पश्चिम बंगाल में छात्र आंदोलन की सशक्त परंपरा की जड़ें स्वाधीनता संग्राम तक जाती हैं, पर आज़ादी के बाद जब विदेशी औपनिवेशिक शासन का स्थान स्वदेशी लोकतांत्रिक सरकार ने ले लिया, छात्रों के समक्ष चुनौतियां बदल गईं. यहां छात्र राजनीति की एक विशेषता यह भी रही है कि वह केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही; खाद्यान्न संकट, श्रम अधिकार, किसानों का शोषण, अंतरराष्ट्रीय राजनीति- ये सभी छात्र आंदोलनों का हिस्सा बने.
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अरुणाचल प्रदेश के तवांग पर चीन अपना दावा जताता रहा है और जम्मू-कश्मीर के अक्साई चिन पर भारत का दावा है. ऐसे में तवांग और अक्साई चिन की अदला-बदली को लेकर बीते दिनों एक पूर्व शीर्ष चीनी वार्ताकार की टिप्पणी काफ़ी कुछ कहती है.
आफ्स्पा के ख़िलाफ़ जब इरोम की लड़ाई शुरू हुई तब मणिपुर के हालात अलग तरह के थे. 16 साल पहले का मणिपुर अब काफी बदल चुका है.
सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके राजनीतिक समर्थन हासिल करने में मिली भाजपा की कामयाबी को अगर शासन के आदर्श के तौर पर स्वीकार कर लिया जाता है, तो आनेवाला समय देश के लिए अंधकारमय हो सकता है.
जो ये मानते हैं कि होली सिर्फ हिंदुओं का त्योहार है वो होली के दिन पुराने लखनऊ जाकर देख लें. पहचानना मुश्किल हो जाएगा रंग में डूबा कौन-सा चेहरा हिंदू है कौन-सा मुसलमान.
बहुमत के लिए 21 सीटों की जरूरत, भाजपा का दावा 22 विधायक हैं सर्मथन में
लोकतंत्र में हर पल अपने समाज और वोटरों के बारे में सोचते रहना पड़ता है, लेकिन दुखद यह है कि उत्तर भारत के सामाजिक न्याय के सभी बड़े नेता सिर्फ अपने परिवार और रिश्तेदार के बारे में सोचते हैं, उन जनता के बारे में नहीं जिनके वोट से ये मसीहा बने थे.
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