कवि

कुंवर बेचैन. (फोटो साभार: ट्विटर)

कवि कुंवर बेचैन का कोरोना संक्रमण से निधन

कवि डॉ. कुंवर बेचैन ग़ाज़ियाबाद के नेहरू नगर में रहते थे. बीते 12 अप्रैल को वह और उनकी पत्नी के कोविड-19 से संक्रमित होने का पता चला था. उनकी पत्नी का इलाज सूर्या अस्पताल में चल रहा है.

शंख घोष. (फोटो साभार: ट्विटर)

शंख घोष: हममें से कोई पूर्ण नहीं, सब आंशिक ही हैं…

स्मृति शेष: कवि भविष्य देख सकता है क्योंकि उसके पास जो सामने है उसके आवरण को चीरकर अंदर झांक पाने का साहस होता है. जो आज बंगाल को लील जाने को खड़ा है और जिसके सामने बंगाल साधनविहीन नज़र आ रहा है, वह शंख बाबू को आज से बीस वर्ष पहले ही दिख गया था.

केदारनाथ सिंह. (फोटो साभार: दूरदर्शन/यू ट्यूब)

केदारनाथ सिंह: दुनिया से मिलने को निकला एक कवि

कविता का पूरा अर्थ हासिल कर पाना और संप्रेषणीयता का प्रश्न, हर कवि को इन दो कसौटियों पर अनिवार्यतः कसा जाता था. केदारनाथ सिंह की कविता, हर खरी कविता की तरह इन दोनों के प्रलोभन से बचती थी.

गीतकार योगेश. (फोटो साभार: विकिपीडिया/लेंस नायक फोटोग्राफी)

सुप्रसिद्ध गीतकार योगेश का निधन

गीतकार योगेश ने राजेश खन्ना की फिल्म आनंद, जया भादुड़ी की फिल्म मिली, अमोल पालेकर की फिल्म रजनीगंधा, छोटी सी बात और बातों बातों में के अलावा अमिताभ बच्चन की फिल्म मंज़िल के लिए यादगार गीत लिखे थे.

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पद्मश्री से सम्मानित साहित्यकार गिरिराज किशोर का निधन

गिरिराज किशोर द्वारा लिखा गया ‘पहला गिरमिटिया’ नामक उपन्यास महात्मा गांधी के अफ्रीका प्रवास पर आधारित था, जिसने इन्हें विशेष पहचान दिलाई.

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मुंबईः सीएए पर बात कर रहे शख़्स को थाने ले जाने वाले कैब ड्राइवर को भाजपा ने सम्मानित किया

जयपुर के रहने वाले कवि बप्पादित्य बुधवार रात एक कैब में बैठने के बाद फोन पर नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर बात कर रहे थे, जिसे सुनकर कैब ड्राइवर रोहित उन्हें एंटी नेशनल बताते हुए पुलिस थाने ले गया. रोहित को मुंबई भाजपा अध्यक्ष द्वारा सतर्क नागरिक पुरस्कार दिया गया है.

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पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध बांग्ला साहित्यकार नवनीता देव सेन का निधन

कवि, उपन्यासकार, स्तंभकार और लघु कथाओं और यात्रा वृतांतों की लेखिका नवनीता देव सेन को रामायण पर उनके शोध के लिए भी जाना जाता था.

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हिंदी में छुआछूत की वही बीमारी है जो हमारे समाज में है

हिंदी दिवस पर विशेष: जितना बोझ आप बच्चों पर लाद रहे हैं डेढ़ लाख शब्दों का स्त्रीलिंग पुल्लिंग याद करने का, उतना मेहनत में बच्चा रॉकेट बना देगा.

साहित्यकार विष्णु खरे. (जन्म: 9 फरवरी 1940 - अवसान: 19 सितंबर 2018) (फोटो साभार: हिंदी कविता/यूट्यूब)

विष्णु खरे: एक सांस्कृतिक योद्धा जो आख़िर तक वैचारिक युद्ध लड़ता रहा

विष्णु खरे ने न सिर्फ एक नई तरह की भाषा और संवेदना से समकालीन हिंदी कविता को नया मिज़ाज़ दिया बल्कि उसे बदला भी. एक बड़े कवि की पहचान इस बात से भी होती है कि वह पहले से चली आ रही कविता को कितना बदलता है. और इस लिहाज़ से खरे अपनी पीढ़ी और समय के एक बड़े उदाहरण हैं.

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‘कथाओं से भरे इस देश में… मैं भी एक कथा हूं’

हिंदी साहित्य के संसार में केदारनाथ सिंह की कविता अपनी विनम्र उपस्थिति के साथ पाठक के बगल में जाकर खड़ी हो जाती है. वे अपनी कविताओं में किसी क्रांति या आंदोलन के पक्ष में बिना शोर किए मनुष्य, चींटी, कठफोड़वा या जुलाहे के पक्ष में दिखते हैं.

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केदारनाथ सिंह: वो कवि जो ‘तीसरे’ की खोज में पुलों से गुज़र गया

केदारनाथ सिंह की कविताओं में सबसे अधिक आया हुआ बिंब वह है जो ‘जोड़ता’ है. उन्हें वह हर चीज़ पसंद थी जो जोड़ती है. वो चाहे सड़क हो या पुल, शब्द हो या सड़क, जो लोगों को मिलाती है, उनकी आंखों में एक छवि बनकर तैरती रहती और फिर पिघलकर कविता में ढल जाती.

केदारनाथ सिंह. (फोटो साभार: भारतीय ज्ञानपीठ)

हिंदी के प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह का निधन

उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले में हुआ जन्म. पेट में संक्रमण की वजह से केदारनाथ सिंह को नई दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराया गया था.

कवि अदम गोंडवी (22 अक्टूबर 1947 - 18 दिसंबर 2011). (फोटो साभार: ट्विटर)

‘जितने हरामखोर थे कुर्बो-जवार में, परधान बन के आ गए अगली कतार में’

हिंदी कविता में जब कुछ बड़े कवियों की धूम मची थी, अदम गोंडवी अपने श्रोताओं और पाठकों को गांवों की उन तंग गलियों में ले गए जहां जीवन उत्पीड़न का शिकार हो रहा था.

फोटो साभार: apvaad.blogspot.in

विद्रोह और समन्वय के कवि कुंवर नारायण

कुंवर नारायण के काव्य में अवध की विद्रोही चेतना, गंगा जमुनी तहजीब, नए-पुराने के बीच समन्वय और भौतिकता व आध्यात्मिकता के बीच समन्वय की सोच विद्यमान है.