सोशल मीडिया से गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका संबंधी डॉक्यूमेंट्री के लिंक हटाने के निर्देश

बीबीसी ने ब्रिटेन में प्रसारित ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री में कहा है कि ब्रिटिश सरकार की गोपनीय जांच में गुजरात दंगों के लिए नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार पाए गए थे. इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के अलावा कार्यकर्ता कविता कृष्णन, पत्रकार ग़ज़ाला वहाब और मिताली सरन तथा वकील प्रशांत भूषण द्वारा किए गए ट्वीट को मोदी सरकार के अनुरोध पर ट्विटर द्वारा हटा दिया गया है.

ब्रिटेन सरकार की गोपनीय जांच में गुजरात दंगों के लिए मोदी ज़िम्मेदार पाए गए थे: बीबीसी

बीबीसी ने ब्रिटेन में 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' नाम की एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की है, जिसमें बताया गया है कि ब्रिटेन सरकार द्वारा करवाई गई गुजरात दंगों की जांच (जो अब तक अप्रकाशित रही है) में नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर हिंसा के लिए ज़िम्मेदार पाया गया था.

बीबीसी पर किसी भी बाघ अभयारण्य में घुसने पर पांच साल का प्रतिबंध

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने बीबीसी और इसके दक्षिण एशिया संवाददाता जस्टिन रॉलेट पर देश के किसी भी बाघ अभयारण्य में घुसने पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है.

‘हमने कैंपस में लोकतांत्रिक गतिविधि की थी, हम माफ़ी क्यों मांगें?’

वीडियो: हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय ने कैंपस में बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने वाले दो छात्रों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया. दोनों छात्र- लोकेश चुघ और रविंदर सिंह एक साल तक कोई परीक्षा नहीं दे पाएंगे. दोनों छात्रों ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं. उनसे बातचीत.

टिस: सुप्रीम कोर्ट ने ‘देश-विरोधी’ गतिविधियों को लेकर बर्ख़ास्त दलित छात्र को बहाल करने को कहा

अप्रैल, 2024 को टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने दलित पीएचडी स्कॉलर और वाम छात्र नेता रामदास प्रिनी शिवानंदन को को ‘देश-विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में संस्थान से दो साल के लिए निलंबित कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बहाल करने का निर्देश दिया है.

महाराष्ट्र: टिस ने दलित छात्र को ‘देश-विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में दो साल के लिए निलंबित किया

मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा जारी निलंबन आदेश में पीएचडी छात्र रामदास शिवानंदन को संस्थान के सभी परिसरों से प्रतिबंधित किए जाने की बात कही गई है. संस्थान ने 7 मार्च को रामदास को भेजे एक नोटिस में दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शन में उनकी भागीदारी पर सवाल उठाया था.

क्या दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू जैसे कैंपस हिंदुत्व के प्रशिक्षण केंद्र में शेष हो जाएंगे

कुछ वक़्त पहले तक कहा जा रहा था कि विश्वविद्यालयों को राष्ट्रवादी भावना का प्रसार करना है. उस दौर में परिसर में राष्ट्रध्वज लगाना और वीरता दीवार बनाना ज़रूरी था. अब राष्ट्रवाद का चोला उतार फेंका गया है और बिना संकोच के हिंदुत्व का प्रचार किया जा रहा है.

गोदी मीडिया की चुप्पी के बीच मीम्स, चुटकुले अडानी और पुलवामा जैसे मुद्दे जनता तक पहुंचा रहे हैं

'मुख्यधारा' का मीडिया जहां चुनिंदा मसलों पर चुप्पी का रास्ता अपना रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया यह काम मुखरता से कर रहा है. जिन जटिल और महत्वपूर्ण मुद्दों को बड़े मीडिया संस्थान नज़रअंदाज़ कर देते हैं, वो अब मीम्स, वीडियो क्लिप्स की शक्ल में सरल और चुटीले स्वरूप में व्यापक दर्शकों तक पहुंच रहे हैं.

मोदी सरकार को विदेशियों द्वारा की गई तारीफ़ रास आती है, आलोचना नहीं

किसी मसाला फिल्म के एक गाने का ऑस्कर के लिए नामांकन भारतीय जनता को हर्षोन्मादित कर देता है. लेकिन, एक विदेशी चैनल द्वारा ज्ञात तथ्यों को दोहराने वाली डॉक्यूमेंट्री, जिसे भारत में दिखाया भी नहीं जाएगा, देश के ख़िलाफ़ एक साज़िश हो जाती है.

सरकार द्वारा प्रयोग किए जा रहे नए आईटी नियमों पर संसद की विधान समितियों ने चर्चा नहीं की

सरकार ने नए आईटी नियमों को फरवरी 2021 में अधिसूचित किया था. आम तौर पर ऐसे नियमों को चर्चा व बहस के लिए 15 दिनों के भीतर संसद में पेश किया जाना चाहिए. एक आरटीआई अर्ज़ी के जवाब में सामने आया है कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे इन नियमों पर लोकसभा और राज्यसभा की अधीनस्थ विधान समितियों ने चर्चा नहीं की थी.

विज्ञान पुरस्कार: प्रमुख वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिक सलाहकार को पत्र लिख विजेताओं के चयन पर सवाल उठाए

अगस्त 2024 के आखिर में प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के एक समूह ने भारत के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद को पत्र लिखकर 'विज्ञान युवा शांति स्वरूप भटनागर (एसएसबी) पुरस्कार 2024' पाने वालों के चयन में अपनाई गई प्रक्रियाओं पर संदेह जताया था.

साल 2023 में भाजपा की नीतियों के कारण भारत में हिंसा और अधिकारों का हनन हुआ: ह्यूमन राइट्स वॉच

मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में भाजपा सरकार के कार्यकाल में भेदभावपूर्ण और विभाजनकारी नीतियों के कारण अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ हिंसा में बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट में धार्मिक और अन्य अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण प्रथाओं को उजागर करते हुए कई घटनाओं को सूचीबद्ध किया गया है.

वाजपेयी सरकार ने ब्रिटिश रिपोर्ट में गुजरात दंगों को पूर्व नियोजित बताने का विरोध नहीं किया था

एक्सक्लूसिव: 2002 के गुजरात दंगों पर उसी साल ब्रिटिश राजनयिकों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में दंगों को पूर्व नियोजित बताते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. तब इस रिपोर्ट के लीक होने पर विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह ने ब्रिटिश विदेश सचिव से बात की थी, पर रिपोर्ट के निष्कर्षों का विरोध नहीं किया था.

भारत में लोकतंत्र की गिरावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा

जो लोग यक़ीन करते हैं कि भारत अब भी एक लोकतंत्र है, उनको बीते कुछ महीनों में मणिपुर से लेकर मुज़फ़्फ़रनगर तक हुई घटनाओं पर नज़र डालनी चाहिए. चेतावनियों का वक़्त ख़त्म हो चुका है और हम अपने अवाम के एक हिस्से से उतने ही ख़ौफ़ज़दा हैं जितना अपने नेताओं से.