फसल बीमा योजना में बदलाव

Nagpur: A farmer ploughs his field at a cotton plantation, in Hingna village near Nagpur, Friday, July 5, 2019. (PTI Photo) (PTI7_5_2019_000147B)

फसल बीमा योजना की सफलता के गान के बीच निजी कंपनियों ने ख़ारिज किए 75 फीसदी दावे

विशेष रिपोर्ट: कृषि क़ानूनों के विरोध के बीच ख़ुद को ‘किसान हितैषी’ बताते हुए मोदी सरकार ने फसल बीमा योजना की सफलता के दावे किए हैं. हालांकि दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि इस बीच किसानों द्वारा दायर किए गए फसल बीमा दावों को ख़ारिज करने की संख्या में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है, जहां एचडीएफसी ने 86, टाटा ने 90 और रिलायंस ने 61 फीसदी दावों को ख़ारिज किया है.

किसानों के फसल बीमा दावों को ख़ारिज करने के मामलों में 900 फ़ीसदी की बढ़ोतरी

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत साल 2017-18 में किसानों के 92,869 दावों को ख़ारिज किया था. इसके अगले ही साल 2018-19 में आंकड़ा दोगुनी से भी ज्यादा हो गया है और इस दौरान 2.04 लाख दावों को ख़ारिज किया गया.

फंड की कमी से जूझ रही कृषि योजनाओं के लिए हुई थी बजट बढ़ाने की मांग, वित्त मंत्रालय ने नकारा

विशेष रिपोर्ट: कृषि मंत्रालय ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अलावा कृषि लोन पर ब्याज सब्सिडी, राज्यों को दाल वितरण, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट को बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन वित्त मंत्रालय द्वारा इन मांगों को ख़ारिज कर दिया गया.

फसल बीमा योजना: कोरोना संकट के बीच नहीं हुआ किसानों के 80 फीसदी बीमा दावों का भुगतान

कृषि मंत्रालय से आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ 2019-20 रबी सीज़न के लिए फसल बीमा योजना के तहत कुल 3,750 करोड़ रुपये के दावे किए गए थे, जिसमें समयसीमा बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 775 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है.

Amritsar: A farmer shows his wheat crop flattened and damaged by strong winds and rains on the outskirts of Amritsar, Wednesday, April 17, 2019. (PTI Photos)

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलावों से कौन होगा प्रभावित?

हाल ही में मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कई बदलावों को मंजूरी दी है. इसके तहत केंद्र ने अपनी प्रीमियम सब्सिडी को घटा ली है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राज्यों पर काफी भार बढ़ सकता है.