तिरंगा

तिरंगा और जम्मू कश्मीर का झंडा एक साथ थामूंगीः महबूबा मुफ़्ती

तिरंगा न थामने से संबंधित अपने एक बयान को लेकर विवाद होने के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि जब वह पहली बार विधायक बनी थीं, तब उन्होंने जम्मू कश्मीर के संविधान में अपने विश्वास की पुष्टि की थी, साथ ही भारत की संप्रभुता और अखंडता का भी समर्थन किया था. दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.

जम्मू कश्मीर: महबूबा मुफ़्ती के बयान से नाराज़ पीडीपी के तीन वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ी

पूर्व राज्यसभा सदस्य टीएस बाजवा सहित पीडीपी के तीन संस्थापक सदस्यों ने यह कहते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया कि वे पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती की अवांछित टिप्पणियों से असहज महसूस कर रहे थे.

जनरल बिपिन रावत चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त

सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पिछले मंगलवार को सीडीएस का पद बनाए जाने को मंजूरी दी थी जो तीनों सेनाओं से जुड़े सभी मामलों में रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के तौर पर काम करेगा. सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi with Union Ministers Nitin Gadkari, Rajnath Singh, Amit Shah and others during the first cabinet meeting, at the Prime Minister’s Office, in South Block, New Delhi, May 31, 2019. (PTI Photo)(PTI5_31_2019_000248B)

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति को मंज़ूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन, विभिन्न संवर्गों के विलय, दिवाला कानून, शस्त्र संशोधन विधेयक, बंगाल पूर्वी सीमांत नियामक, भारत-बांग्लादेश के बीच युवा मामलों में सहयोग के लिए अध्यादेश को भी मंज़ूरी दी.

आरटीआई एक्ट के दायरे में होगा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैन्य सुधार के तहत बीते 15 अगस्त को घोषणा की थी कि भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद सृजित किया जाएगा, जो तीनों सेनाओं का प्रमुख होगा.

प्रधानमंत्री ने की ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ’ पद सृजित करने की घोषणा

73वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने भाषण में जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छोटा परिवार रखना भी देशभक्ति है.

प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने जो झंडे गाड़े हैं, तिरंगा उनका रूप नहीं लगता

क्या भगवा झंडे के समर्थक संघ और संघ से जुड़े किसी भी व्यक्ति या दल की तिरंगे के प्रति ईमानदारी पर विश्वास किया जा सकता है?

अगर तिरंगा फहराना ही देशभक्ति है तो संघ पंद्रह साल पहले ही देशभक्त हुआ है

आज़ादी के 72 साल: क्या 2002 के पहले तिरंगा भारतीय राष्ट्र का राष्ट्रध्वज नहीं था या फिर आरएसएस खुद अपनी आज की कसौटी पर कहें तो देशभक्त नहीं था?

एएमयू को लेकर विवाद ज़रूर नया है पर षड्यंत्र वही पुराना है

इस समय इरादा मुसलमानों से जुड़ी हर जगह को संदिग्ध बनाने का है. उसका तरीक़ा है उन्हें विवादित बनाना. एक बार कुछ भी विवादित हो जाए तो उसमें दूसरा पक्ष जायज़ हो जाता है, जैसे बाबरी मस्जिद को विवादित बनाकर अब संघ के संगठन एक जायज़ पक्षकार बन बैठे हैं.

अब तिरंगे से सुकून नहीं, जुनून पैदा किया जा रहा है

तिरंगा लेकर आप कांवर यात्रा में चल सकते हैं. गणेश विसर्जन में भी उसे लहरा सकते हैं. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में विशाल डंडों में बांधकर मोटरसाइकिल पर दौड़ा सकते हैं. तिरंगे से आप मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा करने वालों के शव ढंक सकते हैं, लेकिन उससे आप अपनी बेपर्दगी ढंक नहीं सकते!

New Delhi: A woman sells the Indian national flag on a roadside ahead of Republic Day, in New Delhi on Wednesday. (PTI Photo by Ravi Choudhary)(PTI1_24_2018_000293B)

स्वतंत्रता के सात दशक बाद मिली भीख मांगकर भूख मिटाने की ‘आज़ादी’ का ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है जहां सरकार भोजन या नौकरियां प्रदान करने में असमर्थ है.

मोदी यह कहना बंद करें कि सवा सौ करोड़ जनता ने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया है

जनता से सलाह मांगना एक अच्छा विचार है, लेकिन प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में क्या बोलना है, इसके लिए जनता से सलाह मांगना, 15 अगस्त के भाषण के गंभीर काम को लोकप्रिय फरमाइशी कार्यक्रम में तब्दील कर देता है.

15 अगस्त 1975 ​के लाल क़िले और 15 अगस्त 2018 के लाल क़िले का फ़र्क़

इमरजेंसी लगाकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘नए भारत’ का उद्घोष किया था. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘न्यू इंडिया’ का ऐलान करेंगे.

सब कुछ बदलने का वादा करके आए मोदी ने भ्रष्ट आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया

आज जब दुनिया में नाना प्रकार के खोट उजागर होने के बाद भूमंडलीकरण की ख़राब ​नीतियों पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हमारे यहां उन्हीं को गले लगाए रखकर सौ-सौ जूते खाने और तमाशा देखने पर ज़ोर है.