पत्रकारों की सुरक्षा

कोविड संकट के बीच जान और नौकरी गंवाते पत्रकारों की सुनने वाला कौन है?

कोविड संक्रमण के ख़तरे के बीच भी देशभर के मीडियाकर्मी लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन मीडिया संस्थानों की संवेदनहीनता का आलम यह है कि जोखिम उठाकर काम रहे इन पत्रकारों को किसी तरह का बीमा या आर्थिक सुरक्षा देना तो दूर, उन्हें बिना कारण बताए नौकरी से निकाला जा रहा है.

दिल्ली दंगों के दौरान जिस पत्रकार को गोली लगी, वो किस हाल में है?

विशेष रिपोर्ट: उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की कवरेज के लिए गए एक स्थानीय चैनल के संवाददाता आकाश नापा को गोली लगी है. वे जीटीबी अस्पताल में भर्ती हैं.

जन गण मन की बात, एपिसोड 237: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस और भारतीय पत्रकारिता

जन गण मन की बात की 237वीं कड़ी में विनोद दुआ विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय पत्रकारिता के हालात पर चर्चा कर रहे हैं.

पत्रकार संदीप को दो अजनबी अस्पताल के बजाय पोस्टमार्टम हाउस लेकर गए थे

एंबुलेंस के ड्राइवर ने खुलासा किया है कि जब वे घायल संदीप को अस्पताल ले जाने घटनास्थल पहुंचे तो दो अन्जान व्यक्ति एंबुलेंस में घुस आए. उन्होंने संदीप को अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर ले जाने के बजाय सीधे पोस्टमार्टम हाउस ले जाने को कहा था.

संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय पत्रकारों की हत्या पर जताई चिंता

पत्रकार संदीप शर्मा के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि पत्रकार द्वारा सुरक्षा मांगने के बावजूद उसे सुरक्षा न देना राज्य सरकार की लापरवाही है.

मध्य प्रदेश: खनन माफिया और पुलिस के गठजोड़ का भांडाफोड़ करने वाले पत्रकार की ट्रक से कुचल कर मौत

भिंड के पत्रकार संदीप शर्मा द्वारा रेत माफिया और पुलिस की मिलीभगत सामने लाने के बाद से उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही थी. प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्र लिखकर उन्होंने सुरक्षा देने की मांग भी की थी.

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‘भारत में हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों के कारण मीडिया में सेल्फ सेंसरशिप की प्रवृत्ति बढ़ी’

अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि 2015 से अब तक सरकार की आलोचना करने वाले नौ पत्रकारों की हत्या कर दी गई.