जब विश्वविद्यालयों को राजनीति से मुक्त करने की मांग तेज़ है, तब सुभाष चंद्र बोस की विरासत एक असहज सवाल खड़ा करती है. बोस छात्रों को बदलाव का अग्रदूत मानते थे. यह लेख बताता है कि छात्र राजनीति का उनका पक्ष आज भी क्यों प्रासंगिक और ज़रूरी है.