डार्विनवाद

भाजपा सांसद ने डार्विन के सिद्धांत को फिर दी चुनौती, कहा- हम ऋषियों की संतानें, बंदरों की नहीं

भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह ने कहा, हमारी भारतीय संस्कृति यह मानती है कि हम ऋषियों की संतानें हैं. जो लोग यह कहते हैं कि वे बंदरों की औलाद हैं, मैं ऐसे लोगों की भावनाओं को भी ठेस नहीं पहुंचाना चाहता हूं.

मोदी के मंत्री ने डार्विन के सिद्धांत को फिर दी चुनौती, कहा- मेरे पूर्वज बंदर नहीं थे

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि मैं एक किताब लिख रहा हूं. जिसमें डार्विन सिद्धांत पर एक अध्याय होगा. हम साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाण देकर साबित करेंगे कि हम जो कह रहे हैं, वह सही है.

हमारे मुल्क में ऐसे लोग सत्ता पर क़ाबिज़ हैं जो विज्ञान को आस्था का विषय मानते हैं

किसी भी देश या समाज का यह रवैया कि उसकी धार्मिक पुस्तक या मान्यताएं थियरी आॅफ एव्रीथिंग हैं और इनमें ही भूत, वर्तमान, भविष्य का सारा ज्ञान और विज्ञान निहित है, बहुत ही आत्मघाती है.

अतार्किकता और अवैज्ञानिकता के मामले में क्या हम पाकिस्तान बनने की ओर अग्रसर हैं?

भारत में बंददिमागी एवं अतार्किकता को जिस किस्म की शह मिल रही है और असहमति की आवाज़ों को सुनियोजित ढंग से कुचला जा रहा है, उसे रोकने की ज़रूरत है ताकि संविधान को बचाया जा सके.

मंत्री जी ने डार्विन को चुनौती देकर बंदरों पर लगे कलंक को मिटाने की तरफ़ बड़ा क़दम उठाया है

बंदरों ने केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह की बात का स्वागत किया है कि डार्विन के सिद्धांत को स्कूल-कॉलेजों की किताबों से निकाल देना चाहिए.

मोदी के मंत्री ने कहा, ‘इंसानों के विकास संबंधी डार्विन का सिद्धांत वैज्ञानिक रूप से ग़लत’

मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम में बदलाव की ज़रूरत. इंसान जब से पृथ्वी पर देखा गया है, हमेशा इंसान ही रहा है.