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प्रधानमंत्री मोदी को भारत को कमतर दिखाने वाले आंकड़ों पर ध्यान देने की ज़रूरत है

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अनुमान जताया था कि भारत की जीडीपी 2020 में -10.3 फीसदी रह सकती है जबकि उनके अनुमान के मुताबिक़ साल 2021 में प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ देगा.

भारत को सबसे कमज़ोर लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर प्रमुखता से ध्यान देना चाहिए: आईएमएफ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंधन निदेशक क्रिस्टिलीना जॉर्जीवा ने कहा कि भारत की प्राथमिकता सबसे कमज़ोर लोगों की सुरक्षा करने, उन्हें सहायता देने और छोटे तथा मझोले उद्योगों की रक्षा करने की होनी चाहिए, ताकि एक देश के रूप में उनकी इस महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में हार न हो.

पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन व 11 अन्य आईएमएफ की मुख्य बाहरी सलाहकार समूह में शामिल

रघुराम राजन तीन साल तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रह चुके हैं. वह अभी शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं.

कोरोना के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी में चली जाएगी: संयुक्त राष्ट्र व्यापार रिपोर्ट

व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने से विकासशील देशों के लिए गंभीर संकट पैदा होगा लेकिन चीन और भारत इससे बच सकते हैं.

कोरोना वायरस: आईएमएफ ने कहा- मंदी की चपेट में आ गई है दुनिया

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, ‘हमने 2020 और 2021 के लिए विकास की संभावनाओं का दोबारा मूल्यांकन किया है. यह साफ है कि दुनिया मंदी के दौर में पहुंच गई है जो कि 2009 या उससे भी बुरी है. हम 2021 में सुधार कर सकते हैं.’

भारत को महत्वाकांक्षी रणनीतिक, वित्तीय सुधारों की तत्काल जरूरत: आईएमएफ

आईएमएफ के प्रवक्ता गैरी राइस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा इस महीने पेश किए गए बजट के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत की आर्थिक परिस्थितियां आईएमएफ के पहले के पूर्वानुमानों की तुलना में कमजोर हैं.

वैश्विक वृद्धि के अनुमान में गिरावट के लिए 80 फीसदी भारत जिम्मेदार: आईएमएफ प्रमुख गीता गोपीनाथ

आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार 2019-20 में वैश्विक वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रहेगी. जबकि 2020 में इसमें थोड़ा सुधार आयेगा और यह 3.3 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी. उसके बाद 2021 में 3.4 प्रतिशत रहेगी.

आईएमएफ ने वैश्विक वृद्धि अनुमान घटाया, भारत की वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के अनुमान में जो कमी की गई है, वह कुछ उभरते बाजारों में खासकर भारत में आर्थिक गतिविधियों को लेकर अचंभित करने वाली नकारात्मक बातें हैं. कुछ मामलों में यह आकलन सामाजिक असंतोष के प्रभाव को भी दिखाता करता है.

भारत की अर्थव्यवस्था गंभीर सुस्ती के दौर में, तत्काल नीतिगत कदमों की जरूरत: आईएमएफ

आईएमएफ एशिया और प्रशांत विभाग में भारत के लिए मिशन प्रमुख रानिल सलगादो ने कहा कि भारत के साथ मुख्य मुद्दा अर्थव्यवस्था में सुस्ती का है. इसकी वजह वित्तीय क्षेत्र का संकट है. इसमें सुधार उतना तेज नहीं होगा जितना हमने पहले सोचा था.

बेरोज़गारी और सुस्त आर्थिक वृद्धि की वजह से खाड़ी के कई देशों में अशांति: आईएमएफ

आईएमएफ की ओर से कहा गया है कि कई अरब देशों में प्रति व्यक्ति क़र्ज़ बहुत ही ज़्यादा बढ़ गया है. यहां जीडीपी का औसतन 85 प्रतिशत क़र्ज़ है. वहीं लेबनान और सूडान में यह क़र्ज़ जीडीपी का 150 प्रतिशत से ज़्यादा पहुंच चुका है.

भारत के लिए राजकोषीय घाटे को काबू में रखना जरूरी: आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने अपनी नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2019 में 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. इससे पहले विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर छह प्रतिशत कर दिया था. वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 6.9 फीसदी रही थी.

भारत की आर्थिक विकास दर अनुमान से काफी कमज़ोर: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश की आर्थिक वृद्धि दर सात साल के न्यूनतम स्तर पर है. अप्रैल से जून तिमाही में यह सात साल के निचले स्तर 5 फीसदी आ गई है, जो बीते साल की इसी अवधि में 8 फीसदी थी.

कैसे हुआ था रिज़र्व बैंक का बंटवारा

आज़ादी के 72 साल: 1947 में देश के विभाजन के बाद रिज़र्व बैंक ने कुछ समय तक पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक की भी ज़िम्मेदारी उठाई थी, जिसने आगे जाकर कई मुश्किलें खड़ी कर दीं.

आरएसएस भारत के लिए समस्या बन सकता हैः रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि आरएसएस का संकीर्ण वैश्विक दृष्टिकोण भारत के लिए गतिरोध पैदा कर सकता है. यह देश हमारे संस्थापकों नेहरू, गांधी के विचारों और हमारे संविधान की बुनियाद पर खड़ा है.

आर्थिक और राजनीतिक प्रणाली में लोगों के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं हो रहे: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था लोगों को समान अवसर उपलब्ध नहीं करा पाई है, इसलिए ग़रीब और ग़रीब होता जा रहा है जबकि अमीर और अमीर हो रहे हैं.