काला धन

वित्त मंत्रालय ने गोपनीयता के आधार पर भारतीयों के स्विस बैंक खातों का ब्योरा देने से मना किया

आरटीआई के तहत वित्त मंत्रालय से स्विट्जरलैंड के बैंकों में भारतीयों के खातों के बारे में मिली जानकारी का ब्योरा मांगा गया था. मंत्रालय से दूसरे देशों से काले धन के बारे में उसे मिली सूचना के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी.

स्विस बैंकों में भारतीयों के निष्क्रिय खातों का कोई दावेदार नहीं

स्विट्जरलैंड सरकार ने 2015 में निष्क्रिय खातों के ब्योरे को सार्वजनिक करना शुरू किया था, जिसमें 10 खाते भारतीयों के हैं. स्विस प्राधिकरणों के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले छह साल के दौरान इनमें से एक भी खाते पर किसी भारतीय ने सफलतापूर्वक दावा नहीं किया है.

भारत को स्विस बैंक खातों की पहली लिस्ट मिली, अगला ब्यौरा सितंबर, 2020 में

स्विट्जरलैंड द्वारा साझा की गई सूचना में पहचान, खाता और वित्तीय जानकारी शामिल है. इनमें निवासी के देश, नाम, पते और कर पहचान नंबर के साथ वित्तीय संस्थान, खाते में शेष और पूंजीगत आय का ब्यौरा दिया गया है.

स्विट्जरलैंड ने बैंकों से जुड़ी कुछ जानकारी भारत को मुहैया कराई, अधिकतर सूचनाएं बंद खातों की हैं

बैंक अधिकारियों ने कहा कि स्विट्जरलैंड की सरकार के निर्देश पर वहां के बैंकों ने डेटा इकट्ठा किया और भारत को सौंपा. इसमें हर उस खाते के लेन-देन का पूरा विवरण दिया गया है जो 2018 में एक भी दिन सक्रिय रहे हों.

साल 2018-19 में नकदी 17 फीसदी बढ़कर 21.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंची: आरबीआई

नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.74 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा चलन में थी. इस तरह नोटबंदी से पहले की तुलना में नकद राशि यानि चलन में मुद्रा में करीब 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

नोटबंदी से पहले की तुलना में करीब 22 फीसदी नकदी बढ़ी

राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक नोटबंदी से पहले चार नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में थी, लेकिन अब ये राशि बढ़कर 21.71 लाख करोड़ रुपये हो गई है.

New Delhi: Monsoon clouds hover over the Parliament House, in New Delhi on Monday, July 23, 2018.(PTI Photo/Atul Yadav) (PTI7_23_2018_000111B)

भारतीयों का विदेशों में जमा काला धन 216-490 अरब डॉलर के बीच: संसद में पेश रिपोर्ट

यह रिपोर्ट तीन आर्थिक और वित्तीय शोध संस्थानों- राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान, राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक शोध परिषद और राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंध संस्थान के अध्ययनों के आधार पर रखी गई है.

स्विस बैंक के खाताधारकों पर सख़्ती बढ़ी, करीब 50 भारतीयों को मिलेगा नोटिस

स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने मार्च से अब तक कम से कम 50 भारतीय खाताधारकों को नोटिस जारी कर उनकी सूचना भारत सरकार को देने से पहले उन्हें इसके ख़िलाफ़ अपील का एक अंतिम मौका दिया है.

स्विस बैंक में खाता रखने वाले एक और भारतीय का नाम उजागर

स्विट्ज़रलैंड ने स्विस बैंक में कथित तौर पर काला धन रखने के मामले में 28 मई को भारतीय कारोबारी पोतलुरी राजा मोहन राव को नोटिस भेजा है और उन्हें अपील करने के लिए 10 दिन का समय दिया है. इससे पहले 14 अन्य लोगों के नाम उजागर किए जा चुके हैं.

नोटबंदी से पहले की तुलना में 19.1 फीसदी बढ़ी नकदी

नोटबंदी से पहले 4 नवंबर, 2016 तक 17.97 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा प्रचलन में थी, लेकिन अब 19.44 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ ये राशि बढ़कर 21.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. यह दर्शाता है कि वित्तीय प्रणाली में नकदी वापस आ गई है.

किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे

ग्रामीण क्षेत्रों में न सिर्फ कृषि आय घटी है बल्कि इससे जुड़े काम करने वालों की मज़दूरी भी घटी है. प्रधानमंत्री मोदी कृषि आय और मज़दूरी घटने को जोशीले नारों से ढंकने की कोशिश में हैं.

कारवां पत्रिका और जयराम रमेश के ख़िलाफ़ अदालत पहुंचे अजीत डोभाल के बेटे, मानहानि का आरोप

बीते दिनों कारवां पत्रिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल की टैक्स हेवन देशों में कंपनियां खोलने से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसे लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उन देशों से आए एफडीआई पर सवाल उठाए थे.

कारवां का खुलासा: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे की कंपनी टैक्स हेवन में

डी-कंपनी नाम से अब तक दाऊद का गैंग ही होता था. भारत में एक और डी कंपनी आ गई है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और उनके बेटे विवेक और शौर्य के कारनामों को उजागर करने वाली कारवां पत्रिका की रिपोर्ट में यही शीर्षक दिया गया है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BJP President Amit Shah during BJP Election committee meeting at BJP Headquarters in New Delhi on Sunday. PTI Photo by Vijay Verma (PTI4_8_2018_000160B)

अगर 35 लाख लोगों की नौकरी गई है तो मोदी-शाह किन्हें रोज़गार देने की बात कर रहे हैं

उन 35 लाख लोगों को प्रधानमंत्री सपने में आते होंगे, जिनके एक सनक भरे फैसले के कारण नौकरियां चली गईं. नोटबंदी से दर-ब-दर हुए इन लोगों तक सपनों की सप्लाई कम न हो इसलिए विज्ञापनों में हज़ारों करोड़ फूंके जा रहे हैं. मोदी सरकार ने साढ़े चार साल में करीब 5000 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट के विज्ञापनों पर ख़र्च किए हैं.

नोटबंदी के बावजूद नहीं थम रहा चुनाव में धन का इस्तेमाल, 168 करोड़ रुपये नकद बरामद

चुनाव आयोग द्वारा मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव के दौरान कालेधन की व्यापक पैमाने पर धरपकड़ हुई है. अवैध रकम के अलावा शराब, मादक द्रव्य और कीमती जेवरात बरामद किए गए हैं.