अर्थशास्त्री

इशर जज अहलूवालिया. (फोटो: पीटीआई)

प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. इशर जज अहलूवालिया का निधन

पद्म भूषण डॉ. इशर जज अहलूवालिया साल 2005 से अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों पर भारतीय अनुसंधान परिषद (इक्रियर) की अध्यक्ष थीं. हालांकि ख़राब स्वास्थ्य की वजह से पिछले महीने उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

108 अर्थशास्त्रियों ने सरकारी आंकड़ों में राजनीतिक दख़ल पर चिंता जताई

देश-विदेश की शीर्ष वित्तीय संस्थाओं से जुड़े अर्थशास्त्रियों ने कहा कि वित्तीय आंकड़े नीतियां बनाने और जनता की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए ज़रूरी है कि इन आंकड़ों को इकठ्ठा और प्रसारित करने वाली संस्थाएं राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार न हों और इनकी विश्वसनीयता बनी रहे.

Narendra Modi Gita Gopinath PTI Twitter

जब हार्वर्ड की गीता हार्डवर्क वाले मोदी से मिलेंगी, तो बैकग्राउंड में नोटबंदी के भाषण बजेंगे!

नरेंद्र मोदी ने कम से कम एक ऐसा आर्थिक समाज तो बना दिया है जो नतीजे से नहीं नीयत से मूल्यांकन करता है. मूर्खता की ऐसी आर्थिक जीत कब देखी गई है? गीता गोपीनाथ जैसी अर्थशास्त्री को नीयत का डेटा लेकर अपना नया शोध करना चाहिए.

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अर्थशास्त्रियों ने वित्त मंत्री से की सामाजिक सुरक्षा पेंशन और मातृत्व भत्ता बढ़ाने की मांग

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि बीते साल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गयी घोषणा के बावजूद मातृत्व भत्ता देने के लिए बनी प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना अब तक लागू नहीं हुई है.

अर्थशास्त्री और कार्यकर्ता ज्यां द्रेज. (फोटो: द वायर)

गुजरात किसी भी पैमाने पर कोई मॉडल नहीं है: अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज

मनरेगा का मसौदा तैयार करने वाले अर्थशास्त्री ने कहा, आप विकास सूचकों की किसी भी रैंकिंग, गरीबी सूचकांक देखिए, गुजरात लगभग हमेशा बीच के आसपास ही रहा है.

New Delhi : Former RBI Governer Raghuram Rajan speaking to PTI during an interview in New Delhi on Thuirsday. PTI Photo by Shirish Shete(PTI9_7_2017_000117B)

भारत असहिष्णु समाज बनने का ख़तरा मोल नहीं ले सकता: रघुराम राजन

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. कहा- सहिष्णुता भारत की ताक़त है, इसे गंवाना नहीं चाहिए.

Arvind Panagadhiya PTI

लगा था कि पनगढ़िया दो रोटी कम खा लेंगे लेकिन राष्ट्र निर्माण में लगे मोदी को छोड़कर नहीं जाएंगे

जल्दी रिटायर करने और पेंशन ख़त्म करने की नीतियों के समर्थक पनगढ़िया जी 65 साल की उम्र में स्थायी नौकरी की तलाश करते रहे.