कोविड-19 महामारी

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना महामारी की दूसरी लहर से एक करोड़ लोग हुए बेरोज़गार: सीएमआईई

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आकलन के अनुसार, बेरोज़गारी दर मई में 12 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 8 प्रतिशत थी. यानी इस दौरान क़रीब एक करोड़ भारतीयों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. इसका मुख्य कारण कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर है.

भोपाल का एक शवदाह गृह. (फोटो: पीटीआई)

भोपाल: मृतकों का अधिकारिक आंकड़ा 104, लेकिन 2,557 लोगों के अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल से हुए

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित दो श्मशान घाटों और एक क़ब्रिस्तान के रिकॉर्ड के अनुसार, एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक कुल 3,811 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, जिनमें से 2,557 शवों को अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के मुताबिक किया गया. इस पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में कोविड से हुईं मौतों को छिपाया नहीं जा रहा है.

अजय विश्नोई. (फोटो साभार: फेसबुक)

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक ने उठाया ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा

भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई ने सवाल उठाते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी. कृपया ध्यान दें. अप्रैल के प्रथम सप्ताह में महाराष्ट्र में 50,000 मरीज़ थे और ऑक्सीजन 457 मीट्रिक टन ख़र्च हुआ. वहीं, मध्य प्रदेश में 5,000 मरीजों पर 732 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ख़र्च क्यों हुआ?

Gandhinagar: Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra addresses a public meeting ahead of Lok Sabha elections, in Gandhinagar, Tuesday, March 12, 2019. (PTI Photo) (PTI3_12_2019_000096B)

उत्तर प्रदेश सरकार कोरोना वायरस के आंकड़े छुपा रही है: प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि कोरोना वायरस नियंत्रण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की कोई व्यवस्था और योजना ही नहीं दिख रही है. आज स्थिति यह हो गई है कि राजधानी लखनऊ में लाशों की कतार लग गई हैं. प्रदेश का आम आदमी अपने परिजन का अंतिम संस्कार भी सम्मानित तरीके से करने में लाचार है. सुबह से देर रात तक शवदाह गृहों और क़ब्रिस्तानों में लोग अपने मृत प्रियजनों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: भोपाल में सोशल मीडिया पर झूठी ख़बरें एवं संदेश फैलाने वालों के ख़िलाफ़ होगी कार्रवाई

मध्य प्रदेश में बुधवार को कोविड-19 संक्रमण के 9,720 मामले सामने आए और 51 लोगों की मौत हो गई. जो एक दिन का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके साथ ही प्रदेश में इस वायरस से अब तक संक्रमित पाए गए लोगों की कुल संख्या 363,352 तक पहुंच गई.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स /CC BY-SA 2.0)

लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा की शिकायतों में हुई बढ़ोतरी बरक़रार: राष्ट्रीय महिला आयोग

लॉकडाउन ख़त्म होने के एक साल बाद भी आयोग को हर महीने महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दो हज़ार से अधिक शिकायतें मिल रही हैं, जिनमें से लगभग एक चौथाई घरेलू हिंसा से संबंधित हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग को वर्ष 2019 में आयोग को घरेलू हिंसा से संबंधित 2,960 शिकायतें मिली थीं, जबकि 2020 में 5,297 शिकायतें प्राप्त हुई हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो :रॉयटर्स)

विश्व में कुल बाल वधुओं में से आधी भारत सहित पांच देशों में: यूनिसेफ

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी यूनिसेफ के रिपोर्ट के मुताबिक, दशक के अंत से पहले एक करोड़ अतिरिक्त बाल विवाह हो सकते हैं. इससे इस प्रथा को कम करने की वर्षों की प्रगति को ख़तरा उत्पन्न हो सकता है. दुनिया में आज अनुमानित 65 करोड़ लड़कियों और महिलाओं का विवाह बचपन में हुआ है. इनमें से आधी संख्या बांग्लादेश, ब्राज़ील, इथियोपिया, भारत और नाइज़ीरिया में है.

दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन के पास बसी एक बस्ती. (फोटो: पीटीआई)

आम बजट ने लफ़्फ़ाज़ी के अलावा शहरी ग़रीबों को कुछ नहीं दिया

वैश्विक महामारी दौर में केंद्रीय बजट के बाद शहरों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था जिसमें शब्दों के परे ऐतिहासिक करने का अवसर था. शहरी ग़रीबों को लगा था कि यह बजट उनका होगा, लेकिन कुछ घोषणाओं व शब्दों के खेल के अलावा बजट में महत्वपूर्ण रूप से उनकी बात नहीं हो पाई.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

2020 में राष्ट्रीय महिला आयोग को मिलीं हिंसा की 23 हज़ार से अधिक शिकायतें, छह साल में सर्वाधिक

राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में मिली कुल शिकायतों में से एक चौथाई घरेलू हिंसा से जुड़ी थीं. सर्वाधिक शिकायतें उत्तर प्रदेश से मिलीं, इसके बाद दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र रहे.

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स /CC BY-SA 2.0)

पांच राज्यों में 30 फ़ीसदी से अधिक महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार: एनएफएचएस रिपोर्ट

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा के मामलों में सबसे बुरा हाल कर्नाटक, असम, मिज़ोरम, तेलंगाना और बिहार का है, जहां तीस प्रतिशत से अधिक महिलाओं को अपने पति द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा का सामना करना पड़ा है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

साल के मध्य तक आठ करोड़ से ज्यादा लोग हुए विस्थापित, कोविड-19 से स्थिति हुई गंभीर: यूएनएचसीआर

शरणार्थियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि पहले से चल रहे और हालिया संघर्ष की स्थिति तथा कोरोना महामारी के कारण 2020 में लोगों के जीवन पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ा. विस्थापन के लिए मजबूर हुए 7.95 करोड़ लोगों में 3.4 करोड़ बच्चे थे.

दिल्ली के सराय रोहिल्ला रेलवे स्टेशन के पास बसी एक बस्ती. (फोटो: पीटीआई)

केंद्र ने अदालत से कहा, रेल लाइन के साथ बसी झुग्गियों पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी

बीते 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में दिल्ली में लगभग 140 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक के आसपास में फैली क़रीब 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को तीन महीने के भीतर हटाने का आदेश दिया था.

New Delhi: Commuters drive through heavy smog, a day after Diwali celebrations, in New Delhi, Thursday, Nov 08, 2018. According to the officials, Delhi recorded its worst air quality of the year the morning after Diwali as the pollution level entered 'severe-plus emergency' category due to the rampant bursting of toxic firecrackers. (PTI Photo/Ravi Choudhary)(PTI11_8_2018_000035B)

दुनियाभर में कोविड-19 से हुई 15 प्रतिशत मौतों का संबंध वायु प्रदूषण से: अध्ययन

जर्मनी के मैक्स प्लांक रसायन विज्ञान संस्थान के अध्ययन में कहा गया है कि वायु प्रदूषण और कोविड-19 मृत्यु दर के बीच सीधे जुड़ाव को नहीं दिखता, लेकिन वायु प्रदूषण के कारण इस बीमारी की गंभीरता बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी अन्य जोखिमों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संबंध देखा गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

दुनिया का हर छठा बच्चा घोर ग़रीबी में, महामारी से यह संख्या बढ़ने की आशंका: रिपोर्ट

विश्व बैंक और यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों को तुरंत बच्चों को इस संकट से उबारने की योजना बनाने की ज़रूरत है ताकि असंख्य बच्चों और उनके परिवारों को घोर ग़रीबी में जाने से रोका जा सके.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोरोना ने शिक्षा का संकट पैदा किया, शिक्षा में लैंगिक बराबरी चुनौती बनी: यूनेस्को

यूनेस्को ने अपनी वैश्विक शिक्षा निगरानी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस के चलते बंद स्कूलों में लड़कियों के वापस लौटने का ख़तरा बढ़ गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कम और निम्न मध्य आय वाले देशों में लड़कों की तुलना में 12 से 17 साल की लड़कियों के स्कूल न लौट पाने का ख़तरा अधिक है.