उत्तराखंड की राजधानी

उत्तराखंड: तीरथ सिंह रावत ने गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने के निर्णय को बदला

उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल ने कहा कि सार्वजनिक भावनाओं को देखते हुए गैरसैंण को नई कमिश्नरी बनाने का निर्णय निलंबित कर दिया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस फैसले के लिए कई पार्टी सांसदों और मंत्रियों की असंतुष्टि के साथ भाजपा के भीतर प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था.

उत्तराखंड का दो राजधानियां बनाने का फ़ैसला कितना व्यावहारिक है?

बीते दिनों गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है. क़रीब पचास करोड़ से भी अधिक क़र्ज़ के तले दबे उत्तराखंड में जहां कर्मचारियों का वेतन भी ऋण लेकर दिया जा रहा है, वहां सरकार के दो राजधानियों को चला सकने के फ़ैसले पर सवाल उठना लाज़मी है.

उत्तराखंड: गैरसैंण होगा ग्रीष्मकालीन राजधानी, मिली राज्यपाल की मंज़ूरी

गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से ही शुरू हुई थी, जिसे लेकर बीते सालों में कई संगठनों द्वारा आंदोलन चलाए गए थे. मार्च में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की घोषणा की थी.

उत्तराखंड की भाजपा सरकार को जनता की नहीं, माफियाओं की फ़िक्र है

बेबस व लाचार लोग बिना इलाज के दम तोड़ रहे हैं. ऐसे में अगर मेडिकल की पढ़ाई का रेट एक करोड़ कर देंगे तो जिस धन पशु के पास दौलत होगी, वही पैसा देकर अपनी संतान को डॉक्टर बनाएगा. जब पर्वतीय बच्चे डॉक्टर बनने के अधिकार से वंचित कर दिए जाएंगे तो दुर्गम क्षेत्रों में बिना डॉक्टरों के जिन अस्पतालों में ताले पड़े हैं, उनमें कौन झांकने जाएगा.

उत्तराखंड: गैरसैंण को राजधानी बनाने की मांग को सरकारों ने क्यों अनसुना किया?

‘पहाड़ की राजधानी पहाड़ में’ के नारे के साथ गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने का आंदोलन एक बाद फिर तूल पकड़ता नज़र आ रहा है.