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रेल मंत्री अगर ठीक से काम करते, तो ट्विटर पर दिन भर अपना प्रचार नहीं करना पड़ता

कैग ने 2014-15 से लेकर 2016-17 के बीच दिए गए 463 कांट्रैक्ट में काम करने वाले ठेके के मज़दूरों के हालात की समीक्षा की है. रिपोर्ट देखेंगे तो पता चलेगा कि रेलवे बग़ैर किसी मंत्री के चल रहा है. राम भरोसे कहना ठीक नहीं क्योंकि राम भरोसे तो सारा देश चलता है.

शिरडी इंडस्ट्रीज़ से जुड़े असल सवालों के जवाब अब भी बाकी हैं

शिरडी इंडस्ट्रीज़ को एनसीएलटी से मिले रिवाइवल पैकेज, ख़ासकर इसे कर्मचारियों के बकाया पीएफ को 5-7 साल तक टालने की अनुमति कैसे मिली, इसकी पड़ताल की जानी चाहिए.