आंदोलन

लाल बहादुर वर्मा: जीवन प्रवाह में बहते एक इतिहासकार का जाना…

स्मृति शेष: लाल बहादुर वर्मा इतिहास की आंदोलनकारी और विचारधर्मी भूमिका के समर्थक थे. वे किताब से ज़्यादा इंसानों में विश्वास करते थे. केवल बैठे रहकर वे किसी बदलाव की उम्मीद नहीं करते थे, वे भारत के हर लड़ते हुए मनुष्य के साथ खड़े थे.

विचार से खड़ा हुआ आंदोलन ऐसे ही ख़त्म नहीं होगा: राकेश टिकैत

वीडियो: किसान आंदोलन के सौ दिन पूरे होने और इसे आगे ले जाने की रणनीति पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से विशाल जायसवाल की बातचीत.

कृषि क़ानून: हरियाणा सरकार ने कहा, दिल्ली से सटी सीमाओं पर विभिन्न कारणों से 68 लोगों की मौत हुई

दो कांग्रेस विधायकों द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने विधानसभा में कहा कि अब तक हरियाणा से मृत प्रदर्शनकारियों के परिजनों को नौकरी और वित्तीय सहायता देने के लिए राज्य सरकार के विचारार्थ कोई प्रस्ताव नहीं है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति को पत्र लिख गिरफ़्तार किसानों की बिना शर्त रिहाई की मांग की

केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों को निरस्त किए जाने की मांग को लेकर 26 जनवरी को किसान संगठनों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर परेड के दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए थे. इसके बाद सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन के दौरान 248 किसानों की मौत हुई: संयुक्त किसान मोर्चा

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से ​दी गई जानकारी के अनुसार, अधिकतर मौतें दिल का दौरा पड़ने, ठंड की वजह से बीमारी और दुर्घटनाओं से हुई हैं. ये आंकड़े 26 नवंबर 2020 से इस साल 20 फरवरी के बीच इकट्ठा किए गए हैं.

किसान आंदोलन: प्रधानमंत्री के संबोधन से प्रदर्शनकारी किसानों को हुई निराशा

वीडियो: केंद्र के नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आंदोलनजीवी’ बयान पर रोष जताते हुए कहा कि यह किसानों का अपमान है. आंदोलनों के कारण भारत को औपनिवेशिक शासन से आज़ादी मिली और उन्हें गर्व है कि वे ‘आंदोलनजीवी’ हैं.

मोदी की ‘आंदोलनजीवी’ टिप्पणी की कड़ी आलोचना, नेताओं ने कहा- आंदोलन से ही मिली थी आज़ादी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को राज्यसभा में एक नए शब्द ‘आंदोलनजीवी’ का ज़िक्र करते हुए कहा था कि पिछले कुछ समय से देश में एक नई बिरादरी ‘आंदोलनजीवी’ सामने आई है. ये पूरी टोली है जो आंदोलनजीवी है, ये आंदोलन के बिना जी नहीं सकते और आंदोलन से जीने के लिए रास्ते ढूंढते रहते हैं.

नगालैंड: कोरोना संकट के बीच एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों में एम्बुलेंस चालक, लैब टेक्नीशियन, नर्सें, डेंटिस्ट, आयुष और एलोपैथिक डॉक्टर शामिल हैं. उनकी मांग है कि एनएचएम कर्मचारियों को नियमित करते हुए राज्य स्वास्थ्यकर्मियों के समान पद के लिए समान वेतन और सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया दी जाएं.

आंदोलनों की लहर लोकतंत्र की जड़ों को और मज़बूत बनाएगी: प्रणब मुखर्जी

देश के पहले चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन की याद में आयोजित व्याख्यान के दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र समय की कसौटी पर हर बार खरा उतरा है.

जब जेपी के जीवित रहते हुए संसद ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी…

गैरकांग्रेसवाद का सिद्धांत भले ही डाॅ. राममनोहर लोहिया ने दिया था लेकिन उसकी बिना पर कांग्रेस की केंद्र की सत्ता से पहली बेदखली 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्वावधान में ही संभव हुई.

सरदार सरोवर: सरकारी आकलन से कहीं ज़्यादा है बाढ़ और डूब के प्रभावितों की संख्या

बीते दिनों नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के पुनर्वास आयुक्‍त ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्‍वीकारा कि विस्‍थापितों और प्रभावितों के आकलन में ‘टोपो शीट’ पर पेंसिल से निशान लगाने की पद्धति का इस्‍तेमाल किया गया. बोलचाल में नजरिया सर्वे कही जाने वाली इस तरकीब में अंदाज़े से डूबने वाली हर चीज और जीती-जागती इंसानी बसाहटों को चिह्नित कर विस्‍थापित घोषित कर दिया गया था.

सरदार सरोवर: बढ़ता जलस्तर, ख़तरे में ज़िंदगियां

नई दिल्ली के जंतर मंतर पर सरदार सरोवर बांध का जलस्तर घटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने आए मध्य प्रदेश के ग्रामीणों और नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं से संतोषी मरकाम की बातचीत.

ऑस्ट्रेलिया: अडानी खनन परियोजना के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शन को कवर करने गए कई पत्रकार गिरफ़्तार

ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्वीन्सलैंड के कारमाइल कोयला खदान में खनन के लिए अडानी को जून में मंजूरी मिली थी. यहां खनन को लेकर विवाद है क्योंकि इस खदान के निकट ही ग्रेट बैरियर रीफ है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी मूंगे की चट्टानें हैं.

सबसे बड़े लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शनों की आवाज़ क्यों नहीं सुनी जाती?

विशेष रिपोर्ट: राजस्थान के कई शहरों और कस्बों में कुछ प्रदर्शन ​आठ से दस वर्षों से चल रहे हैं. इस बीच भाजपा और कांग्रेस की सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी सरकार ने इन लोगों की शिकायतों को कभी गंभीरता से नहीं लिया.