बिहार सरकार

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

बिहार: चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण इस्तीफ़ा देने की पेशकश की

बिहार की राजधानी पटना स्थित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का मामला. राजद नेता तेजस्वी यादव ने अस्पताल के अधीक्षक का पत्र ट्विटर पर साझा कर नीतीश सरकार निशाना साधते हुए राज्य में कोविड-19 के ख़िलाफ़ बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई है.

ख़ुदा बख़्श लाइब्रेरी. (फोटो साभार: बिहार टूरिज़्म वेबसाइट)

ख़ुदा बख़्श लाइब्रेरी: एक फ्लाईओवर के लिए ऐतिहासिक धरोहर को नष्ट करना कितना उचित है

बिहार सरकार पटना में एक एलिवेटेड फ्लाईओवर के निर्माण के लिए देश की सबसे पुरानी लाइब्रेरी में से एक ख़ुदा बख़्श पब्लिक लाइब्रेरी के एक बड़े हिस्से को तोड़ने जा रही है. कई साहित्यकार, शिक्षाविद्, कलाकार और छात्र इसके विरोध में हैं, जिनका आरोप है कि सरकार सोची-समझी साज़िश के तहत संस्थाओं को ख़त्म करने पर आमादा है.

WhatsApp Image 2021-03-24 at 23.37.24 (1)

बिहार विधानसभा में राजद विधायकों की पिटाई; लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन

वीडियो: बिहार विधानसभा में विधायकों के साथ बदसलूकी और मारपीट की घटना की पूरे देश में निंदा की जा रही है. इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता शक्ति सिंह, वरिष्ठ पत्रकार फ़ैज़ान अहमद और द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.

Grand Alliance legislators stage a dharna in the main entrance of Bihar Assembly during Budget session, in Patna, Tuesday, March 23, 2021. Photo: PTI

बिहार: पुलिस विधेयक विधान परिषद से भी पास, संसद में उठा विधायकों से बदसलूकी का मुद्दा

बीते 23 मार्च पुलिस बल को कथित तौर पर बगैर वारंट के गिरफ़्तारी की शक्ति देने वाला विधेयक नीतीश कुमार सरकार के बिहार विधानसभा में पेश करने के बाद सदन में अराजकता की स्थिति देखने को मिली थी. विधानसभा में पुलिस बुला ली गई थी. कई विपक्षी विधायकों ने पुलिस पर उनके साथ दुर्व्यवहार करने की शिकायत की थी.

बीते मंगलवार को राजद विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिंह के कक्ष के बाहर धरना दिया. (फोटो: पीटीआई)

बिहार: पुलिस विधेयक को लेकर विधानसभा से सड़क तक हंगामा, विधायकों को घसीटकर बाहर किया गया

बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस विधेयक, 2021 बिहार मिलिट्री पुलिस (बीएमपी) का नाम बदलने का प्रस्ताव करता है, उसे कहीं अधिक शक्तियां देता है और कथित तौर पर बगैर वारंट के लोगों को गिरफ़्तार करने का उसे अधिकार देता है. राजद नेता तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों का आरोप है कि सदन में पुलिस ने विपक्षी विधायकों पर हाथ उठाया गया और महिला विधायकों के साथ बदसलूकी की गई.

(फोटो: पीटीआई)

बिहार में कोविड-19 की जांच रिपोर्ट के आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश

एक ​मीडिया रिपोर्ट में बिहार के जमुई, शेखपुरा और पटना के छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना वायरस को लेकर हो रही जांच की पड़ताल की गई है. इसमें पता चला है कि आंकड़ों की पड़ताल की गई है. फ़र्ज़ी नाम और मोबाइल नंबर के सहारे स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा फ़र्ज़ी रिपोर्ट तैयार करने का मामला सामने आया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

सोशल मीडिया पर ‘एंटी-नेशनल’ पोस्ट करने वालों का रिकॉर्ड तैयार करेगी उत्तराखंड पुलिस

उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने पुलिस को सोशल मीडिया पर ‘एंटी-नेशनल’ टिप्पणी करने वाले लोगों का रिकॉर्ड तैयार करने को कहा है. इससे पहले बिहार सरकार ने मंत्रियों व अधिकारियों के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर ‘अपमानजनक’ टिप्पणी करने को साइबर अपराध बताते हुए कड़ी कार्रवाई की बात कही थी.

Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar attends the foundation stone laying ceremony of 'Multipurpose Prakash Kendra and Udyan' at the campus of Guru Ka Bagh in Patna, Sunday, Sept 9, 2018. (PTI Photo)(PTI9_9_2018_000102B)

बिहार सरकार का फरमान, विरोध प्रदर्शन या सड़क जाम में शामिल हुए तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी

नीतीश सरकार द्वारा जारी एक आदेश में विरोध प्रदर्शन या सड़क जाम करने वालों को सरकारी नौकरी और ठेकों से वंचित रखने की बात कही गई है. विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इस पर कहा कि नीतीश कुमार मुसोलिनी और हिटलर को चुनौती दे रहे हैं. नौकरी भी नहीं देंगे और विरोध भी प्रकट नहीं करने देंगे.

बिहार में एक चुनावी सभा के दौरान नीतीश कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर)

किसान आंदोलन के बीच बिहार में अनाज ख़रीद की अच्छी व्यवस्था का नीतीश कुमार का दावा झूठा है

एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि क़ानूनों का समर्थन करते हुए कहा है कि उनकी सरकार ने 2006 में एपीएमसी एक्ट ख़त्म कर दिया, जिसका बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिला. हालांकि आधिकारिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि बिहार के कृषि मंत्रालय ने केंद्र को पत्र लिखकर बताया था कि उनके यहां न तो पर्याप्त गोदाम हैं और न ही अनाज ख़रीदने की अच्छी व्यवस्था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

बिहार: ‘सरकार रूपया का मदद देहलस लेकिन ओसे बेटी थोड़े न लौट के आई’

मुज़फ़्फ़रपुर और आसपास के क्षेत्रों में अमूमन अगस्त-सितंबर में चमकी बुखार का भीषण प्रकोप देखने को मिलता है, पर इस बार मामले भी कम आए और मौतें भी कम हुईं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बावजूद इसके बिहार को चमकी बुखार से निपटने के लिए अभी और तैयारी करनी होगी.

अगस्त महीने में बिहार सरकार द्वारा अनुमोदित नियोजित शिक्षक सेवाशर्त 2020 की प्रति जलाकर विरोध जताते बिहार के नियोजित शिक्षक. (फोटो साभार: ट्विटर/@Dharmendrajee1)

बिहार चुनाव: ‘नियोजित शिक्षकों में जैसा गुस्सा है उससे साफ है कि ये सरकार नहीं रहेगी’

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के क़रीब चार लाख से अधिक नियोजित शिक्षकों की सेवा शर्त, पूर्ण वेतनमान जैसी विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से नीतीश सरकार से ठनी हुई है. अब शिक्षक संघ और शिक्षकों का कहना है कि वे इस चुनाव में सरकार से आर पार की लड़ाई करने जा रहे हैं.

WhatsApp Image 2020-10-28 at 17.33.39 (1)

बिहार क्या इस दलदल से निकल पाएगा?

वीडियो: बिहार विधानसभा चुनावों पर मुज़फ़्फ़रपुर से स्वतंत्र पत्रकार सौरभ कुमार, चुनाव विश्लेषक आशीष रंजन और दिल्ली विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के छात्र नील माधव से प्रो. अपूर्वानंद की बातचीत.

डुमरी गांव का चंचरी पुल. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

‘नेता चुनाव के समय आश्वासन देते हैं कि इस साल पुल बन जाएगा, अब तक तो वो दिन नहीं आया’

ग्राउंड रिपोर्ट: तीन नदियों से घिरे मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले के औराई विधानसभा क्षेत्र के कई गांव आज भी आवागमन के लिए ग्रामीणों द्वारा चंदा इकठ्ठा करके बनाए गए बांस-बल्ली के अस्थायी पुलों पर निर्भर हैं. ग्रामीण बताते हैं कि कई बार इस बारे में नेताओं से मिले, पर आज तक उनके आश्वासन का कोई नतीजा नहीं निकला.

गंडक नदी के किनारे नाव का इंतजार करते धूमनगर गांव के लोग. (सभी फोटो: मनोज सिंह)

‘नेता पुल बनवा देंगे कहकर वोट ले जाते हैं और हम वहीं के वहीं रह जाते हैं’

ग्राउंड रिपोर्ट: यूपी-बिहार सीमा पर पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर विधानसभा क्षेत्र के गंडक नदी के किनारे बसे आखिरी धूमनगर गांव के कुछ टोले केवल नावों के सहारे जुड़े हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पुल बनाने की मांग उठने के बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई सुनवाई नहीं है.

सुनीता देवी के पैर टखने के पास बेतरतीब तरीके से मुड़ गए हैं.

बिहार: फ्लोराइड से बर्बाद होती पीढ़ियां चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है

ग्राउंड रिपोर्ट: गया शहर से 8 किलोमीटर दूर चूड़ी पंचायत के चुड़ामननगर में कमोबेश हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति पानी से मिले फ्लोराइड के चलते शरीर में आई अक्षमता से प्रभावित है. बड़े-बड़े चुनावी वादों के बीच इस क्षेत्र के लोगों को साफ़ पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नहीं है.