भारतीय किसान यूनियन

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन का विपक्ष ने किया समर्थन, कृषि मंत्री ने कहा- सरकार फिर बातचीत को तैयार

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते छह महीनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार और किसानों के बीच अब तक 11 दौर की बातचीत हुई है, लेकिन गतिरोध बना हुआ है. किसान संगठन तीनों नए कृषि क़ानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाले क़ानून की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

(फोटोः पीटीआई)

अगर किसान कोरोना फैलाता तो दिल्ली की सीमाओं पर सबसे ज़्यादा मामले होते: किसान नेता

ऐसा कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के चलते प्रदर्शन स्थलों पर किसानों की संख्या कम होती जा रही है. हालांकि किसानों का दावा है कि संक्रमण का असर सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर लगभग नहीं के बराबर था. एक किसान नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की अकर्मण्यता के कारण गांवों में कोरोना फैला है. अगर किसान कोरोना फैलाता तो सीमाओं पर संक्रमण फैलता.

राकेश टिकैत. (फोटो: पीटीआई)

किसानों को सरकार दिल्ली से हरियाणा भेजना चाह रही है, उसकी चाल कामयाब नहीं होने देंगे: टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार चाहती है कि आंदोलन का केंद्रबिंदु दिल्ली की सीमाओं से हरियाणा में स्थानांतरित किया जाए, लेकिन हम दिल्ली की सीमा को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, आंदोलन जारी रहेगा.

राजस्थान में कृषि कानूनों के खिलाफ हुआ प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

महामारी के मद्देनज़र कृषि क़ानून वापस लेना ही समझदारी होगी

कोविड महामारी की दूसरी लहर का कृषि उत्पादन पर असर पड़ने के अलावा सप्लाई चेन भी महामारी की चपेट में आने लगी है, जिससे उत्पादन और वितरण दोनों पर प्रभाव पड़ने वाला है. आमदनी घटने और ख़र्च बढ़ने जैसे कई कारणों के चलते सरकार का नए कृषि क़ानूनों को वापस लेना ज़रूरी है.

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के साथ पुलिस की हल्की झड़प भी हुई. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने पर किसानों ने मनाया ‘काला दिवस’, लहराए काले झंडे

केंद्र सरकार के विवादित कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते साल 26 नवंबर से दिल्ली चलो मार्च के तहत किसानों ने अपना प्रदर्शन शुरू किया था. पंजाब और हरियाणा में दो दिनों के संघर्ष के बाद किसानों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश की मंजूरी मिल गई थी. इसके बाद दिल्ली की तीनों सीमाओं- सिंघू, टिकरी और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों ने प्रदर्शन शुरू किया था, जो आज भी जारी है.

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हमारी लड़ाई कॉरपोरेट घरानों से है, ये रुक नहीं सकती: किसान नेता दर्शन पाल

वीडियो: किसान नेता डॉ. दर्शन पाल कहते हैं कि वे महामारी से अवगत हैं और जोखिमों को समझते हैं, लेकिन अगर किसान आंदोलन और उनकी मांग से पीछे हटते हैं तो और भी अधिक भारतीय अपनी आजीविका खो देंगे. किसान इस आंदोलन के तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं.

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन करते किसान. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर हो रहे प्रदर्शन को 12 दलों का समर्थन मिला

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहीं 40 यूनियनों के प्रधान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 मई को प्रदर्शन के छह महीने पूरे होने के मौके पर ‘काला दिवस’ मनाने की घोषणा की है. देश के 12 प्रमुख विपक्षी दलों ने किसानों का समर्थन देते हुए कहा है कि केंद्र को अहंकार छोड़कर तत्काल किसानों से बातचीज शुरू करनी चाहिए.

दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी. (फोटो: पीटीआई)

200 से अधिक विदेशी कार्यकर्ताओं ने कहा- सरकार कृषि क़ानून रद्द करें, ताकि किसान कोरोना से बच सकें

कनाडा, अमेरिका एवं अन्य जगहों के 200 से अधिक शिक्षाविदों, ट्रेड यूनियन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पत्र लिखकर किसानों की मांगों को समर्थन करते हुए कहा है कि कृषि क़ानून रद्द करने के साथ-साथ सभी राजनीतिक बंदियों को भी रिहा किया जाए.

दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों विरोध में किसानों के प्रदर्शन का चार महीने हो गए हैं. (फोटो: रॉयटर्स)

किसानों ने कृषि क़ानून पर बातचीत शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा

किसानों ने पत्र में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार 25 मई तक बातचीत नहीं शुरू करती है तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा. 26 मई को आंदोलन के छह महीने पूरे होने पर किसानों ने ‘काला दिवस’ मनाने की घोषणा की है. किसानों और सरकार के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है. 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद से यह बातचीत बंद है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

सिंघू बॉर्डर के पास प्रदर्शन में शामिल रहे दो किसानों की मौत, एक कोरोना संक्रमित पाए गए

अधिकारियों ने बताया कि पटियाला निवासी बलबीर सिंह और लुधियाना निवासी महिंदर सिंह की बीते 18 मई को मौत हो गई. वे सिंघू बॉर्डर के निकट विरोध प्रदर्शन कर रहे समूह में शामिल थे. केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते छह महीनों से किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

नई दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का विरोध प्रदर्शन (फोटो: पीटीआई)

सरकार हमारे धैर्य की परीक्षा नहीं ले, वार्ता करें और हमारी मांगें मान ले: किसान संगठन

केंद्र के तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते छह महीनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि किसान आंदोलन में 470 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है. कई आंदोलनकारियों को अपनी नौकरियां, पढ़ाई एवं दूसरे काम छोड़ने पड़े. सरकार अपने नागरिकों, अन्नदाताओं के प्रति कितना अमानवीय एवं लापरवाह रुख़ दिखा रही है.

राकेश टिकैत. (फोटो: पीटीआई)

सरकार आमंत्रित करती है तो किसान बातचीत के लिए तैयार, मांग में कोई बदलाव नहीं: राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी की ओर से जारी बयान में राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत वहीं से बहाल होगी, जहां 22 जनवरी को ख़त्म हुई थी. मांग भी वहीं हैं कि तीनों काले क़ानूनों को निरस्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए नया क़ानून बनाया जाए.

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सिंघू बॉर्डर: किसान के साथ छात्रों, महिलाओं, बुज़ुर्गों और सेना के पूर्व जवानों का प्रदर्शन जारी

वीडियो: सिंघू बॉर्डर पर नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान विरोध शुरू हुए चार महीने पूरे हो गए. सिंघू बॉर्डर पर छात्र, बुज़ुर्ग और महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. इनका कहना है कि जब तक कृषि क़ानून वापस नहीं होंगे, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा. मोनिका ग्यामलानी और चिन्मय ग्यामलानी की रिपोर्ट.

झारखंड की राजधानी रांची में विपक्षी दल के सदस्यों में भारत बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया. (फोटो: पीटीआई)

किसान आंदोलन के चार महीने पूरे होने पर ‘भारत बंद’ का मिला-जुला असर

तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने दिल्ली के सिंघू, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर जारी प्रदर्शन के चार महीने पूरे होने पर सुबह छह बजे से लेकर शाम छह बजे तक बंद का आह्वान किया था.

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किसान आंदोलन और डेटिंस्ट से एक्टिविस्ट बनीं नवकिरण

वीडियो: नवकिरण ने मेडिकल की पढ़ाई करके एक बड़े प्राइवेट अस्पताल में डेंटिस्ट के तौर पर कई सालों तक काम किया है. नवकिरण अब कृषि क़ानून के विरोध में दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर चल रहे आंदोलन का हिस्सा हैं. वे किसान आंदोलन को समर्पित अख़बार ट्रॉली टाइम्स के संपादकीय समूह में भी शामिल हैं.