंसर बोर्ड अध्यक्ष ने ट्रेलर टीवी पर दिखाए जाने पर क़ानूनी कदम उठाने की बात कही है.

योग के शोर के बीच महर्षि पतंजलि की जन्मभूमि उपेक्षा की शिकार है

जब पूरे देश में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी चल रही है, योग सूत्र और महाभाष्य के प्रणेता महर्षि पतंजति की जन्मभूमि को कोई पूछने वाला नहीं है. उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के कोंडर गांव में स्थित पतंजलि की जन्मभूमि उपेक्षा की शिकार है.

‘मैं मैला ढोता हूं लेकिन मैला ढोने वाले के रूप में मरूंगा नहीं’

टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान से पीएचडी करने वाले सुनील यादव दिन में पढ़ाई करते हैं और रात में सफ़ाई कर्मचारी का काम करते हैं. वे डॉ. अंबेडकर को अपना आदर्श और पढ़ाई को बदलाव का औज़ार मानते हैं.

क्यों वीरेंद्र सहवाग फूहड़ता के सुल्तान बनते जा रहे हैं?

वीरेंद्र सहवाग अभी चढ़ाई पर हैं क्योंकि उनकी फूहड़ता को ऑडियंस मिल रही है. उनको जितनी ऑडियंस मिलेगी वो और फूहड़ होते जाएंगे. आगे चल कर आपको बीवी-देवर वाले जोक्स भी देखने को मिल सकते हैं.

हिंदी साहित्य: कहां गई आलोचना, कहां गए आलोचक

आलोचना जगत पर हिंदी के अध्यापकों का कब्ज़ा है लेकिन ये अध्यापक सिर्फ भाषणबाजी कर रहे हैं. दुनिया भर में अच्छी आलोचना अकादमिक संस्थानों में विकसित होती है पर हमारे विश्वविद्यालयों के हिंदी विभागों में क्या हो रहा है, ये किसी से छिपा नहीं है.