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किसान आंदोलन को देशविरोधी, आतंकी, खालिस्तानी, माओवादियों का समर्थन: गुजरात के उप-मुख्यमंत्री

गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि अगर 50,000 राष्ट्र विरोधी लोग एक साथ आकर अनुच्छेद 370 को निरस्त करने वाले क़ानून को रद्द करने की मांग करते हैं तो क्या हमें संसद से पारित इस अधिनियम को निरस्त करना होगा? अगर 50,000 लोग मांग करते हैं तो क्या हम कश्मीर को पाकिस्तान को दे देंगे?

भारत मैकार्थी के समय में है या स्टालिन के काल में?

जोसेफ मैकार्थी और स्टालिन दोनों दुनिया के दो अलग-अलग कोनों में भिन्न समयों और बिल्कुल उलट उद्देश्यों के लिए सक्रिय रहे हैं, लेकिन इनके कृत्यों से आज के भारत की तुलना करना ग़लत नहीं होगा.

जब जेपी के जीवित रहते हुए संसद ने उन्हें श्रद्धांजलि दे दी थी…

गैरकांग्रेसवाद का सिद्धांत भले ही डाॅ. राममनोहर लोहिया ने दिया था लेकिन उसकी बिना पर कांग्रेस की केंद्र की सत्ता से पहली बेदखली 1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तत्वावधान में ही संभव हुई.

तेलंगाना मुक्ति दिवस को भाजपा सांप्रदायिक रंग क्यों दे रही है?

17 सितंबर 1948 को भारतीय संघ में हैदराबाद रियासत का विलय हुआ था, जिसका एक बड़ा हिस्सा तेलंगाना है. इस विलय को अलग-अलग विचारधाराओं के लोग अलग नज़रिये से देखते हैं और उसकी व्याख्या करते हैं. भाजपा अपने सांप्रदायिक एजेंडे के तहत इसे मुसलमान शासक से हिंदू आबादी को मिली मुक्ति के रूप में चित्रित कर रही है.

‘हुक्मरां हो गए कमीने लोग, ख़ाक में मिल गए नगीने लोग’

जनता के अधिकारों के लिए सत्ता से लोहा लेने वाले हबीब जालिब ने गांव-देहात को अपने पांव से बांध लिया था और उसी पांव के ज़ख़्म पर खड़े होकर सत्ता को आईना दिखाते रहे.

कहते हैं उनको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है…

आपातकाल की चर्चा तब तक पूरी नहीं होती जब तक स्वाधीनता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की चर्चा न की जाए.

यह याद रखना चाहिए सरकार का विरोध करना अपराध नहीं है

आज के नव उग्र-राष्ट्रवादी समय में यह याद करना फ़ायदेमंद होगा कि परिपक्व राष्ट्र युद्ध के समय भी साधारण व्यक्तियों या सुपरस्टारों को भी आधिकारिक ‘लकीर’ से अलग चलने की आज़ादी देता है.