कुंभ में गिद्धों को लाशों और सूअरों को गंदगियों की 'सौगातें' किसकी कृपा से मिलीं? वह सरकार, जिसने भगदड़ के शिकार हुए निर्दोष श्रद्धालुओं की लाशों को देखकर भी नहीं देखा, वह क्यों ज़िम्मेदार नहीं है? क्या प्रदेश की सत्ता विपक्ष चला रहा है जो वह सारा ठीकरा उसके सिर पर फोड़कर बच निकलेगी?
दिल्ली चुनाव 2025
→द वायर इन्वेस्टिगेशन
→वीडियो
→सभी ख़बरें
सरकार ऐसी सोशल मीडिया गतिविधियों पर नज़र रख रही हैं, जिसका उद्देश्य ग़लत सूचना और अफ़वाह फैलाकर ‘अग्निपथ’ विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के लिए भीड़ को जुटाना है. केंद्र ने दशकों पुरानी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करते हुए थलसेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती संबंधी अग्निपथ योजना की घोषणा की है, जिसके तहत भर्ती सिर्फ चार साल की कम अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी.
नूपुर शर्मा उन्हें सिखाए गए तरीके से ही खेल रही थीं. अतीत में उन्हें या भाजपा की ओर से बोलने वाले उनके किसी भी सहकर्मी को कभी भी हिंसक मुस्लिम विरोधी टिप्पणियों के लिए फटकार नहीं मिली. असल में तो ऐसा लगता है कि यह पार्टी के शीर्ष नेताओं की नज़र में आने का बढ़िया तरीका रहा है.
दिल्ली महिला आयोग ने इंडियन बैंक को नोटिस जारी करके उससे अपने इस दिशा-निर्देश को वापस लेने को कहा है, जिसके तहत तीन माह या उससे अधिक समय की गर्भवती महिलाओं को नौकरी के लिए अस्थायी रूप से अयोग्य क़रार दिया गया है. इससे पहले जनवरी में भारतीय स्टेट बैंक ने ऐसे ही नियम लागू किए थे. हालांकि विरोध के बाद उसे वापस ले लिया गया था.
असम के नगांव ज़िले में बाढ़ में फंसे लोगों की मदद करने के लिए गए कामपुर पुलिस थाने के प्रभारी समेत दो पुलिसकर्मी पानी के तेज़ बहाव में बह गए. उनके शव सोमवार को बरामद किए गए. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बारपेटा सबसे अधिक प्रभावित ज़िला है, जहां 12.76 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, इसके बाद दरांग में लगभग 3.94 लाख लोग और नगांव में 3.64 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी मंदार विधानसभा सीट पर उपचुनाव प्रचार के लिए झारखंड आए थे. इस दौरान रांची हवाईअड्डे पर पहुंचने पर कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह उसकी छवि को ख़राब करने की कोशिश है.
अगर मोदी सरकार हर साल दो करोड़ नौकरियां देने के 2014 के लोकसभा चुनाव के अपने वादे पर ईमानदारी से अमल करती, तो इन आठ सालों में सोलह करोड़ युवाओं को नौकरियां मिल चुकी होतीं! अब एक ओर बेरोज़गारी बेलगाम होकर एक के बाद एक नए कीर्तिमान बना रही है, दूसरी ओर उसके प्रति सरकार की ‘गंभीरता’ का आलम यह है कि समझ में नहीं आता कि उसे लेकर सिर पीटा जाए या छाती.
संपर्क करें

