खनन

ओड़िशा: माली पहाड़ के लोग क़रीब दो दशकों से कंपनियों और व्यवस्था के खिलाफ क्यों खड़े हैं

देश जब कोविड- 19 से जूझ रहा है तब ओडिशा के माली पहाड़ के लोग कंपनी और सरकार से जूझ रहे हैं. वे सरकार से पूछ रहे हैं कि महामारी में लोगों की आवाजाही तो प्रतिबंधित हो गई है, पर कंपनियों का आदिवासी इलाकों में प्रवेश कब बंद किया जाएगा?

कर्नाटक: खनन के लिए ले जाए जा रहे विस्फोटक के ट्रक में धमाका, आठ लोगों की मौत

कर्नाटक के शिवमोगा ज़िले में गुरुवार रात साढ़े दस बजे के हुए यह विस्फोट हुआ. अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट की तीव्रता इतनी तेज़ थी कि पास के ज़िलों में भी झटके महसूस किए गए. मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

थोक मुद्रास्फीति अक्टूबर में बढ़कर 1.48 प्रतिशत पर आई, आठ माह का उच्चतम स्तर

इस साल फरवरी के बाद थोक मुद्रास्फीति का यह सबसे ऊंचा आंकड़ा है. फरवरी में यह 2.26 प्रतिशत पर थी. सितंबर में थोक मुद्रास्फीति 1.32 प्रतिशत और पिछले साल अक्टूबर में शून्य पर थी.

पंचकुलाः खनन विरोध को लेकर पुलिस-ग्रामीणों में झड़प, 14 ग्रामीण गिरफ़्तार

हरियाणा के पंचकुला के रत्तेवाली गांव में खनन को लेकर विरोध कर रहे सैकड़ों ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प हुई. इसमें तीन महिलाओं सहित 16 पुलिस अधिकारी घायल हो गए. ग्रामीणों का कहना है कि खनन से उनके गांव को नुकसान पहुंच रहा है.

इस साल मई में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 9.28 फीसदी हुई: सरकारी आंकड़े

केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के बाद लागू लॉकडाउन के दौरान लगातार दूसरे महीने खुदरा मुद्रास्फीति के आंशिक आंकड़े जारी किए. मई 2019 में खाद्य महंगाई दर 1.83 फीसदी थी.

राजस्थान: खनन क्षेत्र के लाखों मज़दूर भुगत रहे हैं लॉकडाउन का ख़ामियाजा

कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र हुए लॉकडाउन के बाद राजस्थान में खानें भी बंद हो गई थीं. अप्रैल से राज्य सरकार ने खनन कार्य की अनुमति दी थी, लेकिन अधिकतर मज़दूर घर लौट गए हैं या फिर उनके पास खान तक पहुंचने का साधन नहीं है.

खाने-पीने का सामान महंगा होने से थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 0.58 प्रतिशत पर पहुंची

प्याज सहित अन्य सब्जियों, दाल और मांस, मछली जैसी प्रोटीन वाली वस्तुओं के दाम चढ़ने से नवंबर माह में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई थी.

खुदरा मुद्रास्फीति दर 40 महीने के उच्चतम स्तर पर, औद्योगिक उत्पादन 3.8 फीसदी गिरा

बिजली, खनन और विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के कारण औद्योगिक उत्पादन अक्टूबर महीने में 3.8 प्रतिशत घट गया. एक साल पहले इसी माह में इसमें 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

A worker operates a hydraulic press machine at a workshop manufacturing flanges for automobiles in Mumbai, India, May 29, 2017. REUTERS/Shailesh Andrade/File Photo

सितंबर महीने में 4.3 फीसदी की कम हो गया औद्योगिक उत्पादन, आठ साल की सबसे बड़ी गिरावट

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 20.7 प्रतिशत घटा जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी. वहीं, विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 3.9 प्रतिशत, बिजली क्षेत्र का उत्पादन 2.6 प्रतिशत घट गया.

A man repairs gear parts used in automobiles inside a workshop at an industrial area in Mumbai, India. Small businesses have been struggling with the new tax. (Photo: Danish Siddiqui/Reuters)

अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 1.1 प्रतिशत घटा, सात साल का सबसे ख़राब प्रदर्शन

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 1.2 प्रतिशत घट गया. बिजली क्षेत्र का उत्पादन 0.9 प्रतिशत नीचे आया. टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन भी 9.1 प्रतिशत घट गया.

राजस्थान के कॉबल मज़दूरों को क्या ‘बंधुआ’ कहना ज़्यादा उचित होगा?

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के बूंदी ज़िले का बुधपुरा गांव कॉबल यानी फर्श पर लगाए जाने वाले पत्थरों के लिए जाना जाता है. पत्थर के खदानों से निकले मलबे से कॉबल बनाने के काम की स्थिति ये है कि एक बार जब मज़दूर यहां काम करना शुरू कर देता है, तो ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर कभी यहां से निकल नहीं पाता.

खनन से विस्थापित लोगों के कल्याण के लिए काम करने में ज़िला खनिज फाउंडेशन विफल: सीएसई

सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि देश के 20 ज़िला खनिज फाउंडेशन ट्रस्टों ने 18,467 करोड़ रुपये का फंड इकट्ठा किया लेकिन किसी ने भी एक भी लाभार्थी की पहचान नहीं की है.

Tuticorin: Police personnel baton charge at protestors who were demanding the closure of Vedanta's Sterlite Copper unit, in Tuticorin, on Wednesday. In fresh violence today, one person was killed during the clash, after police's open fire killing at least ten people yesterday, and injuring many others. (PTI Photo) (PTI5_23_2018_000194B)

वेदांता द्वारा पर्यावरणीय नियमों की धज्जियां उड़ाने में मोदी सरकार का पूरा सहयोग रहा है

एनडीए सरकार द्वारा दिसंबर 2014 में पर्यावरण क़ानून में इस तरह के बदलाव किए गए, जिससे वेदांता के तूतीकोरिन प्रोजेक्ट जैसे कुछ विशेष प्लांट को इससे प्रभावित होने वाले लोगों के राय-मशविरे के बिना बनाने की मंज़ूरी मिली.

लंबे समय से वेदांता का इतिहास जनविरोधी गतिविधियों का ही रहा है

वेदांता की छवि हमेशा से ही पर्यावरण और मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाली कंपनी की रही है. दिलचस्प ये है कि कंपनी नरेंद्र मोदी सरकार के ‘विकास एजेंडा’ के झंडाबरदारों में से एक है.