अब कूटनीति का दायरा केवल देशों तक सीमित नहीं रहा, अब उसमें 'छवि-सुरक्षा' का नया आयाम जुड़ गया था. विदेश नीति को अनौपचारिक रूप से दो भागों में बांट दिया गया था, पहला, दुनिया के देशों से संबंध बेहतर बनाए रखना. दूसरा, दुनिया को यह विश्वास दिलाते रहना कि कोई असुविधाजनक प्रश्न वास्तव में असुविधाजनक था ही नहीं.
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बीते दिनों कश्मीर के बारे में ‘विटनेस’ नाम की एक किताब आई है. तस्वीरों के बहाने ये किताब कश्मीर के 30 सालों के घटनाक्रमों को बयां करती है.
चुनावी नारों की भारत की राजनीति में बड़ी भूमिका रही है. जुमलेबाजी के इस दौर में एक निगाह डालते हैं उन नारों पर जो नेता से लेकर जनता के बीच काफी चर्चित रहे.
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अपूर्वानंद से द वायर हिंदी के कार्यकारी संपादक बृजेश सिंह से बातचीत.
‘जन की बात’ की पांचवीं कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ कर रहे है हिंदू-मुस्लिम बिजली, कब्रिस्तान-श्मशान और जोधपुर विश्वविद्यालय में मचे घमासान की चर्चा.
वे मुझे मार डालेंगे, मुझे थप्पड़ मार देना’, 'मुझे लात मार कर सत्ता से हटा देना’, 'मुझे फांसी पर चढ़ा देना’, 'मुझे उलटा लटका देना’, 'मुझे चौराहे पर जूते मारना’.... ये सब मोदी क्यों बोलते हैं?
पिछले कुछ सालों में उर्दू की दुनिया में रेख़्ता ने अलग मक़ाम हासिल किया है, उर्दू की हज़ारों क़िताबें, लाखों शेर और शायरों के काम को संजोया है. रेख़्ता फाउंडेशन के संस्थापक संजीव सराफ से बातचीत
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